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नेपाल में तबाही तो बिहार में कौतूहल! गंडक नदी से निकल रहीं 100-100 किलो की महाकाय मछलियां, देखें वीडियो

Massive Fishes Found In Bihar: नेपाल की बाढ़ से गंडक नदी में बहकर आईं 100-100 किलो की विशालकाय मछलियां। गोपालगंज और बगहा में मछलियां पकड़ने के लिए जुटी ग्रामीणों की भीड़, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल।

अनन्या तिवारी

Giant Fish In Gandak River: नेपाल में आई भयानक तबाही और बाढ़ का असर अब बिहार की नदियों में एक बेहद अनोखे रूप में दिखाई दे रहा है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) अपने साथ सिर्फ तबाही का मलबा ही नहीं, बल्कि विशालकाय मछलियों का एक बड़ा जखीरा भी बहाकर बिहार की गंडक नदी में ले आई है। गंडक नदी में 40-50 किलो से लेकर 100 किलो (एक क्विंटल) और उससे भी अधिक वजन वाली महाकाय मछलियां मिलने की खबरों और वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है।

आपदा बनी मछुआरों के लिए बड़ा सरप्राइज और अनोखा मौका

नेपाल में आई बाढ़ और भूस्खलन जहां एक तरफ भारी तबाही लेकर आया है, वहीं बिहार राज्य के स्थानीय मछुआरों के लिए यह आपदा अचानक एक बड़े सुनहरे मौके में बदल गई है। गंडक नदी और उसके तटीय इलाकों में अचानक इतनी बड़ी संख्या में विशालकाय मछलियां बहकर आने लगी हैं कि स्थानीय लोग हैरान हैं। बिहार के गोपालगंज के मंगलपुर घाट, वाल्मीकिनगर, बगहा और उसके आसपास के क्षेत्रों में लोग घंटों नदी में जाल डालकर इन महाकाय मछलियों को पकड़ने में जुटे हुए हैं। तेज बहाव के कारण इनमें से कई मछलियां नदी किनारे मृत अवस्था में भी पाई गई हैं।

नेपाल से बिहार की गंडक नदी तक कैसे पहुंचीं ये मछलियां?

यह सवाल हर किसी के मन में उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी मछलियां बिहार तक कैसे पहुंचीं? दरअसल, 26 अगस्त 2026 को नेपाल के रसुवा जिले में भीषण फ्लैश फ्लड और भूस्खलन आया था। इस तबाही के बाद पानी का तेज बहाव भोटेकोशी नदी से होते हुए त्रिशूली नदी में पहुंचा। इसके बाद पानी आगे नारायणी नदी प्रणाली से होते हुए भारत की सीमा तक आ गया। वाल्मीकिनगर के पास इसी नारायणी नदी को भारत में 'गंडक नदी' के रूप में जाना जाता है। नदी के इसी प्रचंड बहाव के साथ नेपाल के पहाड़ी जल निकायों और जलाशयों की ये बड़ी मछलियां भी बहकर बिहार की सीमा में प्रवेश कर गईं।

बघार जैसी भारी-भरकम प्रजातियां आ रही हैं हाथ

बाढ़ के पानी के साथ बहकर आ रही इन मछलियों में कई दुर्लभ और भारी-भरकम प्रजातियां शामिल हैं। स्थानीय मछुआरों के जाल में गोजटा या गूनच कैटफिश , बघार, ग्रास कार्प, बराली यानी वाल्लागो और रोहू जैसी मछलियां फंस रही हैं। इन पकड़ी गई मछलियों का वजन 5 किलो से शुरू होकर कई दर्जन किलोग्राम तक है। कुछ जगहों पर तो मछुआरों के हाथ 90 किलो से लेकर एक क्विंटल (100 किलो) और डेढ़ क्विंटल तक की भारी-भरकम मछलियां लगने के दावे किए जा रहे हैं।

कौतूहल का विषय बनीं विशालकाय मछलियां

इन महाकाय मछलियों के पकड़े जाने के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मछुआरे नदी के उफनते पानी से भारी-भरकम मछलियों को बाहर खींच रहे हैं, उन्हें तौल रहे हैं और मोटरसाइकिल या हाथ ठेले पर लादकर ले जा रहे हैं। गोपालगंज के मंगलपुर पुल और अन्य घाटों पर इन विशालकाय जीवों को देखने के लिए ग्रामीणों और आम जनता की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिसे देखकर हर कोई अचंभित है।

खाने को लेकर सावधानी की सलाह

जैसे ही इन बड़ी मछलियों के वीडियो सोशल मीडिया पर फैले, इंटरनेट यूजर्स के बीच बहस छिड़ गई है। कई यूजर्स इन विशाल मछलियों को 'गूनच कैटफिश' बता रहे हैं और नदी के मलबे व गंदे पानी में बहकर आने के कारण इन्हें खाने को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। वहीं, कुछ जागरूक लोग प्रशासन और मत्स्य विभाग से इन विशाल मछलियों की प्रजातियों की वैज्ञानिक जांच कराने की भी मांग कर रहे हैं ताकि इनकी असलियत का पता चल सके।

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