Highlights:
जन सुराज ने लोकसभा चुनाव से पहले शिक्षकों के लिए 7वें वेतन आयोग का लाभ देने का वादा किया।
शिक्षकों के अधिकारों और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर वोट करने का आग्रह किया।
CJP प्रदर्शन पर प्रशांत किशोर बोले दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन जारी रहेंगे।
Prashant Kishor Promise 7th Pay Commission Bihar: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने रविवार को हाजीपुर में 'शिक्षक संवाद' कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि इस बार बिहार के लोग राजनीतिक पदानुक्रम में 'ऊपर' या 'नीचे' देखकर नहीं, बल्कि अपने बच्चों के भविष्य, रोजगार और शिक्षकों की समस्याओं को ध्यान में रखकर वोट देंगे। उन्होंने बताया कि जन सुराज ने लोकसभा चुनाव से पहले शिक्षकों के लिए 7वें वेतन आयोग का लाभ सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि वैशाली जिले के शिक्षक इस बात पर चर्चा करने के लिए इकट्ठा हुए थे कि 7वें वेतन आयोग के वेतनमान को कैसे लागू किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बार का वोट सरकार बनाने या गिराने के लिए नहीं, बल्कि मौजूदा सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए होगा।
उन्होंने कहा, "इस बार का वोट यह सुनिश्चित करने के लिए है कि यहां के शिक्षकों को 7वें वेतन आयोग का लाभ मिले, 'अनएडेड' शिक्षकों की दशकों पुरानी समस्या का समाधान हो और शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिले।"
जन सुराज के ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार इंजीनियर मोहन की जीत का जक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर मोहन जीतते हैं, तो तिरहुत क्षेत्र में कम से कम 10,000 शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए उनकी योग्यता के अनुसार निजी क्षेत्र में नौकरी दिलाना प्रशांत किशोर और जन सुराज की जिम्मेदारी होगी।
उन्होंने तर्क दिया कि तिरहुत क्षेत्र के ग्रेजुएट लोगों को भी 7वें वेतन जैसी ही सुविधाएं मिलनी चाहिए जैसी बांकीपुर के लोगों को मिल रही हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपने अधिकारों और अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर वोट करने का आग्रह किया।
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को 'कॉकरोच' कहने की कथितं टिप्पणी को लेकर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर निशाना साधते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि लोग मांझी के शब्दों के चयन या बयानों को गंभीरता से नहीं लेते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, पेपर लीक, बेरोजगारी और चुनावी प्रक्रिया को लेकर समाज में जो असंतोष है, वही सड़कों पर दिखाई दे रहा है। सरकार आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को दबाकर या कुचलकर इस असंतोष को खत्म नहीं कर सकती।
प्रशांत किशोर ने कहा कि सेना, पैरामिलिट्री फोर्स औरं पुलिस की तैनाती से लोगों को कुछ दिनों तक घरों से बाहर निकलने से रोका जा सकता है, लेकिन इससे आंदोलन खत्म नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में पुलिस और पैरामिलिट्री जवानों की तैनाती आंदोलन की मजबूती और सरकार की चिंता, दोनों को दिखाती है। उन्होंने आगे कहा कि जब तक सरकार बच्चों की शिक्षा, बेरोजगारी और चुनावी सुधार जैसे बुनियादी मुद्दों को हल करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाती और बच्चों को भरोसा नहीं दिलाती कि ऐसा दोबारा नहीं होगा, तब तक विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन जारी रहेंगे।