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IPO से पहले Jio प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड ने अपने अगले दौर की ग्रोथ का रोडमैप सामने रखा
आकाश अंबानी ने मोबिलिटी, होम और एंटरप्राइज-इंटरनेशनल को ग्रोथ इंजन बताया
जियो प्लेटफॉर्म्स ने प्रति शेयर 1,065 से 1,119 रुपये का मूल्य दायरा तय किया है
Jio Platforms IPO: 30,213 करोड़ रुपये के देश के सबसे बड़े आईपीओ से पहले जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड ने अपने अगले दौर की ग्रोथ का रोडमैप सामने रखा है। मुंबई में पत्रकारों के साथ बातचीत में जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने मोबिलिटी, होम और एंटरप्राइज-इंटरनेशनल को कंपनी के 3 बड़े ग्रोथ इंजन बताया।
आकाश अंबानी ने आगे कहा कि टेक्नोलॉजी, डिजिटल गेटवे और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर जियो प्लेटफॉर्म्स वित्त वर्ष 2031 तक भारत की करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल इकोनॉमी में बड़ी भूमिका निभा सकती है। इस मौके पर आकाश अंबानी की बहन और जियो प्लेटफॉर्म्स की निदेशक ईशा अंबानी तथा विख्यात बैंकर उदय कोटक भी मौजूद थे।
जियो प्लेटफॉर्म्स ने आईपीओ के लिए प्रति शेयर 1,065 से 1,119 रुपये का मूल्य दायरा तय किया है। इस महानिर्गम में कंपनी 10 रुपये अंकित मूल्य वाले अधिकतम 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से कोई बिक्री पेशकश (ओएफएस) शामिल नहीं है। आकाश अंबानी ने कहा कि आईपीओ से प्राप्त पूरा पैसा कर्ज भुगतान में उपयोग किया जाएगा।
कंपनी पर फिलहाल करीब 3 अरब डॉलर का शुद्ध कर्ज है, जिसका भुगतान कर जियो प्लेटफॉर्म्स नेट ऋण मुक्त कंपनी बन जाएगी। आईपीओ के लिए बोली प्रक्रिया 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक चलेगी, जबकि एंकर निवेशक 19 अक्टूबर को बोली लगा सकेंगे। कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर को शेयर बाजारों में सूचीबद्ध होने की उम्मीद है।
विगत 10 वर्षों से काफी तेज ग्रोथ प्राप्त कर रही जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपना आईपीओ मूल्य आकर्षक रखा है। वित्त वर्ष 2026 में जियो प्लेटफॉर्म्स का परिचालन राजस्व 14.6% बढ़कर 1,46,885 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 1,28,218 करोड़ रुपये था। इस दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ भी 15% बढ़कर 30,049 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 26,109 करोड़ रुपये था और ईपीएस 34 रुपये रही। 1,119 रुपये के ऊपरी मूल्य पर जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 33 के पीई रेशियो पर ही लाया जा रहा है।
आईपीओ मूल्य पर जियो प्लेटफॉर्म्स की निदेशक ईशा अंबानी ने कहा कि 1977 में, मेरे दादाजी धीरूभाई अंबानी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को पब्लिक किया था। आज से लगभग 50 साल पहले की बात है। तब से लेकर अब तक रिलायंस इंडस्ट्रीज ने निवेशकों को 29% का सालाना रिटर्न दिया है। अब हमारी कोशिश है कि मेरे भाई आकाश अंबानी के नेतृत्व में जियो प्लेटफॉर्म्स की ग्रोथ के साथ-साथ हमारे निवेशकों की भी लॉन्ग टर्म में वेल्थ क्रिएट हो।
आकाश अंबानी ने कहा कि जियो की नीति शुरूआत से ही किफायती सेवाएं देने की रही है। देश के टेलिकॉम सेक्टर में जियो के प्रवेश के बाद डेटा दरें पहले से काफी सस्ती हुई हैं। आज भी जियो की प्रति गीगाबाइट डेटा दर सबसे कम 4.90 रुपये है, जबकि उद्योग का औसत लगभग 7.50 रुपये है। आगे भी कंपनी शुल्क बढ़ाने के बजाय अतिरिक्त सेवाओं की पेशकश पर अधिक ध्यान देगी।
आकाश अंबानी ने कहा कि जियो का फोकस हर भारतीय, हर घर और हर एंटरप्राइज को बेहतर और किफायती डिजिटल सेवाएं देने पर रहा है और आगे भी रहेगा। जियो के पास 53.3 करोड़ से अधिक का विशाल ग्राहक आधार हैं और कंपनी भारत के 60% से ज्यादा डेटा ट्रैफिक को संभालती है। आकाश ने कहा कि मोबिलिटी में कंपनी अगले पांच वर्षों में करीब 34 करोड़ नए 4G और 5G ग्राहकों का बाजार देख रही है।
आकाश के मुताबिक इसमें करीब 10 करोड़ ऐसे नए ग्राहक होंगे, जो पहली बार मोबाइल कनेक्शन लेंगे, जबकि करीब 24 करोड़ ग्राहक 2G से 4G और 5G की ओर बढ़ सकते हैं। वित्त वर्ष 2026 में जियो के नेट एक्टिव मोबाइल ग्राहक दूसरे नंबर के ऑपरेटर के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा बढ़े।
होम ब्रॉडबैंड को कंपनी आने वाले वर्षों का बड़ा ग्रोथ इंजन मान रही है। जियो के अभी करीब 2.86 करोड़ फिक्स्ड ब्रॉडबैंड ग्राहक हैं और कंपनी इस बेस को आगे 10 करोड़ घरों तक ले जाना चाहती है। वित्त वर्ष 2026 में देश में जुड़े कुल नए फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कनेक्शनों में करीब 67.5% हिस्सेदारी जियो की रही। आकाश ने कहा कि कंपनी फाइबर के साथ अपनी वायरलेस टेक्नोलॉजी के जरिए देश के 19,000 पिन कोड तक पहुंच बढ़ा रही है।
आकाश ने कहा कि तीसरा ग्रोथ इंजन एंटरप्राइज और इंटरनेशनल कारोबार है। जियो भारत में करीब 5।1 ट्रिलियन रुपये यानी 56।8 अरब डॉलर का एंटरप्राइज डिजिटल सर्विसेज बाजार देख रहा है। आकाश के मुताबिक देश की लगभग 65% बैंक शाखाएं जियो नेटवर्क से जुड़ी हैं। जियो अपनी बनाई एंड-टू-एंड टेक्नोलॉजी स्टैक को चुनिंदा विदेशी बाजारों में भी मॉनेटाइज करना चाहता है।
कंपनी की योजना सिर्फ सॉफ्टवेयर बेचने की नहीं, बल्कि ग्लोबल टेलीकॉम कंपनियों के साथ मैनेज्ड सर्विस पार्टनर के रूप में काम करने की है। आकाश ने कहा कि इससे भारत टेक्नोलॉजी आयातक से टेक्नोलॉजी निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।