निर्मला सीतारमण, (केंद्रीय वित्त मंत्री) 
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GST 2.0: पेट्रोल-डीजल और शराब जीएसटी के दायरे में आएंगे? निर्मला सीतारमण ने साफ कर दी तस्वीर

GST 2.0: जीएसटी में हुए इस बड़े रिफॉर्म के बाद लोगों का सवाल था कि क्या पेट्रोल-डीजल और शराब जैसी चीजें भी जीएसटी के दायरे में आएंगी। एक इंटरव्यू में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसका जवाब दिया है।

मनोज आर्या

GST On Petrol-Diesesl And Liquor: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता और मंत्रियों के समूह (GoP) की मौजूदगी में हुई 56वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। 8 साल बाद इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम में बदलाव की घोषणा से आम जनता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। परिषद ने जीएसटी के मौजूदा चार स्लैब 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत को खत्म करते हुए अब सिर्फ 2 स्लैब 5% और 18% करने की मंजूरी दे दी है।

सरकार द्वारा टैक्स सिस्टम में किए जा रहे बदलाव के बाद 28 प्रतिशत की अधिकांश चीजें 18 प्रतिशत टैक्स बकेट में शिफ्ट हो जाएंगी। वहीं, 12 प्रतिशत टैक्स स्लैब के दायरे में आने वाले ज्यादातर प्रोडक्ट्स 5 प्रतिशत टैक्स स्लैब के दायरे में आएंगे। वहीं सरकार ने सिन प्रोडक्ट जैसे कि सिगरेट, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों पर और लग्जरी प्रोडक्ट्स पर 40 प्रतिशत टैक्स तय किया है। जीएसटी का नया दर 22 सितंबर से लागू होगा।

कंपनियों की सलाह से GST में बदलाव किया गया है

जीएसटी में हुए इस बड़े रिफॉर्म के बाद लोगों का सवाल था कि क्या पेट्रोल-डीजल और शराब जैसी चीजें भी जीएसटी के दायरे में आएंगी। गौरतलब है कि अब तक पेट्रोल-डीजल और शराब को जीएसटी से बाहर रखा गया है। वित्त मंत्री ने ये बात फिर दोहराई है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता यह है कि जीएसटी रेट कट का लाभ आम लोगों तक पहुंचे।

पेट्रोल-डीजल और शराब पर वित्त मंत्री का जवाब

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और बीमा कंपनियों सहित उद्योग प्रतिनिधियों ने जीएसटी सुधार करने लागू करने में पूर्ण समर्थन और आश्वासन दिया है। एक अन्य इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल और शराब जीएसटी से बाहर ही रहेंगे। इन्हें निकट भविष्य में जीएसटी में लाए जाने की संभावना नहीं है।

पेट्रोल-डीजल और शराब GST दायरे से बाहर

आपको बताते चलें कि फिलहाल पेट्रोल-डीजल और शराब को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है। शराब की बिक्री से होने वाली कमाई राज्य सरकारों के लिए उनके कुल टैक्स रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा होता, जो कई राज्यों में 15 से 25 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। इसी वजह से शराब को जीएसटी में शामिल नहीं किया गया है। अगर शराब को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है कि राज्य सरकारों की इनकम पर सीधा असर पड़ेगा। टैक्स जानकारों का मानना है कि राज्यों के विकास और अन्य खर्चों के लिए शराब से मिलने वाला राजस्व उनके लिए काफी अहम है।

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