Bihar Assembly Election 2025: बिहार के चुनावी मैदान में एनडीए और इंडिया ब्लॉक के नेता सीट शेयरिंग के मुद्दे पर मंथन करना शुरू कर चुके हैं। इस बीच शनिवार को मुजफ्फरपुर में आयोजित एक जनसभा में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने एक बड़ा ऐलान किया है।
एक जनसभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा है कि वह बिहार की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। उनके इस बयान से गठबंधन की एकता पर सवाल उठने लगे हैं। अब इस बयान पर बिहार का सियासी पारा चढ़ गया है।
शनिवार को मुजफ्फरपुर के कांटी में आयोजित एक जनसभा में तेजस्वी यादव ने कहा कि तेजस्वी बिहार की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगा। उन्होंने जनता से अपील की कि हर सीट पर तेजस्वी के चेहरे को देखकर वोट करें। इस बयान को गठबंधन सहयोगियों पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
तेजस्वी यादव ने सभा के दौरान नीतीश सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के पास कोई विजन नहीं है और ये सिर्फ नकल करती है। साथ ही उन्होंने खुद को बिहार का भविष्य बताया और कहा कि राज्य को आगे ले जाने की जिम्मेदारी तेजस्वी यादव उठाएगा।
तेजस्वी यादव का यह बयान ऐसे समय आया है जब महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर पहले से ही मतभेद हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा और लोक जनशक्ति पार्टी (पशुपति पारस गुट) के शामिल होने से मामला और जटिल हो गया है। सभी दल अपने-अपने हिस्से की सीटों को लेकर अड़े हैं, जिससे फॉर्मूला तय करना मुश्किल हो गया है।
पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो आरजेडी ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 75 सीटें जीती थीं। वहीं कांग्रेस को 70 सीटें मिली थीं, जिसमें से उसने 19 पर जीत दर्ज की थी। अब गठबंधन में नई पार्टियों के जुड़ने से पुराने फॉर्मूले को लागू करना आसान नहीं लग रहा। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू पहले ही कह चुके हैं कि सभी दलों को अपने हिस्से की कुछ सीटें छोड़नी होंगी।
तेजस्वी यादव के इस ऐलान पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि तेजस्वी यादव को ख्वाब देखना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि तेजस्वी के पास अकेले 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की ताकत नहीं है। यह बयान कांग्रेस और बाकी सहयोगियों पर दबाव बनाने की चाल हो सकती है। साथ ही उन्होंने याद दिलाया कि बिहार की जनता आज भी चारा घोटाले और लैंड फॉर जॉब स्कैम को नहीं भूली है।
तेजस्वी यादव के इस बयान से यह सवाल उठने लगा है कि क्या आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन में दरार आ सकती है। जहां एक ओर सीटों पर समझौता मुश्किल हो रहा है, वहीं दूसरी ओर इस तरह के बयान सहयोगी दलों के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहे हैं। आने वाले हफ्तों में महागठबंधन के रुख से तस्वीर साफ होगी।