एफपीआई (सौजन्य : सोशल मीडिया) 
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FPI: भारत पाक तनाव भी नहीं हिला पाया निवेशकों का भरोसा, मई के महीने में एफपीआई में आए 14,167 करोड़ रुपये

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पैदा हुए तनाव के बाद भी निवेशकों ने इंडियन शेयर मार्केट में अपना भरोसा जताया है। यही कारण है कि मई के महीने में भी एफपीआई में बढ़त जारी है।

अपूर्वा नायक

नई दिल्ली : भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बाद भी भारतीय शेयर बाजार के एक बहुत अच्छी खुशखबरी आ रही है। बताया जा रहा है कि टेंशन की इस स्थिति में भी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने शेयर मार्केट पर विश्वास जताया है। साथ ही इस महीने अब तक एफपीआई के माध्यम से 14,167 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। अनुकूल ग्लोबल रुख और मजबूत डोमेस्टिक बेस के कारण एफपीआई शेयर मार्केट में निवेश कर रहे हैं।

सबसे खास बात ये है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के बाद भी एफपीआई इंडियन मार्केट में इंवेस्टमेंट कर रहे हैं। डिपॉजिटरी के आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल में एफपीआई ने इंडियन शेयर मार्केट में 4,223 करोड़ रुपये डाले थे। यह 3 महीनों के बाद उनका पहला निवेश था। इससे पहले, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने मार्च में शेयरों से 3,973 करोड़ रुपये, फरवरी में 34,574 करोड़ रुपये और जनवरी में 78,027 करोड़ रुपये निकाले थे।

जियोजीत इन्वेस्टमेंट के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि आगे बढ़ते हुए मैक्रो ग्लोबल फेक्टर जैसे डॉलर में गिरावट, अमेरिका और चीनी अर्थव्यवस्था में सुस्ती और घरेलू मोर्चे पर सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के हाई ग्रोथ रेट, घटते इंफ्लेशन और रेपो रेट में कमी की वजह से एफपीआई का भारतीय बाजार के प्रति आकर्षण बना रहेगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि बॉन्ड या ऋण प्रवाह बहुत कम रहने की उम्मीद है।

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस महीने की 9 तारीख तक शेयरों में शुद्ध रूप से 14,167 करोड़ रुपये का इंवेस्टमेंट किया है। इस तरह चालू वर्ष में अब एफपीआई की निकासी घटकर 98,184 करोड़ रुपये रह गई है।

इंडियन शेयर मार्केट में एफपीआई की एक्टिविटीज में अप्रैल में सुधार हुआ है। माना जा रहा है कि मई में भी यह रुख जारी रह सकता है। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट के एसोसिएट निदेशक-प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा है कि अनुकूल ग्लोबल फेक्टर और मजबूत घरेलू बुनियाद से निवेशकों का विश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड एग्रीमेंट, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी, भारतीय रुपये में मजबूती से वैश्विक निवेशकों के समक्ष भारतीय परिसंपत्तियों का आकर्षण बढ़ा है।

इसके अलावा भारत की कुछ बड़ी कंपनियों के अच्छे तिमाही नतीजों से भी एफपीआई की धारणा में सुधार हुआ है।जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार ने कहा, ‘‘हाल के दिनों में एफपीआई निवेश की खासियत यह रही है कि उन्होंने लगातार खरीदारी की है। उन्होंने आठ मई को समाप्त 16 कारोबारी सत्रों में 48,533 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। हालांकि, नौ मई को भारत-पाकिस्तान विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने 3,798 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने समीक्षाधीन अवधि सामान्य सीमा के तहत बॉन्ड से 3,725 करोड़ रुपये निकाले हैं, जबकि स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग से 1,160 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

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