Bullion Market Update: मंगलवार, 6 अक्टूबर को सोने की कीमतों में बड़ी हलचल देखने को नहीं मिली, लेकिन चांदी का भाव थोड़ा नीचे आया है। विदेशी बाजार में निवेशक इस समय अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले फैसलों के संकेत तलाश रहे हैं। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड अभी भी ऊंची बनी हुई है और डॉलर की मजबूती भी सोने पर दबाव डाल रही है।
कॉमेक्स पर सोना 4,159.40 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी घटकर 61.10 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। भारत में भी आज सोने-चांदी के भाव पर कई चीजों का असर देखने को मिल सकता है। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल, रुपये की कीमत, घरेलू मांग और RBI का मौद्रिक नीति फैसला प्रमुख हैं। ऐसे में खरीदारी करने वालों के लिए आज का बाजार जानना जरूरी है।
घरेलू बाजार में फिलहाल ज्वेलर्स और रिटेल खरीदारों की मांग बहुत मजबूत नहीं है। इसी वजह से कीमतों में बड़ी तेजी के बजाय उतार-चढ़ाव सीमित रहने की स्थिति बनी हुई है। मंगलवार को भी घरेलू भाव तय होने में अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ रुपये और डॉलर की चाल अहम रहेगी।
मंगलवार को COMEX में सोने का भाव करीब 4,159.40 डॉलर प्रति औंस रहा। इस दौरान कीमत में कोई बड़ी तेजी या गिरावट देखने को नहीं मिली। वहीं चांदी लगभग 61.10 डॉलर प्रति औंस पर रही और इसमें हल्की कमजोरी दर्ज की गई।
फिलहाल निवेशक जल्दबाजी में बड़ी खरीदारी करने से बच रहे हैं। बाजार को अमेरिका के ब्याज दरों से जुड़े संकेतों का इंतजार है। इन्हीं संकेतों से आगे सोने-चांदी की दिशा काफी हद तक तय हो सकती है।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती का असर सोने पर सीधे पड़ता है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का कारोबार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर मजबूत होने पर दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है। इससे इसकी मांग पर दबाव आ सकता है।
इसके साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड भी ऊंची बनी हुई है। बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ने पर बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों, जैसे सोने और चांदी, की आकर्षकता कुछ कम हो जाती है। यही वजह है कि इस समय बुलियन मार्केट में तेजी सीमित दिखाई दे रही है।
अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों पर बाजार की खास नजर है। हाल के कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद इस महीने फेड की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव आया है। अब निवेशक आने वाली रोजगार रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
अगर आंकड़े अर्थव्यवस्था में कमजोरी दिखाते हैं तो ब्याज दरों को लेकर अलग उम्मीद बन सकती है। वहीं मजबूत आंकड़े फेड के फैसले को लेकर बाजार की धारणा बदल सकते हैं। इसका सीधा असर डॉलर, बॉन्ड यील्ड और सोने की कीमतों पर पड़ सकता है।
बतो दें कि सोने की कीमत सिर्फ ब्याज दरों से तय नहीं होती। कच्चे तेल के दाम और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव भी बाजार को प्रभावित करते हैं। तेल महंगा होने पर महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है, जिससे आगे ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंकों का रुख बदल सकता है।
इसी तरह किसी बड़े वैश्विक तनाव की स्थिति में निवेशक अक्सर सुरक्षित निवेश की तरफ रुख करते हैं। ऐसे समय में सोने की मांग बढ़ सकती है। इसलिए आने वाले दिनों में तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रम पर भी नजर रहेगी।
भारत में 7 अक्टूबर को रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति का फैसला आना है। RBI के ब्याज दरों से जुड़े संकेतों का असर रुपये और घरेलू कमोडिटी मार्केट पर पड़ सकता है। रुपये में बड़ी हलचल होने पर भारत में सोने-चांदी की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल बाजार में अमेरिका के आर्थिक आंकड़े, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और RBI के फैसले इन सभी संकेतों को एक साथ देखा जा रहा है। इन्हीं के आधार पर आने वाले दिनों में सोने और चांदी की अगली चाल तय हो सकती है।