आजाद भारत के आर्थिक संकट, (कॉन्सेप्ट फोटो-AI) 
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कब-कब आर्थिक संकट की चपेट में आया भारत, इंदिरा और मनमोहन ने कैसे बदली तस्वीर? अब PM मोदी के अपील के क्या मायने

Economic Crisis In India: आजादी के बाद से लेकर अब तक भारतीय अर्थव्यवस्था ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। हालांकि, इनमें तीन ऐसे बड़े मौके आए हैं, जिन्हें गंभीर आर्थिक संकट के रूप में जाना जाता है।

मनोज आर्या

Economic Crisis in India After Independence: मीडिल ईस्ट में पिछले कुछ महीनों से जारी तनाव का असर अब धीरे-धीरे पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत में भी देखा जा रहा है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले 24 घंटे में दो बार इसके प्रभाव का जिक्र कर चुके हैं। पीएम ने लोगों से पेट्रोल-डीजल के खपत को कम करने, एक साल तक सोने की खरीदारी को रोकने और विदेशी यात्रा को टालने की अपील की है।

इसके बाद से ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है कि क्या देश में फिर कोई आर्थिक संकट आना वाला है। वहीं, कुछ ऐसे भी लोग हैं जिनके मन में यह सवाल है कि आजादी के बाद भारत कब-कब आर्थिक संकट की चपेट में आया है, और फिर कैसे यह दोबारा आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है? आइए सबकुछ विस्तार से जानते हैं।

आजाद भारत के 3 बड़े आर्थिक संकट

आजादी के बाद से लेकर अब तक भारतीय अर्थव्यवस्था ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। हालांकि, इनमें तीन ऐसे बड़े मौके आए हैं, जिन्हें गंभीर आर्थिक संकट के रूप में जाना जाता है। आजाद भारत में पहली बार 1966 में एक बड़े आर्थिक संकट की चपेट में आया था। इसके बाद 1991 में बैलेंसे ऑफ पेमेंट का संकट भी बहुत गहरा। इसके अलावा 2008 की वैश्विक आर्थिक संकट ने भारत को भी अपने चपेट में ले लिया था।

आजाद भारत के तीन बड़े आर्थिक संकट

पहला: 1966 का आर्थिक संकट

आजादी के एक दशक बीत जाने के बाद 1960 में भारत एक साथ कई अलग-अलग मोर्चों पर लड़ रहा था। 1962 में चीन और 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के कारण देश का सैन्य खर्च बहुत बढ़ गया था। इसके साथ ही 1965-66 में देश ने भीषण सूखे का सामना किया, जिससे फसलों के उत्पादन में काफी कमी आई। जिसकी वजह से भारत को विदेशों से अनाज (PL-480 योजना के तहत अमेरिका से) मंगाना पड़ा। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने विदेशी दबाव और अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए जून 1966 में भारतीय रुपये का 57% डिवैल्यूएशन किया था।

दूसरा: 1991 का 'बैलेंस ऑफ पेमेंट' संकट

आजादी के बाद साल 1991 में भारत ने दूसरा और सबसे बड़ा आर्थिक संकट का सामना किया। इसे सबसे चर्चित और गंभीर आर्थिक संकट माना जाता है। भारत के पास केवल इतना विदेशी मुद्रा भंडार बचा था कि उससे महज दो हफ्तों का आयात किया जा सके। इस आर्थिक संकट का मुख्य कारण- खाड़ी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं और सोवियत संघ के पतन से भारत का निर्यात प्रभावित हुआ। इस समय देश का राजकोषीय घाटा भी अपने उच्चस्तर पर बना हुआ था।

इस आर्थिक संकट का नतीजा यह रहा कि भारत को दिवालिया होने से बचने के लिए अपना 67 टन सोना (47 टन बैंक ऑफ इंग्लैंड और 20 टन यूनियन बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड के पास) रखना पड़ा। इस आर्थिक संकट के बाद भारत ने  LPG (उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण) सुधार लागू किए गए, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा बदल दी।

तीसरा: 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी

साल 2008 में आई वैश्विक आर्थिक मंदी का केंद्र अमेरिका था, लेकिन वैश्विक जुड़ाव के कारण भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। अमेरिका में आई इस आर्थिक संकट की मुख्य वजह 'सबप्राइम मॉर्गेज' संकट के कारण दुनिया भर के शेयर बाजार और बैंकिंग व्यवस्था चरमरा गई थी। भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका असर यह हुआ कि देश की जीडीपी विकास दर, जो 9% के आसपास चल रही थी, गिरकर 6.7% पर आ गई। निर्यात में भारी कमी आई और विदेशी निवेशकों ने पैसा निकालना शुरू कर दिया। हालांकि, इस संकट से निकलने के लिए भारत सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक साथ मिलकर बाजार में नकदी बढ़ाई और कई राहत पैकेज दिए ताकि घरेलू मांग बनी रहे।

2020 में भी चरमरा गई थी इकोनॉमी

साल 2020 में कोविड महामारी की वजह से दुनिया की इकोनॉमी पूरी तरह से चरमरा गई थी। इस संकट का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिला। जहां महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन से 2020-21 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी में -23.9% की ऐतिहासिक गिरावट देखी गई थी।

PM मोदी के अपील के क्या मायने?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यह अपील ऐसे समय आई है, जब हाल में उनकी पार्टी बीजेपी ने बंगाल और असम में बड़ी जीत दर्ज की है।अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत का एनर्जी इंपोर्ट रूस से लगातार कुम हुआ है। भारत अपनी मांग को पूरी करने के लिए अन्य देशों से तेल आयात कर रहा है। मार्च में अमेरिका की ओर से आंशिक रूप से प्रतिबंधों में ढील देने के बाद भारत ने रूस से तेल खरीदना शुरू किया था और घरेलू रिफाइनरियों को स्थानीय खपत के लिए रसोई गैस उत्पादन को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया।

पीएम मोदी के अपील के क्या मायने?

बड़े आर्थिक संकट की ओर इशारा

आर्थिक जगत के जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी जिन क्षेत्रों में कटौती करने की अपील कर रहे हैं, उसका स्पष्ट संदेश है कि विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स पर बने दबाव को कम करना है। यह भी कहा जा रहा है कि मोदी की अपील भारतीय अर्थव्यवस्था के बड़े संकट की ओर इशारा कर रही है।

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