वो 6 बड़ी वजहों ने बिहार में ला दी 'NDA सुनामी' 
बिहार

नीतीश को क्यों नहीं हरा सका महागठबंधन? वो 6 बड़ी वजहों ने बिहार में ला दी 'NDA सुनामी'

Bihar Election Result की मतगणना अब नतीजों में बदल रही है। राज्य में एनडीए की सुनामी चल रही है, जिसमें विपक्षी महागठबंधन बह गया है। चुनाव आयोग के मुताबिक अब तक 243 सीटों में से 202 पर NDA आगे है।

सौरभ शर्मा

Bihar Election Final Result: बिहार विधानसभा चुनाव की मतगणना अब नतीजों में बदल रही है। राज्य में एनडीए की सुनामी चल रही है, जिसमें विपक्षी महागठबंधन बह गया है। चुनाव आयोग के मुताबिक, 243 सीटों में से 200 पर एनडीए आगे है। इसे देखते हुए तय है कि नीतीश कुमार फिर से बिहार की गद्दी पर बैठेंगे। पिछले दो दशक से बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार किसी पहेली से कम नहीं हैं।

जाति आधारित राजनीति के गढ़ बिहार में नीतीश ऐसी जाति से आते हैं, जिसकी आबादी दो फीसदी से भी कम है। इसके बावजूद उनका इतने लंबे समय तक सर्वमान्य नेता बने रहना उनके करिश्माई नेतृत्व का नतीजा है। इस बार जेडीयू ने 78 सीटों पर बढ़त बनाकर शानदार प्रदर्शन किया है, जबकि 2020 में उसका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं था। बिहार में डबल इंजन सरकार में भले ही बीजेपी का इंजन शक्तिशाली हो, लेकिन नीतीश के नेतृत्व वाली जेडीयू के इंजन की वजह से ही ट्रेन गंतव्य तक पहुंच रही है।

समाजवादी नेताओं में अकेले नीतीश

राजनीतिक विश्लेषक डॉक्टर पवन चौरसिया के मुताबिक, यह साबित हो गया है कि नीतीश के बिना बिहार की राजनीति की कल्पना नहीं की जा सकती। नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड होगा। 1970 के दशक के समाजवादी आंदोलन के नेताओं में केवल नीतीश ही हैं जो आज भी अपनी प्रासंगिकता और लोकप्रियता बनाए हुए हैं, जबकि बाकी नेता परिवारवादी राजनीति के कारण हाशिए पर जा चुके हैं।

नीतीश की जीत के 6 बड़े कारण

आइए नजर डालते हैं उन 6 बड़ी वजहों पर जो इस विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के पक्ष में गई हैं-

1. साफ-सुथरी छवि: दशकों के सार्वजनिक जीवन के बाद भी उन पर व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा है।

2. परिवारवाद से दूरी: उन्होंने अपने परिवार से किसी को राजनीति में आगे नहीं बढ़ाया, जो उन्हें राजद के परिवारवाद पर हमला करने का नैतिक आधार देता है।

3. सुशासन बाबू की छवि: दो दशक में बिहार में सड़कें, बिजली और सरकारी योजनाओं का काम धरातल पर दिखा है, जिससे लोगों में बेहतर भविष्य की उम्मीद है।

4. महिलाओं में लोकप्रियता: साइकिल योजना, सुरक्षित माहौल और शराबबंदी जैसे फैसलों से उन्हें सभी जाति-धर्म की महिलाओं का वोट मिला। शराबबंदी से घरेलू हिंसा में कमी आई।

5. समावेशी राजनीति: वे विभिन्न जातियों और समुदायों के नेताओं को बढ़ावा देने और समायोजित करने की राजनीतिक चतुराई में माहिर हैं।

6. व्यावहारिक राजनीति: नीतीश यथार्थवाद को ही विचारधारा मानते हैं। उन्होंने बीजेपी के हिंदुत्व का समर्थन किया तो लेटरल एंट्री का विरोध भी किया, जिससे वह सभी समूहों का वोट हासिल कर पाते हैं।

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