Finland Traffic Fines System: भारत जैसे देशों में अक्सर लोग अपने रसूख और दौलत के दम पर ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते हैं। लेकिन फ़िनलैंड ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। यहाँ ट्रैफिक नियम तोड़ने पर जुर्माना व्यक्ति की आय के हिसाब से तय होता है। यानी जितनी ज़्यादा आय, उतना ज़्यादा जुर्माना!
फ़िनिश में इसे 'पैवासक्को' कहा जाता है, जिसका अर्थ है "Day-Fine" या "दैनिक दंड"। इस व्यवस्था के तहत, कर कटौती के बाद किसी व्यक्ति की मासिक आय का 1/60वाँ भाग उसकी दैनिक आय माना जाता है। फिर, अपराध की गंभीरता के आधार पर, जितने अधिक दिनों के लिए जुर्माना लगाया जाता है, दंड उतना ही भारी होता है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी की दैनिक आय 100 यूरो है और उसे 20 दिन का जुर्माना मिला है, तो उसे कुल 2,000 यूरो भरने होंगे।
Finland 1920 में इस प्रणाली को अपनाने वाला पहला देश था। इसके बाद स्वीडन, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड जैसे देशों ने इसे अपनाया। सरकार का मानना है कि इस प्रणाली का समाज के हर वर्ग पर समान प्रभाव पड़ता है, जिससे लोग यातायात नियमों का उल्लंघन करने से पहले दो बार सोचते हैं। "इस प्रणाली ने देश के राजस्व में वृद्धि की है और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आई है।" वर्तमान में, फ़िनलैंड में प्रति 1,00,000 लोगों पर केवल 3.8 सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं, जबकि वैश्विक औसत 17.4 है।
अगर कोई व्यक्ति अपनी आय छिपाने की कोशिश करता है, तो फ़िनलैंड की सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत उसके डिजिटल टैक्स और संपत्ति की जानकारी मिल जाती है। इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है और कोई भी नियमों से बच नहीं सकता।
76 वर्षीय रियल एस्टेट व्यवसायी एंडर्स विक्लोफ़ पर ओवरस्पीडिंग के लिए 1,21,000 यूरो (करीब ₹1.1 करोड़) का जुर्माना लगाया गया। वह निर्धारित सीमा से 30 किमी/घंटा ज़्यादा तेज़ गाड़ी चला रहे थे। इससे पहले 2018 में उन्हें 63,680 यूरो का जुर्माना भरना पड़ा था। इस व्यवस्था को लेकर फ़िनलैंड सरकार "हमारे लिए, जुर्माने का प्रभाव एक जैसा होना चाहिए, चाहे व्यक्ति कोई भी हो"
Finland की आय-आधारित ट्रैफ़िक जुर्माना प्रणाली पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है। यह दर्शाता है कि कानून के सामने सभी समान हैं और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।