नरेंद्र मोदी, डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग, (फाइल फोटो) 
बिज़नेस

उधर ट्रंप ने छेड़ा टैरिफ युद्ध, इधर ड्रैगन ने दिया साथ; चीन में टैक्स फ्री हुआ भारतीय फार्मा उत्पाद

Pharma Tariffs: ट्रंप के टैरिफ से अमेरिकी बाजार में लागत बढ़ने के बीच चीन का यह फैसला भारतीय कंपनियों को सस्ती दवाओं की मजबूत मांग वाले वैकल्पिक बाजार के तौर पर उभर सकता है।

मनोज आर्या

China Removes Tariffs On Indian pharma: चीन ने भारत के फॉर्मास्युटिकल प्रोडक्ट पर 30 प्रतिशत  फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी को हटाकर शून्य कर दिया है। चीन ने यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से फार्मा इंपोर्ट पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने के ठीक बाद उठाया है। इस फैसले के बाद भारत की दवा बनाने वाली कंपनियां बिना किसी सीमा शुल्क के चीन को दवाएं निर्यात कर सकेंगी।

ट्रंप के टैरिफ से अमेरिकी बाजार में लागत बढ़ने के बीच चीन का यह फैसला भारतीय कंपनियों को सस्ती दवाओं की मजबूत मांग वाले वैकल्पिक बाजार के तौर पर उभर सकता है। इससे आने वाले समय में भारतीय दवा निर्यात में अरबों डॉलर की बढ़ोतरी हो सकती है।

एक अक्टूबर से लागू होगा नया टैरिफ

गौरतलब है कि दो दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने फार्मा उत्पादों सहित कई चीजों पर आयात शुल्क बढ़ा दिया था। इनमें फार्मा उत्पादों पर 100 फीसदी का शुल्क प्रमुख था। यह बढ़ा हुआ शुल्क एक अक्टूबर से लागू होगा। जिसके बाद दवाइयों से लेकर भारी ट्रकों तक इंपोर्टेड सामान महंगे हो जाएंगे। ट्रंप ने जिन उत्पादों पर टैरिफ की घोषणा की थी उनमें, किचन कैबिनेट, बाथरूम वैनिटी, गद्देदार फर्नीचर और भारी ट्रक शामिल थे। उन्होंने कहा था कि दवाइयों पर 100 फीसदी, किचन कैबिनेट और बाथरूम वैनिटी पर 50 फीसदी, फर्नीचर पर 30 फीसदी और भारी ट्रकों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा।

ट्रंप के फैसले का भारत पर असर

ट्रंप के दवाओं पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले का असर भारत पर पड़ सकता है। खासकर देश के दवा मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री पर। बीते वित्त वर्ष में भारतीय उद्योगों की तरफ से दुनिया को करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये (27.9 अरब डॉलर) की दवाओं का निर्यात हुआ था। इसमें अमेरिका को ही करीब 77 हजार करोड़ रुपये (8.7 अरब डॉलर) की दवाएं निर्यात हुई थीं। भारत के दवा निर्माताओं के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार रहा है। 2025 के पहले छह महीनों में ही अमेरिका को कुल 32 हजार 505 करोड़ रुपये (3.7 अरब डॉलर) की दवाओं का निर्यात हो चुका है।

चीन के इस कदम से भारत को राहत

गौरतलब है कि भारत को दुनिया की फार्मेसी के रूप में जाना जाता है। भारत दुनिया भर को जेनेरिक दवाएं और टीके का निर्यात करता है। अब चीन की ओर से आयात शुल्क शून्य करते हुए अपना बाजार खोलने से भारतीय फार्मा कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्हें दुनिया की दूसरी सबसे अधिक आबादी वाले चीन के बड़े बाजार में समान अवसर और बेहतर पहुंच मिलेगी।

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