नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी, (डिजाइन फोटो/ नवभारत लाइव) 
बिहार

कभी नीतीश को हराने की खाई थी कसम, अब उन्हीं की वजह से मुख्यमंत्री बनेंगे सम्राट चौधरी; जानें वो दिलचस्प कहानी

Samrat Chaudhary: कहानी शुरू होती है अगस्त 2022 में, जब नीतीश कुमार ने भाजपा का साथ छोड़कर राजद के साथ 'महागठबंधन' की सरकार बनाई थी। उस समय सम्राट चौधरी ने एक कड़ा संकल्प लिया था।

मनोज आर्या

Samrat Chaudhary And Nitish Kumar: बिहार की राजनीति में आज एक ऐसा अध्याय लिखा जा रहा है जिसे 'सियासी पटकथा' का सबसे दिलचस्प मोड़ कहा जा सकता है। एक समय था जब भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सत्ता से बेदखल करने के लिए अपने सिर पर 'मुरेठा' (पगड़ी) बांधा था और कसम खाई थी कि जब तक नीतीश को कुर्सी से नहीं हटा देंगे, तब तक यह पगड़ी नहीं खोलेंगे। लेकिन आज नियति देखिए, सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री की उसी कुर्सी पर बैठने जा रहे हैं, जिसे कभी खाली करने की उन्होंने शपथ ली थी।

कहानी शुरू होती है अगस्त 2022 में, जब नीतीश कुमार ने भाजपा का साथ छोड़कर राजद के साथ 'महागठबंधन' की सरकार बनाई थी। उस समय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में सम्राट चौधरी ने एक कड़ा संकल्प लिया।

नीतीश को कुर्सी से हटाने की कसम

सम्राट चौधरी ने अपने सिर पर मौर्यकालीन शैली की पगड़ी बांधी और सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि जब तक मैं नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी से नहीं हटा देता, तब तक यह मुरेठा मेरे सिर पर रहेगा। यह कसम बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बन गई थी। सम्राट चौधरी अपनी हर जनसभा और प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसी पगड़ी के साथ नजर आते थे, जो नीतीश कुमार के प्रति उनके विरोध का प्रतीक बन चुकी थी।

अयोध्या में जब सम्राट ने उतरा 'मुरेठा'

राजनीति संभावनाओं का खेल है। जनवरी 2024 में नीतीश कुमार एक बार फिर पलटी मारकर एनडीए (NDA) में लौट आए। इस बदलाव ने सम्राट चौधरी की कसम के सामने एक तकनीकी संकट खड़ा कर दिया। चूंकि नीतीश कुमार ने 'महागठबंधन' के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर एनडीए के समर्थन से दोबारा शपथ ली थी, इसलिए भाजपा ने इसे नीतीश की 'हार' और 'वापसी' करार दिया। 3 जुलाई 2024 को सम्राट चौधरी ने अयोध्या जाकर सरयू नदी में डुबकी लगाई और अपना सिर मुंडवाकर उस पगड़ी को प्रभु श्रीराम के चरणों में समर्पित कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि "चूंकि नीतीश कुमार ने महागठबंधन छोड़ दिया है और एनडीए की शरण में आ गए हैं, इसलिए मेरा संकल्प पूरा हुआ।

विरोधी से उत्तराधिकारी तक का सफर

आज यानी 14 अप्रैल 2026 को जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने के लिए मुख्यमंत्री पद से अपना अंतिम इस्तीफा दिया, तो उन्होंने खुद सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर उन्हें अपना 'उत्तराधिकारी' संकेत दिया। यह राजनीति की सबसे बड़ी विडंबना है कि जिस नेता ने नीतीश को सत्ता से बाहर करने के लिए दिन-रात एक कर दिया था, आज वही नेता नीतीश की छोड़ी हुई विरासत को संभालने जा रहा है।

15 अप्रैल को सरकार का शपथ ग्रहण

सम्राट चौधरी का चयन भाजपा की उस लंबी रणनीति का हिस्सा है जिसमें वे नीतीश के 'लव-कुश' वोट बैंक (कुर्मी-कुशवाहा) को पूरी तरह अपने पाले में लाना चाहते हैं। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार के नई सरकार का 15 अप्रैल को शपथ ग्रहण समारोह होना है। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी समेत एनडीए के कई दिग्गज नेता शामिल हो सकते हैं।

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