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Jio Platforms IPO को 1 करोड़ से ज्यादा आवेदन मिलने का दावा, वारी एनर्जीज का पिछला रिकॉर्ड पीछे छूटा।
30,213 रुपये करोड़ के इश्यू का प्राइस बैंड 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर और एक लॉट में 12 शेयर हैं।
भारी सब्सक्रिप्शन के बावजूद शेयर आवंटन और लिस्टिंग पर मुनाफे की गारंटी नहीं है।
Jio Platforms IPO Subscription: जियो प्लेटफॉर्म्स IPO ने शेयर बाजार में एक नया रिकॉर्ड बना दिया है। कंपनी के आईपीओ को सब्सक्रिप्शन बंद होने से पहले ही 1 करोड़ से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड वारी एनर्जीज के नाम था, जिसे अपने आईपीओ के दौरान करीब 97 लाख आवेदन मिले थे।
जियो प्लेटफॉर्म्स के इश्यू को निवेशकों से मिल रही जबरदस्त प्रतिक्रिया के बीच दोपहर 12:20 बजे तक यह कुल मिलाकर 7 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हो चुका था। अब सवाल है कि आखिर इस आईपीओ में ऐसा क्या है, जिसके कारण निवेशक इतनी बड़ी संख्या में पैसा लगाने के लिए आगे आए हैं? इसकी कीमत कितनी है, किस कैटेगरी में सबसे ज्यादा बोली लगी है और शेयर कब लिस्ट होंगे? आइए, आसान भाषा में समझते हैं।
बता दें कि जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को 1 करोड़ से ज्यादा आवेदन मिले हैं। इसका मतलब है कि एक करोड़ से अधिक आवेदनकर्ताओं ने इस इश्यू में शेयर खरीदने के लिए बोली लगाई है। इसी के साथ यह दुनिया का पहला ऐसा आईपीओ बन गया है, जिसे 1 करोड़ से ज्यादा आवेदन मिलने का दावा किया गया है।
इससे पहले वारी एनर्जीज के आईपीओ को करीब 97 लाख आवेदन मिले थे। इसके बाद बजाज हाउसिंग फाइनेंस और भारत कोकिंग कोल का नाम आता है, जिन्हें लगभग 90 लाख आवेदन मिले थे। जियो प्लेटफॉर्म्स ने इन कंपनियों के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।
दोपहर 12:20 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को कुल मिलाकर 7 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिला था। इसका मतलब है कि निवेशकों ने ऑफर में उपलब्ध शेयरों की तुलना में सात गुना से अधिक शेयरों के लिए बोली लगाई।
सब्सक्रिप्शन के मामले में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बिडर्स (QIB) सबसे आगे हैं। इस कैटेगरी के लिए रिज़र्व शेयरों को 14.7 गुना सब्सक्राइब किया गया है। वहीं, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) की कैटेगरी में भी मजबूत मांग देखने को मिल रही है, जहां रिज़र्व हिस्से को अब तक 9.67 गुना सब्सक्रिप्शन मिला है।
आईपीओ में निवेशकों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि किस तरह के निवेशक कितनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
QIB यानी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स: इस श्रेणी में म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और दूसरे पात्र बड़े संस्थागत निवेशकों जैसे निवेशक आते हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में इसी श्रेणी की ओर से सबसे ज्यादा मांग देखने को मिली।
NII यानी नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स: इस श्रेणी में ऐसे बड़े निवेशक आते हैं, जो संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में नहीं आते और रिटेल निवेशकों की निर्धारित सीमा से अधिक निवेश करते हैं।
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ के लिए कुल मांग 4 रुपये लाख करोड़ से ज्यादा बताई गई है। इसमें एंकर निवेशकों की ओर से करीब 2.5 रुपये लाख करोड़ और अन्य सार्वजनिक निवेशकों की ओर से करीब 1.5 रुपये लाख करोड़ की मांग शामिल है।
एंकर निवेशक वे बड़े संस्थागत निवेशक होते हैं, जिन्हें आईपीओ खुलने से पहले निर्धारित नियमों के तहत शेयर आवंटित किए जाते हैं। इनकी भागीदारी से बड़े निवेशकों की दिलचस्पी का संकेत मिल सकता है।
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का प्राइस बैंड 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। इसका मतलब है कि निवेशक इस तय दायरे में शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं। एक लॉट में 12 शेयर रखे गए हैं।
अगर कोई निवेशक अपर प्राइस बैंड यानी 1,119 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से एक लॉट के लिए आवेदन करता है, तो उसे इतनी रकम की जरूरत होगी:
प्रति शेयर कीमत: 1,119 रुपये
एक लॉट में शेयर: 12
एक लॉट की कुल कीमत: 13,428 रुपये
जियो प्लेटफॉर्म्स का यह इश्यू 30,213 रुपये करोड़ का बताया गया है। इसे पूरी तरह फ्रेश इश्यू के रूप में पेश किया गया है, यानी इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से शेयर बेचने वाला ऑफर फॉर सेल (OFS) हिस्सा शामिल नहीं है।
बता दें कि निवेशक आईपीओ के आज शाम 7 बजे तक बोली लगा सकते हैं। आवेदन करने से पहले अपने बैंक या ब्रोकर के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध समय-सीमा जरूर जांच लें, क्योंकि अलग-अलग माध्यमों पर आवेदन स्वीकार करने का समय अलग हो सकता है।
वहीं शेयरों का अलॉटमेंट सोमवार, 26 अक्टूबर को और शेयर बाजार में लिस्टिंग 29 अक्टूबर को होगा। अलॉटमेंट का मतलब है कि आवेदन करने वाले निवेशकों को कितने शेयर मिले हैं। अगर किसी श्रेणी में मांग उपलब्ध शेयरों से बहुत ज्यादा होती है, तो हर आवेदनकर्ता को शेयर मिलना जरूरी नहीं है।