आईपीएल 2026, (सोर्स-IPL) 
बिज़नेस

IPL Auction: आईपीएल में कितने करोड़ों का होता है कारोबार? इकोनॉमी का 'छक्का' लगाती है यह लीग

Indian Premier League: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) के 19वें सीजन के लिए अबु धाबी में मिनी ऑक्शन का जोरदार रोमांच जारी है। 360 से ज्यादा खिलाड़ियों पर ऑक्शन में बोली लग रही है।

मनोज आर्या

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) अब केवल एक क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं रहा, यह भारतीय अर्थव्यवस्था का एक बड़ा इंजन बन चुका है। अपनी शुरुआती साल (2008) के बाद से, यह लीग मनोरंजन, खेल, विज्ञापन और मीडिया के सबसे बड़े संगम के रूप में उभरी है। आईपीएल का कुल इकोनॉमिक वैल्यू अब 15 से 20 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये से लेकर 1.66 लाख करोड़ रुपये) के बीच होने का अनुमान है, जो इसे दुनिया की सबसे मूल्यवान स्पोर्ट्स लीग्स में से एक बनाता है।

IPL से किस-किस सेक्टर की होती है कमाई?

1. मीडिया राइट्स: कारोबार का सबसे बड़ा खजाना

आईपीएल की कमाई का सबसे बड़ा और स्थिर स्रोत मीडिया राइट्स की बिक्री है। यह वह राशि है जो ब्रॉडकास्टर्स (टीवी चैनल और डिजिटल प्लेटफॉर्म) प्रसारण के अधिकार खरीदने के लिए चुकाते हैं। हालिया डील की बात करें तो 2023-2027 चक्र के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने मीडिया राइट्स 48,390 करोड़ रुपये में बेचे हैं। इस  डील ने आईपीएल को प्रति मैच वैल्यू के मामले में अमेरिकी नेशनल फुटबॉल लीग (NFL) के बाद दुनिया की दूसरी सबसे महंगी स्पोर्ट्स लीग बना दिया है।

2. ब्रांड वैल्यू और फ्रेंचाइजी

आईपीएल फ्रेंचाइजी खुद अरबों डॉलर की संपत्ति हैं। समय के साथ, इन टीमों का ब्रांड मूल्य लगातार बढ़ा है। चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) और मुंबई इंडियंस (MI) ये टीमें अक्सर सबसे मूल्यवान फ्रेंचाइजी की सूची में शीर्ष पर रहती हैं। 2022 में जोड़ी गई दो नई टीमें- गुजरात टाइटन्स (GT) और लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) की बिक्री ही 12,715 करोड़ रुपये में हुई थी। यह दिखाता है कि नई टीमों को भी खरीदना कितना महंगा हो गया है।

3. विज्ञापन और स्पॉन्सरशिप 

आईपीएल विज्ञापनदाताओं के लिए एक 'सोने की खान' है। लाखों दर्शकों तक पहुंचने के लिए ब्रांड्स बड़े पैमाने पर निवेश करते हैं। मुख्य टाइटल स्पॉन्सरशिप (जैसे टाटा, वीवो) के लिए बड़ी रकम चुकाई जाती है, जो सालाना 400 से 500 करोड़ रुपये तक हो सकती है। ब्रॉडकास्टर्स को विज्ञापनों से बड़ा राजस्व मिलता है। 10 सेकंड के विज्ञापन स्लॉट की कीमत पीक टाइम में 20 से 30 लाख रुपये तक जा सकती है। इसके अलावा हर टीम अपनी जर्सी, हेलमेट और ग्राउंड पर विज्ञापन स्लॉट बेचकर करोड़ों रुपये कमाती है।

4. खिलाड़ियों की सैलरी 

खिलाड़ियों पर खर्च की जाने वाली राशि भी आईपीएल के इकोनॉमी फ्लो का एक बड़ा हिस्सा है। प्रत्येक फ्रेंचाइजी के पास खिलाड़ियों को खरीदने के लिए एक निश्चित सैलरी कैप (पर्स) होता है, जो अब लगभग 100 करोड़ रुपये प्रति टीम है। इस हिसाब से, 10 टीमों का कुल सैलरी खर्च ही 1000 करोड़ रुपये प्रति वर्ष से अधिक हो जाता है, जिससे देश और विदेश के खिलाड़ियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलता है।

5. इकोनॉमी पर व्यापक प्रभाव

आईपीएल का कारोबार सिर्फ खिलाड़ियों और टीम मालिकों तक सीमित नहीं है, इसका व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ता है। यह लीग इवेंट मैनेजमेंट, हॉस्पिटैलिटी, यात्रा, मीडिया उत्पादन, सुरक्षा और ग्राउंड स्टाफ के लिए हजारों रोजगार के अवसर पैदा करती है। मैचों के दौरान घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलता है, जिससे मेजबान शहरों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा होता है।

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