सेबी ( सौजन्य : सोशल मीडिया ) 
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बदलेगा सिक्योरिटी मार्केट में सेविंग्स के सटीक आंकड़ों की गणना का तरीका, सेबी ने जारी किया प्रस्ताव

समय के साथ बचत करने का तरीका भी बदल रहा है। लोग अब सेविंग्स करने के लिए सिर्फ एफडी पर निर्भर नहीं है, प्रतिभूति बाजार के माध्यम से बचत के तरीके को अपनाया जा रहा है। सेबी ने सिक्योरिटी बाजार के माध्यम से की जाने वाली सेविंग्स की गणना पद्धति में भी बदलाव करने का फैसला लिया है।

अपूर्वा नायक

नई दिल्ली : भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने बुधवार को सिक्योरिटी मार्केट को लेकर बड़ी बात कही है। एक रिपोर्ट के अनुसार पता चला है कि घरेलू बचत के आंकड़ों को और अधिक सटीक बनाने के लिए उपयोग करने वाली गणना टेक्नीक को बदलने का विचार किया जा रहा है, इसे लेकर एक प्रस्ताव भी जारी किया जा रहा है। इस रिपोर्ट में प्रतिभूति बाजार के द्वारा की जानेवाली बचत संबंधी जानकारी हासिल करने वाली गणना पद्धति में बदलाव का सुझाव किया गया है।

सेबी ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘‘तौर-तरीकों में संशोधन से वास्तविक मूल्यों को प्राप्त करके और प्रतिभूति बाजार में वर्तमान में गैर-शामिल खंडों/वित्तीय उत्पादों को शामिल कर आंकड़े अधिक सटीक होंगे और गुणवत्ता में सुधार होगा।''

पिछले दशक में कई संरचनात्मक बदलावों से गुजरा

इसमें गणना पद्धति में सुधार को लेकर तीन बदलावों के प्रस्ताव किये गये हैं। पहला, निवेशकों की श्रेणियों को फिर से परिभाषित करना, दूसरा, इन निवेशकों के उपयोग वाले उत्पादों के प्रकारों को व्यापक बनाना और तीसरा, नए घटक को जोड़ना जो वर्तमान में शामिल नहीं हैं। यह पाया गया कि भारतीय प्रतिभूति बाजार के माध्यम से परिवारों की बचत का आकलन गणना की मौजूदा पद्धति के माध्यम से पूरी तरह नहीं हो पा रहा। इसका कारण भारतीय प्रतिभूति बाजार पिछले दशक में कई संरचनात्मक बदलावों से गुजरा है।

बचत प्रतिरूप भी समय के साथ बदला

इसके अलावा, भारतीय परिवारों का बचत प्रतिरूप भी समय के साथ बदल गया है। मौजूदा पद्धति के तहत, भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई, सेबी और एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया यानी एम्फी से प्राप्त म्यूचुअल फंड निवेश से संबंधित वास्तविक आंकड़ों पर विचार करता है। जबकि इक्विटी और बॉन्ड खंड से संबंधित आंकड़े अनुमान या फॉर्मूले पर आधारित होते हैं। इसके अलावा, भारतीय प्रतिभूति बाजार में कुछ खंडों और उत्पादों को मौजूदा गणना में शामिल नहीं किया जाता है।

एनजीओ, ट्रस्ट और चैरिटी को भी शामिल करने का प्रस्ताव

रिपोर्ट में निवेशकों की श्रेणी में आय या निवेश के आकार की परवाह किए बिना सभी घरेलू व्यक्तिगत निवेशकों और एचयूएफ (हिंदू अविभाजित परिवार) को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। इसमें गैर-लाभकारी संस्थानों (एनपीआईएसएच) जैसे एनजीओ, ट्रस्ट और चैरिटी को भी शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है। गणना की मौजूदा पद्धति में खुदरा, एचएनआई (उच्च नेटवर्थ वाले व्यक्ति), हिंदू अविभाजित परिवार और व्यक्ति शामिल हैं।

गणना दैनिक और वार्षिक रूप से की जाएगी

वित्तीय उत्पादों के मामले में रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट), बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट (इनविट) और वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) के निवेश आंकड़ों को शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है। वर्तमान में, इन आंकड़ों पर विचार नहीं किया जाता है। इक्विटी और बॉन्ड के लिए, प्राथमिक और द्वितीयक बाजार दोनों से वास्तविक राशि को शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है। परिवारों और एनपीआईएसएच द्वारा इक्विटी और बॉन्ड में शुद्ध निवेश की गणना दैनिक और वार्षिक रूप से की जाएगी।

म्यूचुअल फंड में शुद्ध प्रवाह

वर्तमान में, केवल प्राथमिक बाजार के आंकड़ों पर विचार किया जाता है। म्यूचुअल फंड और ईटीएफ के लिए, म्यूचुअल फंड में शुद्ध प्रवाह और द्वितीयक बाजार में ईटीएफ लेनदेन को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। वर्तमान में, केवल म्यूचुअल फंड में शुद्ध प्रवाह पर विचार किया जाता है।

( एजेंसी इनपुट के साथ )

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