Ethanol Fuel India: भारत में पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटाने की दिशा में एथेनॉल को लेकर सरकार और ऑटो कंपनियों की तैयारी तेज हो गई है। लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि 100% एथेनॉल यानी E100 को पहली बार अब कानूनी मंजूरी मिली है। वहीं केंद्र सरकार पहले ही E85 और E100 जैसे हाई-एथेनॉल फ्यूल के लिए वाहन मानकों का प्रावधान कर चुकी है। अब 2026 में Flex-Fuel गाड़ियों और E85 फ्यूल की उपलब्धता बढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
बता दें कि साधारण पेट्रोल कारों में एथेनॉल की एक तय मात्रा मिलाई जाती है। वहीं Flex-Fuel Vehicle यानी FFV को अलग-अलग अनुपात में पेट्रोल और एथेनॉल के मिश्रण पर चलने के लिए तैयार किया जाता है। ऐसी गाड़ी E20 से लेकर E100 तक के फ्यूल को सपोर्ट कर सकती है हालांकि वाहन की वास्तविक homologation और इस्तेमाल की सीमा निर्माता और लागू नियमों पर निर्भर करती है। साथ ही सरकार ने जून 2026 में E85 फ्यूल की शुरुआत भी की है। E85 में करीब 80-85% एथेनॉल और बाकी पेट्रोल होता है और इसे खास तौर पर Flex-Fuel गाड़ियों के लिए बनाया गया है।
इस बदलाव में Maruti Suzuki पहले ही कदम आगे बढ़ा चुकी है। कंपनी ने जून 2026 में भारत की पहली Flex-Fuel पैसेंजर कार के तौर पर WagonR पेश की। कंपनी के मुताबिक यह कार E20 से E100 तक के एथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चलने में सक्षम है। हालांकि मौजूदा नियमों के तहत इसकी homologation E85 के लिए है।
इससे पहले भी Maruti ने WagonR का Flex-Fuel प्रोटोटाइप पेश किया था। Toyota भी भारत में एथेनॉल आधारित तकनीक पर काम कर चुकी है जबकि आने वाले समय में दूसरी कंपनियों के भी ऐसे मॉडल देखने को मिल सकते हैं।
Flex-Fuel तकनीक का सबसे बड़ा फायदा ईंधन के विकल्प बढ़ने से हो सकता है। सरकार के अनुसार E85 की कीमत पारंपरिक E20 पेट्रोल से करीब ₹20 प्रति लीटर कम रखी गई है। साथ ही घरेलू स्तर पर तैयार एथेनॉल कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करने में मदद कर सकता है। सरकार ने E85 की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 2026 के अंत तक करीब 500 और 2027 के अंत तक लगभग 5,000 रिटेल आउटलेट तक पहुंच बनाने का लक्ष्य बताया है। ऐसे में आने वाले वर्षों में कार खरीदते समय सिर्फ पेट्रोल, डीजल, CNG या EV ही नहीं बल्कि Flex-Fuel भी एक विकल्प बन सकता है।