Chirag Paswan vs Jitan Ram Manjhi On Reservation: आरक्षण के मुद्दे पर बिहार में सियासी बयानबाजी तेजी हो गई है। विपक्ष तो विपक्ष एनडीए सरकार में शामिल दो दलों के नेता भी आमने-सामने आ गए हैं। आरक्षण के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी का इस्तीफा मांग लिया है। उनका कहना है कि क्रीमी लेयर की सवाल है तो जीतन राम मांझी को इस्तीफा देना चाहिए। क्रीमी लेयर का कॉन्सेप्ट ले आएं। उनके बेटे संतोष सुमन को भी मंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए।
चिराग के इन बयानों पर अब जीतन राम मांझी ने पलटवार किया है। मीडिया से बातचीत के दौरान जीतन राम मांझी ने कहा कि वो (चिराग पासवान) गरीब लोगों को देखना नहीं चाहेत हैं। इसलिए उनको इस्तीफा देना चाहिए।
दरअसल, पत्रकारों ने जब जीतन राम मांझी से सवाल पूछा कि चिराग पासवान आपकी इस्तीफा की मांग कर रहे हैं। इस पर भड़के मांझी ने कहा कि उनको इस्तीफा देना चाहिए। उनको समझ नहीं आ रहा है कि संतोष क्या कह रहे हैं, इसलिए वो इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। हम कह रहे हैं कि संतोष सुमन ने यह कोई नई बात नहीं कही है। हिंदुस्तानी अवाम मोर्च (हम) का एक सिद्धांत है जिसके तहत उसने कहा है। उसको लेकर चल रहा है। जो भी होगा हम सभ लोग लड़ेंगे।
पत्रकारों से बातचीत में जीतन राम मांझी ने कई प्रश्न पूछे। उन्होंने कहा कि बिहार में कुल 22 जातियां हैं, इनमें से चार जातियों को छोड़ दिया जाए, तो सभी हाशिए पर हैं। मेरे कहने का अर्थ है कि जब तक वर्गीकृत नहीं किया जाएगा तब तक नीचे वाले लोग जो 80 वर्ष गुजार चुके हैं… अब कितने वर्ष गुजारेंगे? मैं आरक्षण तोड़ने की बात नहीं कह रहा हूं… आरक्षण हटाने की बात हम लोग नहीं करते हैं।
जीतन राम मांझी ने आगे यह भी कहा कि संतोष सुमन जो हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, उन्होंने कहा कि आरक्षण रहेगा, लेकिन आरक्षण में भी हमको अलग से आरक्षण दीजिए। कोट दीजिए। जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी। बस यह तो हमारा कॉन्सेप्ट है। हमारी आबादी ज्यादा है तो कम जनसंख्या वालों को ज्यादा लाभ क्यों दिया जाता रहा है? जीतन राम मांझी ने कहा कि 2024 में सुप्रीक कोर्ट ने सर्वसम्मति से एक सुझाव दिया कि राज्य चाहे तो शेड्यूल कास्ट कोटा में भी सब-कोटा का विभाजन कर सकता है।
इसके संबंध में भारत के कई राज्यों में कोटा में भी सब-कोटा की बात की गई है। इससे फायदा ये हुआ है कि शेड्यूल कास्ट में कोटा का लाभ जो कुछ वर्ग के लोग कई सालों से लेते आ रहे थे, 90 प्रतिशत पोस्ट पर वही लोग हैं और जो लोग आर्थिक व शैक्षणिक दृष्टिकोण से नीचे तबके पर हैं वे केवल 10 प्रतिशत में सीमित हैं।
उदाहरण है पंजाब। पंजाब में जब बंटवारा नहीं था तो क्लास 1 में 7-8 जातियां थीं, जो 95 प्रतिशत उसका लाभ ले रही थीं लेकिन जब बंटवारा हुआ तो वो जातियां थीं वे 45 प्रतिशत पर सिमट गईं। जिसे लाभ नहीं मिल रहा था, उसे भी लाभ मिलना शुरू हो गया।
बिहार में भी दलित और महादलित वर्ग बना। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप आरक्षण में बंटवारा होना चाहिए, जिससे नीचे तबके के वे लोग जो आरक्षण का लाभ नहीं ले पाए, उन्हें लाभ मिल सके।