Prashant Kishor Raushan Yadav Death: बिहार के मधुबनी में 19 वर्षीय रौशन यादव की जेल में हुई मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शनिवार को जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पीड़ित परिवार के साथ मधुबनी एसएसपी कार्यालय पहुंचे और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। मुलाकात के बाद उन्होंने बताया कि एसएसपी ने 10 दिनों के भीतर जांच पूरी कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का आश्वासन दिया है।
परिवार का आरोप है कि रौशन को 27 मई को रहीका थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन इसकी सूचना परिजनों को नहीं दी गई। परिवार के मुताबिक, थाने में मुलाकात के दौरान रौशन ने मारपीट और करंट लगाने जैसी प्रताड़ना की शिकायत की थी। 31 मई को कथित तौर पर रिहाई के बाद उसे आर्म्स एक्ट के मामले में दोबारा गिरफ्तार किया गया और जेल भेज दिया गया, जहां करीब दो महीने बाद उसकी मौत हो गई।
मुलाकात के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि एसएसपी ने 10 दिनों के भीतर जांच पूरी कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि रौशन यादव को परिवार के मुताबिक 27 मई को रहीका थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। परिवार का आरोप है कि गिरफ्तारी की सूचना उन्हें नहीं दी गई और करीब तीन दिन बाद उन्हें पता चला कि रौशन रहीका थाने में है।
परिवार के मुताबिक, थाने में मुलाकात के दौरान रौशन ने अपने साथ मारपीट और करंट लगाने समेत प्रताड़ित किए जाने की बात बताई थी। उन्होंने कहा कि परिवार के मुताबिक 31 मई को रौशन को पुलिस ने छोड़ दिया।
लेकिन करीब आधे घंटे बाद उसे आर्म्स एक्ट के मामले में फिर गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस का पक्ष है कि गोली चलने की घटना के मामले में उसे आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद रौशन को जेल भेजा गया, जहां करीब दो महीने बाद उसकी मौत हो गई।
प्रशांत किशोर ने कहा कि रौशन की जेल में हुई मौत की जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के दिशा-निर्देशों के तहत की जा रही है। जिलाधिकारी के स्तर से भी जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट दो-तीन दिनों में आने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि पुलिस और जेल प्रशासन की ओर से मौत को आत्महत्या बताया जा रहा है, जबकि परिवार का आरोप है कि मारपीट और प्रताड़ना के कारण रौशन की जान गई। उन्होंने कहा कि इस मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू 27 मई की गिरफ्तारी से जुड़ा है।
एसएसपी ने आश्वासन दिया कि यह जांच की जाएगी कि रौशन को क्यों गिरफ्तार किया गया, परिवार को लिखित सूचना क्यों नहीं दी गई और क्या उसे बिना अदालत में पेश किए थाने में रखा गया था।
उसके साथ मारपीट और प्रताड़ना के आरोपों की भी जांच होगी। प्रशांत किशोर ने कहा, "एसएसपी ने 10 दिन के अंदर जांच कर दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अगर 10 दिनों में न्याय नहीं मिला तो मैं फिर मधुबनी एसएसपी कार्यालय आऊंगा।"
उन्होंने पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि परिवार बेहद गरीब है और रौशन की मौत ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि मामले में राजनीति से ज्यादा मानवता के आधार पर न्याय होना चाहिए।
प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि 10 दिन में कार्रवाई नहीं होती है तो मामले को लेकर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और मुख्य सचिव से भी मुलाकात की जाएगी। उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से परिवार को जल्द न्याय दिलाने की अपील की।