होम लोन के प्री-ईएमआई ब्याज पर टैक्स छूट का नियम साफ (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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Home Loan Tax: होम लोन के प्री-ईएमआई ब्याज पर टैक्स छूट का नियम साफ, अब नहीं रहेगी कोई भी उलझन

Home Loan Tax Benefit: बजट 2026 में इनकम टैक्स एक्ट 2025 के सेक्शन 22(2) में संशोधन का प्रस्ताव है, जिससे साफ हो गया है कि होम लोन के ब्याज पर 2 लाख की छूट में प्री-ईएमआई का ब्याज भी शामिल होगा।

प्रिया सिंह

Income Tax Act 2025 Amendment: बजट 2026 के माध्यम से सरकार ने होम लोन लेने वाले लाखों टैक्सपेयर्स की एक बड़ी उलझन को दूर करने का अहम फैसला लिया है। इनकम टैक्स एक्ट 2025 के सेक्शन 22(2) में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है ताकि प्री-ईएमआई ब्याज पर टैक्स छूट साफ हो सके। इस संशोधन के बाद अब टैक्सपेयर्स को घर का कब्जा मिलने से पहले चुकाए गए ब्याज पर मिलने वाले डिडक्शन का लाभ स्पष्ट होगा। यह बदलाव पुराने कानून और नए कानून के प्रावधानों के बीच पैदा हुए अंतर और असमंजस को पूरी तरह से खत्म करने वाला साबित होगा।

पहले वाली उलझन क्या थी

पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 में यह व्यवस्था पहले से स्पष्ट थी कि 2 लाख की लिमिट में करंट और प्री-पजेशन ब्याज शामिल है। लेकिन नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के सेक्शन 22(2) में प्री-पजेशन पीरियड इंटरेस्ट के शामिल होने का कोई साफ जिक्र मौजूद नहीं था। इस स्पष्टता की कमी के कारण कानून की अलग-अलग व्याख्याएं की जा रही थीं जिससे टैक्सपेयर्स के बीच काफी असमंजस बना हुआ था।

बजट 2026 का बड़ा प्रस्ताव

सरकार ने इस भ्रम को दूर करने के लिए बजट 2026 के माध्यम से सेक्शन 22(2) में जरूरी संशोधन करने का प्रस्ताव पेश किया है। अब साफ शब्दों में कहा गया है कि ब्याज पर मिलने वाले 2 लाख के डिडक्शन में प्रायर-पीरियड इंटरेस्ट को भी शामिल किया जाएगा। इस संशोधन के बाद नए एक्ट का यह सेक्शन भी पुराने कानून के सेक्शन 24(b) की तरह ही प्रभावी और स्पष्ट हो जाएगा।

क्या है प्री-ईएमआई ब्याज

जब कोई व्यक्ति घर बनवा रहा होता है या अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी खरीदता है तो कब्जा मिलने तक दिए ब्याज को प्रायर-पीरियड इंटरेस्ट कहते हैं। इस ब्याज को सीधे एक साल में क्लेम नहीं किया जा सकता बल्कि इसे पांच बराबर हिस्सों में बांटकर क्लेम करने का नियम है। घर पूरा होने के बाद के पांच सालों में यह कटौती होम लोन के कुल 2 लाख के सालाना डिडक्शन की लिमिट में शामिल होगी।

टैक्सपेयर्स को मिलने वाला लाभ

इस बदलाव से ज्यादातर टैक्सपेयर्स पर असर नहीं पड़ेगा क्योंकि यह पुराने नियम को ही नए कानून में स्पष्ट तौर पर जोड़ता है। जिन लोगों का प्री-पजेशन ब्याज ज्यादा है उन्हें ध्यान रखना होगा कि करंट और पुराना ब्याज मिलाकर कुल डिडक्शन 2 लाख से ज्यादा नहीं हो सकता। यह संशोधन विवाद की संभावना को खत्म करेगा और टैक्स कंप्लायंस के लिहाज से होम लोन धारकों के लिए बहुत अहम साबित होगा।

अधिकतम सीमा और शर्तें

सेल्फ-ऑक्युपाइड प्रॉपर्टी के लिए ब्याज भुगतान पर मिलने वाली अधिकतम टैक्स छूट की सीमा 2 लाख पर ही स्थिर रखी गई है। चाहे मौजूदा साल का ब्याज हो या कब्जा मिलने से पहले वाला बकाया ब्याज, दोनों का कुल योग निर्धारित सालाना सीमा के अंदर ही होना चाहिए। इस स्पष्टीकरण से अब टैक्स फाइल करना आसान होगा क्योंकि सरकार ने पुराने नियमों को ही नए एक्ट में जगह दे दी है।

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