Black tinted film on car glasses. (सौ. Freepik) 
ऑटोमोबाइल

क्या कार के शीशों पर ब्लैक टिंटेड फिल्म लगाना है सही? जानिए ट्रैफिक नियम और कानूनी प्रावधान

कार मालिक ब्लैक टिंटेड फिल्म लगवाना पसंद करते हैं, जिससे कार का इंटीरियर ठंडा बना रहे और निजता भी बनी रहे। लेकिन क्या ब्लैक टिंट फिल्म लगवाना ट्रैफिक नियमों के तहत सही है या गैरकानूनी?

सिमरन सिंह

नवभारत ऑटोमोबाइल डेस्क: गर्मियों का मौसम दस्तक दे चुका है, और इस दौरान कार चालक तेज धूप से बचने के लिए कई तरह के उपाय अपनाते हैं। कुछ लोग टेम्पररी कार शेड का इस्तेमाल करते हैं, तो कुछ पर्दे लगाकर धूप से बचाव करते हैं। वहीं, कई कार मालिक ब्लैक टिंटेड फिल्म लगवाना पसंद करते हैं, जिससे कार का इंटीरियर ठंडा बना रहे और निजता भी बनी रहे। लेकिन क्या ब्लैक टिंट फिल्म लगवाना ट्रैफिक नियमों के तहत सही है या गैरकानूनी? आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी।

क्या कहता है भारत का कानून?

सुप्रीम कोर्ट का फैसला (2012):

भारत में सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में कार के शीशों पर ब्लैक फिल्म लगाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था।

नियम का उद्देश्य:

इस फैसले का मुख्य उद्देश्य वाहनों की पारदर्शिता बढ़ाकर अपराधों पर लगाम लगाना था। कई बार गहरे रंग की फिल्म का उपयोग अवैध गतिविधियों को छुपाने के लिए किया जाता है, जिससे पुलिस और प्रशासन को जांच में दिक्कत होती है।

केंद्रीय मोटर वाहन नियम:

  • विंडस्क्रीन और रियर विंडो के लिए कम से कम 70% पारदर्शिता (विजिबिलिटी) अनिवार्य है।
  • साइड विंडोज के लिए यह सीमा 50% पारदर्शिता निर्धारित की गई है।
  • इससे अधिक गहरी टिंटेड फिल्म नियमों का उल्लंघन मानी जाती है।

ब्लैक टिंटेड फिल्म लगाने के फायदे और नुकसान

फायदे:

  • गर्मी से बचाव: गहरे रंग की फिल्म धूप को रोकने में मदद करती है, जिससे कार के अंदर का तापमान नियंत्रित रहता है।
  • सूरज की हानिकारक किरणों से सुरक्षा: UV किरणें कार के इंटीरियर को नुकसान पहुंचा सकती हैं, टिंटेड फिल्म से यह प्रभाव कम हो सकता है।
  • निजता: यह कार के अंदर बैठे लोगों की प्राइवेसी बनाए रखती है और बाहरी लोगों की नजरों से बचाती है।

नुकसान:

  • रात में विजिबिलिटी की समस्या: गहरी फिल्म रात के समय या बारिश के दौरान विजिबिलिटी कम कर सकती है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
  • कानूनी कार्रवाई: यदि आपकी कार के शीशों पर तय मानकों से अधिक गहरी फिल्म लगी हुई है, तो ट्रैफिक पुलिस द्वारा चालान किया जा सकता है और फिल्म को हटाने का निर्देश दिया जा सकता है।

क्या ब्लैक टिंटेड फिल्म लगाना सही है?

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, भारत में काली फिल्म लगाना गैरकानूनी है।
  • हालांकि, कुछ कार कंपनियां फैक्ट्री-फिटेड टिंटेड ग्लास प्रदान करती हैं, जो कानूनी मानकों के अनुसार होते हैं।
  • यदि आप फिल्म लगाना चाहते हैं, तो अपने राज्य के ट्रैफिक नियमों और स्थानीय परिवहन विभाग से जानकारी लेना जरूरी है।

कैसे प्राप्त करें नियमों की अधिक जानकारी?

अगर आपको कार शीशों पर फिल्म लगाने से जुड़े कानूनों की विस्तृत जानकारी चाहिए, तो आप:

  • स्थानीय परिवहन विभाग (RTO) से संपर्क कर सकते हैं।
  • ऑनलाइन सरकारी वेबसाइट्स पर जाकर नियम देख सकते हैं।
  • ट्रैफिक पुलिस हेल्पलाइन से संपर्क करके जानकारी ले सकते हैं।

ये काम भी है शामिल

हालांकि ब्लैक टिंटेड फिल्म कार के इंटीरियर को ठंडा रखने और प्राइवेसी बढ़ाने में मददगार हो सकती है, लेकिन भारतीय कानून इसे पूरी तरह प्रतिबंधित करता है। यदि आप नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो आपको चालान और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए किसी भी तरह की टिंटेड फिल्म लगाने से पहले सही जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

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