रुपौली में निर्दलीय शंकर सिंह ने जेडीयू-आरजेडी को दी मात (सोर्स- सोशल मीडिया) 
बिहार

अपनी ही सीट पर पराई हुईं बीमा भारती, रुपौली में निर्दलीय शंकर सिंह ने जेडीयू-आरजेडी को चटाई धूल

बिहार की रुपौली विधानसभा सीट पर हुए उप चुनाव के नतीजों ने एनडीए और 'इंडिया' के साथ ही साथ सियासी पंडितों को भी जोर का झटका दिया है। रुपौली सीट पर बीमा भारती और कलाधर प्रसाद मंडल के जीत के अनुमानों के बीच निर्दलीय उम्मीदवार शंकर सिंह ने जीत दर्ज कर ली है।

अभिषेक सिंह

पटना: सात राज्यों की 13 सीटों पर हुए विधानसभा उपचुनाव के परिणाम सामने आ चुके हैं। परिणामों के बाद सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की रुपौल सीट की हो रही है। रुपौल सीट पर आरजेडी से बीमा भारती और जदयू के कलाधर प्रसाद मंडल के बीच माना जा रहा था लेकिन जब नतीजे आए तो दोनों ही नेता धूल फांकते गए और बाजी तीसरे ने मार ली।

बिहार की रुपौली विधानसभा सीट पर हुए उप चुनाव के नतीजों ने एनडीए और 'इंडिया' के साथ ही साथ सियासी पंडितों को भी जोर का झटका दिया है। रुपौली सीट पर बीमा भारती और कलाधर प्रसाद मंडल के जीत के अनुमानों के बीच निर्दलीय उम्मीदवार शंकर सिंह ने जीत दर्ज कर ली है। शंकर सिंह को 67782 वोट मिले जबकि दूसरे नंबर पर रहे कलाधर प्रसाद मंडल को 59578 वोट ही हासिल हुए। सबसे बुरी हालत यहां बीमा भारती की रही और वह 30114 वोट ही हासिल कर सकीं।

अपनी ही सीट पर पराई हुईं बीमा भारती

रुपौली सीट पिछले विधानसभा चुनाव में जेडीयू के टिकट पर बीमा भारती ने जीती थी। लेकिन नीतीश कुमार की दूसरी गुलाटी के बाद बीमा भारती ने विधायकी से इस्तीफा देकर आरजेडी का दामन थाम लिया था। लोकसाभा चुनाव 2024 में आरजेडी ने बीमा भारती को पुर्णिया सीट से टिकट दिया लेकिन यहां भी निर्दलीय पप्पू यादव ने उन्हें मात दे दी थी।

प्रचार जोरदार फिर भी मिली हार

अब विधानसभा उपचुनाव में अपनी ही सीट पर बीमा भारती को न केवल हार का सामना करना पड़ा है बल्कि उन्हें तीसरी पोजीशन मिली है। जबकि 'इंडिया' गठबंधन ने एकजुट होकर उनके पक्ष में प्रचार किया था। वहीं दूसरी तरफ कलाधर प्रसाद मंडल के लिए भी एनडीए ने पूरा जोर लगाया था। दोनों डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी व विजय सिन्हा के साथ केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, चिराग पासवान सहित एनडीए के तमाम बड़े नेताओं ने जेडीयू कलाधर प्रसाद मंडल के लिए कैंपेनिंग की थी।

क्यों निर्दलीय मैदान में आए शंकर सिंह

वहीं दूसरी तरफ शंकर सिंह इस बार लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से टिकट की उम्मीद में थे लेकिन जब टिकट नहीं मिला तो उन्होंने निर्दलीय ताल ठोंक दी। शंकर सिंह इससे पहले 2010, 2015 और 2020 में भी रुपौली से चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन तब उन्हें जीत नहीं मिली थी। हालांकि इस बार रुपौली की जनता ने उनकी आस पूरी कर दी है।

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