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बिहार

मोदी से हुआ मोहभंग...प्रशांत किशोर से गठबंधन करेंगे चिराग? नए समीकरणों से बिहार में सियासी भूचाल

Bihar Assembly Elections: चिराग पासवान एनडीए में सीटों के बंटवारे को लेकर सहज नहीं दिखाई दे रहे हैं। इस बीच, ऐसी चर्चाएं हैं कि चिराग पासवान और प्रशांत किशोर के बीच गठबंधन हो सकता है।

अभिषेक सिंह

Bihar Politics: बिहार में चुनावी महाभारत का औपचारिक बिगुल बजते ही राजनैतिक उथल-पुथल तेज हो गई है। लेटेस्ट जानकारी निकलकर यह आ रही है कि बिहार चुनाव में एक नया गठबंधन देखने को मिल सकता है। ऐसी अटकलें अचानक शुरू हो गई हैं क्योंकि चिराग पासवान एनडीए में सीटों के बंटवारे को लेकर सहज नहीं हैं। इस बीच, ऐसी चर्चाएं हैं कि चिराग पासवान और प्रशांत किशोर के बीच गठबंधन हो सकता है।

एक मीडिया रिपोर्ट में चिराग की लोक जनशक्ति पार्टी के सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है। प्रशांत किशोर पहली बार चुनावी राजनीति में कदम रख रहे हैं और एक स्थिर और मज़बूत वोट बैंक वाली पार्टी के साथ गठबंधन की तलाश में हैं। इस बीच, "बिहार और युवा पहले" के नारे के समर्थक चिराग को भी भाजपा में उम्मीद दिख रही है।

BJP नहीं भर रही चिराग की मांग

खबरों के अनुसार, चिराग पासवान ने भाजपा से 40 सीटें मांगी हैं, जबकि भाजपा उन्हें केवल 20 के आस-पास सीटें देने को तैयार है। पिछले साल हुए लोकसभा चुनावों का हवाला देते हुए चिराग पासवान ने यह मांग की। उन्होंने कहा, "हमने लोकसभा चुनाव में केवल पांच सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और सभी पर जीत हासिल की थी।

आम चुनाव के स्ट्राइक रेट का हवाला

चिराग का कहना है कि हमारे स्ट्राइक रेट को देखते हुए और सीटें दी जानी चाहिए। हालांकि, जानकारों का मानना ​​है कि अगर चिराग पासवान को कम सीटों पर समझौता भी करना पड़े, तो भी उनके भाजपा से अलग होने की संभावना कम है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जिस स्ट्राइक रेट का वे गर्व से दावा करते हैं, वह भाजपा के साथ रहते हुए ही हासिल हुआ था।

चिराग को दी जानी चाहिए तरजीह

भाजपा का वोट ट्रांसफर उनके पक्ष में अच्छा रहा और उनकी संख्या भी अच्छी है। इसके इतर कुछ सियासी पंडितों का कहना यह भी है कि भाजपा और जदयू लोकसभा चुनाव मैं खुद शत प्रतिशत सीटों पर जीत नहीं दर्ज कर सके हैं। ऐसे में चिराग की मांग जायज भी है और उन्हें तरजीह दी जानी चाहिए।

वहीं, प्रशांत किशोर पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि वे कितने मतदाताओं को वोट देंगे और प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में उनकी कितनी पकड़ है। चिराग पासवान खुद को बिहार के भावी मुख्यमंत्री के रूप में देखते हैं। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वे क्या रास्ता अपनाते हैं।

चिराग की प्रेशर पॉलिटिक्स तो नहीं?

फिलहाल, टिकट बंटवारे को लेकर एनडीए दलों और भाजपा के बीच दिल्ली में बैठकें चल रही हैं। वहीं, जानकारों का कहना है कि पीके के साथ गठबंधन की अफवाहें लोजपा द्वारा भाजपा पर टिकट बंटवारे के लिए दबाव बनाने के लिए फैलाई गई होंगी। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि यह महज प्रेशर पॉलिटिक्स है या फिर चिराग का वाकई पीएम मोदी, नीतीश कुमार और एनडीए से मोहभंग हो चुका है।

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