EPFO EPS New Rules 2026: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ ने कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) से जुड़े नियमों को लेकर एक जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब सिर्फ वर्तमान सैलरी देखकर यह तय नहीं होगा कि कर्मचारी ईपीएस का सदस्य बनेगा या नहीं।
खासकर 25 हजार रुपये से ज्यादा वेतन पाने वाले कर्मचारियों के मामले में उनका पिछला पीएफ और ईपीएस रिकॉर्ड की जांच होगी।
सरकार ने ईपीएफ में शामिल होने के लिए बेसिक सैलरी की कानूनी सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति महीने की है। पुराने नियमों के तहत 15,000 रुपये से अधिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाले कर्मचारी ईपीएफ का हिस्सा होते हुए भी ईपीएस के दायरे से बाहर रह जाते थे। संगठन ने इस विसंगति को दूर कर दिया है।
अगर कोई शख्स पहली बार नौकरी शुरू कर रहा है और उसका बेसिक सैलरी 25,000 तक है, तो उसे ईपीएफ के साथ-साथ पेंशन योजना (ईपीएस) में भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। नियोक्ता को ईपीएफ और ईपीएस दोनों में निर्धारित योगदान करना होगा। नियोक्ता के कुल 12 प्रतिशत अंशदान में से 8.33 प्रतिशत हिस्सा ईफीएस फंड मं जमा किया जाता है।
नए सिस्टम में कर्मचारी का पुराना ईपीएफ व ईपीएस रिकॉर्ड बेहद आम हो गया है। नौकरी बदलने पर नए संस्थान को यह देखना होगा कि कर्मचारी पहले किस कैटेगरी में था। यूएन के जरिए यह आंकड़ा आसानी से वेरिफाई हो सकता है। इसी वजह से संगठन ने भर्ती के समय ही यूएन और पिछली सदस्यता की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
ईपीएफओ के इस बदलाव का सबसे ज्यादा लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा, जिनका वेतन पहले 15,000 रुपये से अधिक होने के कारण वे ईपीएस के दायरे से बाहर रह गए थे। अब यदि उनका वेतन 15,000 से 25,000 के बीच है, तो उनहें खुद ईपीएफ, ईपीएस और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा (EDLI) योजना के दायरे में लाया जाएगा।
इसके लिए कर्मचारियों को अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी नियोक्ता की होगी।
अगर कोई कर्मचारी पूर्व में ईपीएस का मेंबर रहा है और कंपनी में उसका बेसिक पे 25,000 से अधिक हो जाता है, तो केवल अधिक वेतन के आधार पर उसकी ईपीएस सदस्यता समाप्त नहीं होगी। वह जारी रहेगी।
नए नियोक्ता को कर्मचारी के यूएएन (UAN) और पिछले सर्विस रिकॉर्ड का वेरिफिकेशन करना अनिवार्य होगा।