BRICS ट्रेड में भारत की स्थिति (सोर्स- AI)
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BRICS बिजनेस में भारत की स्थिति: रूस-चीन के साथ ट्रेड सरप्लस या घाटा? जानें क्या कहते हैं आंकड़े

BRICS Trade Deficit: भारत का ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 226.1 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जिस पर चिंता जताते हुए भारत ने 6 महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आसान बाजार पहुंच की मांग की है।

प्रिया सिंह

Reducing India BRICS Trade Deficit: भारत BRICS समिट की मेजबानी कर रहा है। कई देशों के प्रमुख और प्रतिनिधि भारत में इकट्ठा हुए हैं। ऐसे में ब्रिक्स में भारत की स्थिति को समझना आवश्यक है। भारत का ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 226.1 अरब डॉलर हो गया है।

18वें ब्रिक्स सम्मेलन में भारत ने इस बढ़ते व्यापार असंतुलन पर चिंता जताते हुए सदस्य और पार्टनर देशों से भारतीय उत्पादों के लिए बाजार पहुंच आसान बनाने की मांग की। भारत ने फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग, केमिकल्स और डिजिटल सर्विस जैसे छह प्रमुख क्षेत्रों में नियमों को सरल करने और कस्टम क्लीयरेंस तेज करने पर जोर दिया है।

BRICS देशों के साथ व्यापार बढ़ा, लेकिन घाटा भी बढ़ा

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में भारत और समूह के देशों के बीच बढ़ता व्यापारिक असंतुलन महत्वपूर्ण मुद्दा बना। वित्त वर्ष 2025-26 में ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा 226.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

हालांकि, इसी समय में दोनों पक्षों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 417.5 अरब डॉलर हो गया। पांच साल पहले वित्त वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा करीब 203 अरब डॉलर था। यानी इस दौरान कारोबार का आकार तेजी से बढ़ा, लेकिन आयात और निर्यात की गति में बड़ा अंतर बना रहा।

आयात में तेज बढ़ोतरी से बढ़ा व्यापार घाटा

बीते पांच वर्षों में ब्रिक्स देशों को भारत का निर्यात 48.8% बढ़कर 95.7 अरब डॉलर हो गया। इसके मुकाबले ब्रिक्स देशों से भारत का आयात 131.8% बढ़कर 321.8 अरब डॉलर पहुंच गया।

भारत के कुल वैश्विक निर्यात में ब्रिक्स बाजारों की हिस्सेदारी करीब 22% है। वहीं, भारत के कुल वैश्विक आयात में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी 40% से अधिक है। यही अंतर भारत के बढ़ते ब्रिक्स बिजनेस लॉस की बड़ी वजहों में शामिल है।

चीन और रूस से सबसे बड़ा व्यापार घाटा

Rubix Data Sciences के रिसर्च आंकड़ों के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2025 में ब्रिक्स देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा करीब 224 अरब डॉलर रहा। वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 117 अरब डॉलर था।

इस घाटे में चीन की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर से अधिक रहा। इसके बाद रूस का स्थान है, जिसके साथ भारत का व्यापार घाटा करीब 55 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

Egypt और Ethiopia के साथ स्थिति अलग

ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा एक जैसा नहीं है। Egypt और Ethiopia जैसे नए सदस्य देशों के साथ भारत व्यापार अधिशेष की स्थिति में है।

ब्रिक्स के विस्तार के बाद समूह में खाड़ी और अफ्रीकी देशों की भूमिका भी बढ़ी है। ऐसे में भारत इन बाजारों में अपने निर्यात को बढ़ाकर व्यापार संतुलन सुधारने की संभावनाएं तलाश रहा है।

छह क्षेत्रों में आसान बाजार पहुंच की मांग

बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने के लिए भारत ने BRICS देशों से छह प्रमुख क्षेत्रों में नियम आसान करने का आग्रह किया है। इनमें फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग, केमिकल्स और डिजिटल सर्विस शामिल हैं।

भारत ने इन क्षेत्रों में तकनीकी मानकों को सरल बनाने, प्रक्रियाओं को कम जटिल करने और कस्टम क्लियरेंस में तेजी लाने पर जोर दिया है। भारत का मानना है कि ऐसी बाधाएं कम होने से भारतीय निर्यातकों को ब्रिक्स बाजारों में अधिक समान और निष्पक्ष अवसर मिल सकते हैं।

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