National Stock Exchange IPO: देश के शीर्ष स्टॉक एक्सचेंज एनएसई के बहुप्रतीक्षित मेगा आईपीओ का इंतजार खत्म हो गया है। इस मेगा सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की तिथि और मूल्य दायरा तय कर दिया गया है। महा निर्गम में 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर का मूल्य दायरा निर्धारित किया गया है। जबकि मूल्य करीब 2,000-2,100 रुपये रहने का अनुमान था, लेकिन अब मूल्य छोटे निवेशकों के हित में कम रखा गया है। इस आधार पर निर्गम का आकार करीब 22,569 करोड़ रुपये होगा। एनएसई आईपीओ 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर को बंद होगा।
यह घोषणा करते हुए शुक्रवार को एनएसई के प्रबंध निदेशक व सीईओ आशीष कुमार चौहान ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज होती ग्रोथ के साथ-साथ देश में निवेश संस्कृति तेजी से बढ़ रही है। अब महानगरों के ही नहीं बल्कि छोटे-छोटे शहरों से लोग इक्विटी में निवेश कर रहे हैं और वेल्थ बना रहे हैं।
शेयरों की लिस्टिंग के बारे में चौहान ने कहा कि हमने सेबी के पास एनएसई के शेयरों की लिस्टिंग एनएसई में ही करने के लिए कोई आवेदन नहीं किया। लिहाजा सेबी के नियमानुसार एनएसई के शेयरों की लिस्टिंग दूसरे एक्सचेंज बीएसई में होगी, जो 24 सितंबर को हो सकती है। बीएसई के शेयर भी बीएसई में नहीं बल्कि एनएसई में ट्रेड होते हैं।
चौहान ने कहा कि एनएसई को सलाह देने वाले 20 मर्चेंट बैंकरों की टीम ने विचार-विमर्श और दुनियाभर में जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन के बाद उचित मूल्य दायरा तय करने की सलाह दी। जिसके आधार पर आईपीओ मूल्य तय किया गया है।
हालांकि, बाजार के मंद हालात को देखते हुए इस मेगा निर्गम का आकार करीब 15 प्रतिशत कम कर 22,569 करोड़ रुपये तक रखा गया है। एनएसई ने बिक्री पेशकश (ओएफएस) के तहत बेचे जाने वाले शेयरों की संख्या 14.9 करोड़ से घटाकर 12.64 करोड़ कर दी है। पहले करीब 30,000 करोड़ रुपये का आईपीओ होने का अनुमान लगाया जा रहा था। 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27,870 करोड़ रुपये के आईपीओ के बाद यह देश का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ होगा।
हालांकि यह 2022 में आए एलआईसी के 21,000 करोड़ रुपये के आईपीओ से भी बड़ा होगा। आईपीओ के तहत मौजूदा शेयरधारक एसबीआई, एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस), बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन, जीआईसी, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, न्यू इंडिया एश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस और एसबीआई कैपिटल अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचेंगे।
वर्ष 1992 में देश के बैंकों और वित्तीय संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित एनएसई लगातार देश का सबसे बड़ा इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स एक्सचेंज बना हुआ है। साथ ही एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स में कुल टर्नओवर के मामले में भी यह सबसे बड़ा एक्सचेंज है। रेडसीर रिपोर्ट के अनुसार, कैश इक्विटी और इक्विटी फ्यूचर्स में NSE का मार्केट पर लगभग पूरा दबदबा है और इक्विटी ऑप्शंस में भी इसकी स्थिति मज़बूत है।
वित्त वर्ष 2026 में, NSE का भारतीय कैश मार्केट में कुल टर्नओवर के हिसाब से 93%, इक्विटी फ्यूचर्स में 99.79%, प्रीमियम टर्नओवर पर इक्विटी ऑप्शंस में 74.71%, एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी फ्यूचर्स में 99.48% और एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी ऑप्शंस में 100.00% हिस्सा था।
दुनिया के प्रमुख लिस्टेड एक्सचेंज ग्रुप्स के मुकाबले, कैश इक्विटी ट्रेड और इक्विटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या के हिसाब से यह सबसे बड़ा मल्टी-एसेट क्लास एक्सचेंज है, जिसकी वित्त वर्ष 2026 में ग्लोबल हिस्सेदारी क्रमशः 11.38% और 51.18% है और यह लगातार 7 वर्षों से ट्रेड किए गए कॉन्ट्रैक्ट्स के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव्स एक्सचेंज रहा है।
30 जून 2026 तक, NSE ने भारत के 99% से ज्यादा पोस्टल कोड क्षेत्रों में 132.37 मिलियन यूनिक रजिस्टर्ड निवेशकों को सेवाएं दीं, 261.36 मिलियन रजिस्टर्ड निवेशक खातों और 1,328 ट्रेडिंग सदस्यों को सपोर्ट किया, और 3,005 लिस्टेड कंपनियों को होस्ट किया। वित्त वर्ष 2026 में कुल आय ₹18,713 करोड़ रही और नेट प्रॉफिट ₹10,302 करोड़ रहा।
जबकि वित्त वर्ष 2024 में कुल आय ₹16,352 करोड़ थी और नेट प्रॉफिट ₹8,306 करोड़ था। 30 जून 2026 को समाप्त तीन महीनों में, रेवेन्यू 13.10% बढ़कर ₹4,560 करोड़ हो गया और नेट प्रॉफिट 6.71% बढ़कर ₹3,120 करोड़ हो गया। रोजगार के मामले में भी एक्सचेंज अग्रणी है। 30 जून 2026 को इसके कर्मचारियों की संख्या 2,914 थी, जबकि एक साल पहले यह संख्या 2,676 थी।