EV, CNG और hydrogen गाड़ियों की उम्र। Source. gemini
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ईवी-सीएनजी गाड़ियों को मिलेगी 5 साल की एक्स्ट्रा उम्र? सरकार के नए प्रस्ताव से बदल सकता है वाहन नियमों का खेल

EV Vehicle Rules: केंद्र सरकार वाहन मालिकों के लिए नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहे है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है।

सिमरन सिंह

EV Lifespan To Be Extended By 5 Years: केंद्र सरकार वाहन मालिकों के लिए नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहे है। बता दें कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में संशोधन का ड्राफ्ट जारी किया है। इस प्रस्ताव के मुताबिक इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और प्राकृतिक गैस से चलने वाले वाहनों की मौजूदा निर्धारित उम्र सीमा को 5 साल तक बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ राष्ट्रीय परमिट, अस्थायी रजिस्ट्रेशन और वाहन दस्तावेजों की प्रक्रिया को भी ज्यादा डिजिटल बनाने की तैयारी है।

ईवी और सीएनजी वाहनों की उम्र बढ़ाने का प्रस्ताव

प्रस्तावित बदलाव में बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन, हाइड्रोजन फ्यूल वाहन और प्राकृतिक गैस से चलने वाले वाहनों के लिए निर्धारित उम्र सीमा में 5 साल की बढ़ोतरी की बात कही गई है। लेकिन ड्राफ्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि संशोधन के बाद अलग-अलग श्रेणी के वाहनों की अधिकतम अनुमत उम्र कितनी होगी। वहीं मंत्रालय ने 10 अगस्त को ड्राफ्ट जारी कर आम लोगों और संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर आपत्ति और सुझाव मांगे हैं। जिसका सीधा मतलब है कि अभी यह नियम लागू नहीं हुआ है। इसको अंतिम मंजूरी और अधिसूचना के बाद ही असर में देखा जाएगा।

राष्ट्रीय परमिट भी होगा डिजिटल

इसके साथ ही सरकार राष्ट्रीय परमिट की प्रक्रिया को भी आसान करने की तैयारी में है। प्रस्ताव के तहत इलेक्ट्रॉनिक तरीके से राष्ट्रीय परमिट एक बार में अधिकतम 5 साल तक के लिए जारी किया जा सकेगा। जिसमें आवेदक अपनी जरूरत के हिसाब से अवधि चुन सकेगा और हर साल 16,500 रुपए की फीस जमा करनी होगी। इतना ही नहीं फॉर्म 46 में आवेदन और फॉर्म 47 में परमिट की अनुमति इलेक्ट्रॉनिक तरीके से देने का प्रस्ताव है। इससे परमिट से जुड़े कागजी काम को कम करने में मदद मिल सकती है।

अस्थायी रजिस्ट्रेशन में भी बदलाव

ड्राफ्ट में बिना बॉडी वाले चेसिस के अस्थायी रजिस्ट्रेशन को जारी होने की तारीख से 6 महीने तक वैध रखने का प्रस्ताव है। वर्कशॉप में देरी या वाहन मालिक के नियंत्रण से बाहर किसी कारण से काम पूरा नहीं होने पर अधिकारी 30-30 दिन की अवधि बढ़ा सकेगा। वहीं पूरी तरह बने वाहन को एडाप्टेड वाहन में बदलने या दूसरे राज्य में रजिस्ट्रेशन कराने की स्थिति में अस्थायी पंजीकरण 45 दिनों तक वैध रखने का प्रस्ताव है।

वाहन रिकॉर्ड में दर्ज होगी ज्यादा डिजिटल जानकारी

सरकार वाहन दस्तावेजों को भी ज्यादा डिजिटल और व्यवस्थित बनाना चाहती है। प्रस्तावित फॉर्म में डीलर का GST नंबर, PAN, उद्योग आधार और Corporate Identification Number जैसी जानकारी शामिल की जा सकती है। वाहन मालिक के फॉर्म 20 में आधार से जुड़े मोबाइल नंबर का उल्लेख करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा बीमा, PUC, फिटनेस सर्टिफिकेट, लंबित चालान और पुराने राष्ट्रीय परमिट की जानकारी भी रिकॉर्ड में जोड़ी जा सकती है। पात्र ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं को ट्रेड सर्टिफिकेट के दायरे में लाने का प्रस्ताव भी है।

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