Highlights:
30 से 57 प्रतिशत तक टूटे दाम
सोना 42 हजार रुपये सस्ता हुआ
चांदी 2.46 लाख रुपये हुई सस्ती
Gold And Silver Price Update: सुरक्षित निवेश माने जाने वाली दोनों कीमती धातुओं में पिछले 4 वर्षों में जिस रफ्तार से कीमतें बढ़ रही थीं और तेजी के नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे थे, अब उससे दोगुनी रफ्तार से कीमतें गिर रहीं हैं। सोना-चांदी में जैसे अप्रत्याशित जबरदस्त तेजी आई थी, वैसे ही अप्रत्याशित भारी मंदी आने लगी है। यह देखकर हर कोई हैरान है।
इस साल जनवरी में सोना वैश्विक बाजार में 5625 डॉलर प्रति औंस और मुंबई में 1.82 लाख रुपये प्रति दस ग्राम के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा था, लेकिन अब गिरते हुए 3884 डॉलर प्रति औंस यानी 1.40 लाख रुपये प्रति दस ग्राम पर ही आ गया है। अर्थात पीली कीमती धातु में 30 प्रतिशत यानी 42 हजार रुपये प्रति दस ग्राम की भारी गिरावट आ चुकी है और निवेशकों का इस साल का पूरा फायदा लगभग साफ हो गया है।
चांदी में तो और बुरा हाल है। इस साल जनवरी में चांदी की कीमत वैश्विक बाजार में 122 डॉलर प्रति औंस और मुंबई में 4.27 लाख रुपये प्रति दस ग्राम के सर्वोच्च स्तर पर पहुंची थी, लेकिन अब गिरते हुए 49 डॉलर प्रति औंस यानी 1.81 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर ही आ गयी है। अर्थात सफेद कीमती धातु में 57 प्रतिशत यानी 2.46 लाख रुपये प्रति किलोग्राम की भंयकर गिरावट आ चुकी है और चांदी इस साल फायदे की बजाय नुकसान में आ गयी है।
मुंबई में चांदी की कीमत 31 दिसंबर 2026 को 2.35 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर थी, लेकिन अब 1.81 लाख रुपये ही रह गयी है। अर्थात निवेशक 54 हजार रुपये प्रति किलोग्राम के घाटे में आ गए हैं।
कीमतों में इस अप्रत्याशित मंदी से सोना-चांदी में और तेजी के सारे अनुमान ध्वस्त हो गए हैं। जनवरी तक विश्व स्तर पर जो बड़े-बड़े फंड हाउस गोल्ड 8 हजार डॉलर या 10,000 डॉलर तक पहुंचने के अनुमान व्यक्त कर रहे थे, वे अब खामोश हो गए हैं और अब सोना 3,000 डॉलर और चांदी 30 डॉलर तक गिरने की आशंका जताई जाने लगी है।
हमेशा यही होता है जब तेजी का दौर चलता है, तब सभी को और तेजी दिखाई देती है और जब मंदी का दौर आता है तो सभी को और मंदी दिखाई देने लगती है। विश्व स्तर पर बुलियन मार्केट में पिछले 4 वर्षों से तेजड़ियों का कार्टेल हावी था, जो तेजी के नए-नए कारण बता रहा था, लेकिन इस साल मंदड़ियों का कार्टेल हावी हो गया है, जो अब और मंदी की आशंका जता रहा है।
कीमतें कहां तक गिरेंगी, यह तो निश्चित रूप से कोई नहीं बता सकता है, लेकिन जिस तरह मंदी का दबाव दिख रहा है, उससे जल्द तेजी की उम्मीद तो कतई नहीं दिख रही है। वैसे सोने में कम तथा चांदी में मंदी गहराने की आशंका अधिक है।
बुलियन मार्केट में हमेशा तेजी या मंदी वैश्विक बाजारों के रूख पर ही निर्भर करती है। तेजी भी विश्व स्तर पर आई थी और मंदी भी विश्व स्तर पर ही आ रही है। उसी के अनुरूप भारतीय बाजारों की चाल रहती है। सोना-चांदी कीमतों में तेजी या मंदी का दौर हमेशा लंबा ही चलता है। तेजी का दौर लगातार 4 साल चला। अब मंदी कब तक चलेगी, यह निश्चित तो नहीं कहा जा सकता है, लेकिन इस साल तो फिलहाल तेजी की उम्मीद नहीं दिख रही है।
विगत 4 वर्षों में जहां सोना 1800 डॉलर से बढ़ता हुआ 5625 डॉलर प्रति औंस की नई ऊंचाई पर पहुंचा था। यानी 212 प्रतिशत की रिकॉर्ड तेजी आई थी, वहीं चांदी 23 डॉलर से बढ़ती हुई 122 डॉलर प्रति औंस की नई ऊंचाई पर पहुंची थी। यानी पहली बार 430 प्रतिशत की रिकॉर्ड तोड़ तेजी आई। जबकि मुंबई में सोना 48 हजार से बढ़ता हुआ 1.82 लाख रुपये प्रति दस ग्राम की नई ऊंचाई पर पहुंचा था।
यानी 280 प्रतिशत (लगभग 4 गुना) की जबरदस्त रिकॉर्ड तेजी आई। इसी तरह चांदी 61 हजार से बढ़ते हुए 4.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम की नई ऊंचाई पर पहुंची थी। यानी पहली बार 600 प्रतिशत (7 गुना) की छप्पर फाड़ तेजी आई।