e rickshaw (Source. Dreamtime) 
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दिल्ली में ई-रिक्शा पर लगेगा सख्त नियमों का ब्रेक, आपकी सुरक्षा और ड्राइवर की कमाई दोनों पर सरकार की नई नजर

E-Rickshaw New Rules: ई-रिक्शा व्यवस्था को लेकर एक नई और सख्त नीति लाने की तैयारी में है। राजधानी में तेज़ी से बढ़ते ई-रिक्शा नेटवर्क के कारण सुरक्षा, ट्रैफिक और अव्यवस्था की शिकायतें आ रही थी।

सिमरन सिंह

Delhi E-Rickshaw Policy: दिल्ली सरकार अब ई-रिक्शा व्यवस्था को लेकर एक नई और सख्त नीति लाने की तैयारी में है। राजधानी में तेज़ी से बढ़ते ई-रिक्शा नेटवर्क के कारण सुरक्षा, ट्रैफिक और अव्यवस्था की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। परिवहन मंत्री पंकज सिंह के अनुसार, इस पॉलिसी का मकसद यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, सड़क यातायात को व्यवस्थित करना और साथ ही ई-रिक्शा चालकों की रोज़ी-रोटी को सुरक्षित रखना है।

यात्री सुरक्षा होगी सबसे ऊपर

नई ई-रिक्शा नीति का सबसे बड़ा फोकस यात्री सुरक्षा पर होगा। अक्सर शिकायतें मिलती हैं कि कई ई-रिक्शा बिना लाइसेंस चल रहे हैं या नाबालिग बच्चे इन्हें चला रहे हैं। सरकार अब ड्राइवरों के लिए वैध लाइसेंस, अनिवार्य वर्दी और वाहन रजिस्ट्रेशन जैसे नियमों को सख्ती से लागू करने की तैयारी में है। इसके साथ ही जो ई-रिक्शा अभी तक अवैध रूप से चल रहे हैं, उन्हें भी रजिस्ट्रेशन का मौका दिया जाएगा।

हादसों और ट्रैफिक जाम पर लगेगी लगाम

दिल्ली की सड़कों पर ई-रिक्शा की संख्या अब ऑटो-रिक्शा से भी दोगुनी हो चुकी है। इससे ट्रैफिक जाम, गलत पार्किंग और हादसों का खतरा बढ़ गया है। आरडब्ल्यूए (RWA) और स्थानीय लोगों ने कम उम्र के ड्राइवरों, अवैध चार्जिंग पॉइंट्स और आग लगने की घटनाओं पर चिंता जताई है। नई नीति में चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी स्पष्ट नियम बनाए जाएंगे, ताकि सड़क पर अव्यवस्था कम हो।

किन इलाकों में सबसे ज्यादा ई-रिक्शा?

आंकड़ों के मुताबिक, रोहिणी में सबसे ज्यादा करीब 46,150 ई-रिक्शा चल रहे हैं। इसके बाद वजीराबाद और लोनी रोड का स्थान आता है। उत्तर और पूर्वी दिल्ली में छोटी दूरी की यात्राओं के लिए लोग ई-रिक्शा पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं। वहीं दक्षिण दिल्ली के वसंत विहार जैसे इलाकों में इनकी संख्या अपेक्षाकृत कम है।

जनता की राय से बनेगा नियम

सरकार ने साफ किया है कि नीति का ड्राफ्ट तैयार होने के बाद उसे जनता के सामने रखा जाएगा। इसमें मार्केट एसोसिएशन, RWA, पुलिस और ई-रिक्शा संगठनों से सुझाव लिए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी ड्राइवर बेरोज़गार न हो और आम जनता को सुरक्षित व सुविधाजनक सफर मिले।

दिल्ली की लाइफलाइन बने रहेंगे ई-रिक्शा

ई-रिक्शा आज छात्रों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए "लास्ट-माइल कनेक्टिविटी" का सबसे सस्ता और आसान साधन हैं। जहां सरकारी बसें नहीं पहुंच पातीं, वहां ई-रिक्शा जीवनरेखा की तरह काम करते हैं। नई नीति इन्हें और सुरक्षित, व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

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