Samastipur Mohiuddin Nagar Jal Bavandar: बिहार के समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीन नगर ब्लॉक से एक बेहद दुर्लभ और आश्चर्यजनक मौसमी नजारा सामने आया है, जहां गंगा नदी की सतह पर 'जल बवंडर' (Waterspout) बनता हुआ दिखाई दिया। सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में पानी की सतह से लेकर बादलों तक घूमता हुआ एक विशाल स्तंभ साफ नजर आ रहा है। बिहार मौसम विभाग द्वारा साझा किए गए इस दृश्य ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
पहली नजर में यह किसी हॉलीवुड फिल्म के सीन जैसा या नदी से आसमान में पानी खिंचने जैसा लगता है, लेकिन मौसम विज्ञान में इसे हवा और संघनित नमी से बनने वाला संकरा स्तंभ कहा जाता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे विंड शियर (Wind Shear) और वातावरण में गर्म-नम हवा के तेज घूर्णन का नतीजा माना जाता है। हालांकि यह आमतौर पर फेयर-वेदर वॉटरस्पाउट होता है, लेकिन नावों और तटीय इलाकों के लिए यह जोखिम भरा साबित हो सकता है।
जल बवंडर बनने के लिए सबसे जरूरी है हवा का अलग-अलग तरीके से चलना। पानी की सतह के पास हवा की रफ्तार और दिशा कुछ और हो सकती है, जबकि ऊपर हवा अलग दिशा और अलग गति से चल रही होती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) हवा के अनुसार इस अंतर को विंड शियर (Wind Shear) कहा जाता है।
इसके साथ पानी से लगातार नमी हवा में जाती रहती है। जब गर्म और नमी वाली हवा ऊपर उठती है तो ऊपर जाकर ठंडी होने लगती है। ठंडी होने के बाद हवा में मौजूद पानी की भाप छोटी-छोटी बूंदों में बदलने लगती है और बादल बनने लगते हैं।
कभी-कभी पानी की सतह के पास हवा में हल्का घूमाव पहले से मौजूद होता है। जब ऊपर उठती गर्म हवा इस घूमती हुई हवा को अपने साथ ऊपर खींचती है तो उसका घूमना तेज और ज्यादा व्यवस्थित हो सकता है। धीरे-धीरे यही घूमती हुई हवा एक लंबे और पतले स्तंभ का रूप ले लेती है, जिसे हम जल बवंडर (Waterspout) कहते हैं।
जल बवंडर को देखकर ऐसा लगता है जैसे समुद्र या झील का पानी किसी पाइप की तरह सीधे आसमान की ओर जा रहा हो। लेकिन ऐसा नहीं होता। बवंडर के बीच जो सफेद या धुंधला हिस्सा दिखाई देता है, वह ज्यादातर हवा में मौजूद नमी और पानी की बेहद छोटी बूंदों से बनता है।
तेज घूमती हवा पानी की सतह से छींटे और बारीक फुहार भी ऊपर उड़ा सकती है। इसी वजह से हमें वहां पानी का एक घूमता हुआ स्तंभ दिखाई देता है। आसान भाषा में समझें तो जल बवंडर असल में घूमती हुई हवा होती है। पानी और नमी उसे हमारी आंखों को दिखाई देने वाला रूप देते हैं।
जल बवंडर का नाम आते ही ज्यादातर लोगों के मन में समुद्र की तस्वीर आती है। लेकिन इसे देखने के लिए समुद्र होना जरूरी नहीं है। बड़ी झीलों और नदियों के ऊपर भी जल बवंडर बन सकता है। इसलिए बिहार में नदी के ऊपर ऐसा नजारा दिखाई देना मौसम की कुछ खास परिस्थितियों में संभव है।
पानी की सतह से मिलने वाली नमी और ऊपर उठती गर्म हवा के साथ हवा की दिशा और रफ्तार में अंतर जैसी स्थितियां मिल जाएं तो वहां घूमती हुई हवा का स्तंभ बन सकता है। यही आगे चलकर जल बवंडर जैसा दिखाई देता है।
हर जल बवंडर एक जैसा नहीं होता। कुछ जल बवंडर कमजोर होते हैं और थोड़े समय में खत्म हो जाते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इनके पास जाना सुरक्षित है।
तेज हवा वाला जल बवंडर पानी में मौजूद नाव को असंतुलित कर सकता है और सतह पर तेज छींटे व लहरें पैदा कर सकता है। अगर ऐसा बवंडर जमीन की तरफ बढ़ जाए तो वहां भी नुकसान होने का खतरा रहता है।
बिहार में लगातार बारिश के बीच कुछ दिनो पहले बाढ़ का असर भी बढ़ गया था। जिससे सुपौल में कोसी नदी का पानी बढ़ जाने से करीब 50 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया था।
तो वहीं कई इलाकों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। बिहार में बाढ़ के बिगड़ते हालातो को देखते हुए सीएम सम्राट चौधरी ने बाढ़ प्रभावित इलाको में जाकर जायजा लिया और प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था बढाने के निर्देश दिए थे।