हाई-स्पीड ट्रेन की तस्वीर, फोटो ( सो. सोशल मीडिया )  
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तैयार हो जाइए! सिर्फ 2.5 घंटे दिल्‍ली से पटना... हवाई जहाज को टक्कर देगी ये नई ट्रेन

High Speed Train India: भारत में हाईस्‍पीड ट्रेन को लेकर नई जानकारी सामने आई है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो देश में अगली पीढ़ी की बुलेट ट्रेन का निर्माण शुरू हो सकता है।

अमन उपाध्याय

High Speed Train India: भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। विशेष रूप से रेलवे और सड़क परियोजनाओं में लाखों करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट भी इन्हीं प्रमुख योजनाओं में शामिल है। इस प्रोजेक्ट का काम तेज गति से चल रहा है और कुछ ही महीनों में देश की पहली बुलेट ट्रेन अपने रूट पर दौड़ती दिखाई दे सकती है।

वहीं, हाई-स्पीड ट्रेन को लेकर एक और बड़ी खबर सामने आई है। अगर योजना के अनुसार सब कुछ ठीक रहा तो भारत में नेक्स्ट जनरेशन बुलेट ट्रेन का निर्माण शुरू हो सकता है। इसके लिए भारत जापान के साथ समझौता कर सकता है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय जापान की यात्रा पर हैं और इस दौरान दोनों देशों के बीच E10 शिंकानसेन बुलेट ट्रेन की भारत में निर्माण से संबंधित करार होने की उम्मीद है।

2029 तक प्रोजेक्ट पूरा होने की उम्मीद

मिली जानकारी के अनुसार, भारत और जापान मिलकर जल्द ही नई पीढ़ी की ई-10 शिंकानसेन बुलेट ट्रेन विकसित कर सकते हैं। यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस दो दिवसीय जापान यात्रा के दौरान की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों ने इस साझेदारी के लिए सैद्धांतिक सहमति पर पहुंच चुके हैं। ई-10 शिंकानसेन, जापान की ALFA-X ट्रेन पर आधारित होगी, लेकिन इसे भारतीय परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित किया जाएगा। यह कदम भारत-जापान के अहमदाबाद-मुंबई हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट को और मजबूती देगा। कुल 508 किलोमीटर लंबा यह प्रोजेक्ट है, जिसका पहला 50 किलोमीटर का खंड 2027 तक गुजरात में चालू होने की संभावना है, जबकि पूरा प्रोजेक्ट 2029 तक पूरा होने की उम्मीद है।

400 किलोमीटर प्रति घंटे की होगी रफ्तार

इस प्रोजेक्ट का आकार और रणनीतिक महत्व बेहद बड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी की पहल और जापान के साथ उनके गहरे रिश्तों का परिणाम यह हुआ है कि अब बुलेट ट्रेनें सीधे भारत में ही विकसित होने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। नई ई-10 शिंकानसेन ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 400 किलोमीटर प्रति घंटे होगी, जबकि पहले भारत के लिए ई-5 शिंकानसेन (320 किमी/घंटा) का विकल्प तय था। प्रधानमंत्री की विशेष रुचि और जापानी नेतृत्व के साथ उनके घनिष्ठ संबंधों के कारण भारत को इस अत्याधुनिक तकनीक का फायदा मिल रहा है।

सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का करेंगे दौरा

पीएम मोदी अपने जापानी समकक्ष शिगेरू इशिबा के साथ वार्षिक शिखर सम्मेलन और बिज़नेस फोरम में हिस्सा लेंगे। इसके अगले दिन, दोनों प्रधानमंत्री शिंकानसेन ट्रेन से सेनदाई जाएंगे, जहां वे एक सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का दौरा करेंगे और जापानी प्रांतों के गवर्नरों से मुलाकात करेंगे। जापानी अधिकारियों का मानना है कि भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के निर्माण में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उल्लेखनीय है कि 1964 में शुरू होने के बाद से शिंकानसेन का सुरक्षा रिकॉर्ड बेहतरीन रहा है और अब तक किसी भी यात्री की जान ट्रेन हादसे में नहीं गई है।

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