Battery Recycling Scheme: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है इसी बीच केंद्र सरकार ने एक खास कदम भी उठा लिया है। बता दें कि सरकार ने 1,500 करोड़ रुपये की क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग इंसेंटिव स्कीम लॉन्च करने की घोषणा की है। इस योजना के बारे में बताए तो इसका साफ मकसद पुरानी लिथियम-आयन बैटरियों से कीमती खनिज निकालकर उनका दोबारा उपयोग करना है ताकि बैटरी निर्माण में विदेशों पर निर्भरता कम हो सके। वहीं बता दें कि इस योजना की जानकारी कोयला एवं खान मंत्रालय ने बैटरी समिट 2026 के दौरान दी गई थी। जिसको लेकर विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम भारत को EV बैटरी सप्लाई चेन में काफी आगे ले जा सकता है।
जो जानकारी अभी तक सामने आई है उसके अनुसार लिथियम-आयन बैटरियों में लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिज मौजूद होते हैं। इन खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी बनाने के लिए बेहद जरूरी होता हैं। वैसे तो देखा जा रहा है कि भारत इनका बड़ा हिस्सा आयात करता है जिससे विदेशी बाजारों पर निर्भरता बनी रहती है। लेकिन अब सरकार चाहती है कि इस्तेमाल के बाद बेकार हो चुकी बैटरियों को वैज्ञानिक तरीके से रीसाइकिल किया जाए और उनमें मौजूद खनिजों को दोबारा उत्पादन में इस्तेमाल किया जाए। जिससे कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ेगी और आयात खर्च को भी घटेगा जा सकेगा।
भारत के इलेक्ट्रिक वाहनों बाजार को देखे तो वो तेजी से बढ़ रहा है। कई उद्योग के अनुमान के अनुसार देश में लिथियम-आयन बैटरियों की मांग 2022 में लगभग 20 GWh थी जो 2030 तक 220 GWh तक पहुंच सकती है। जिसका सीधा मतलब है कि आने वाले सालों में बैटरियों की जरूरत कई गुना बढ़ सकती है। ऐसे में बढ़ती मांग के कारण बैटरी आयात भी तेजी से बढ़ा सकता है। वहीं वित्त वर्ष 2018-19 को देखे तो इसमें करीब 1.2 अरब डॉलर की लिथियम-आयन बैटरियां आयात की गई थीं जबकि 2025-26 में यह आंकड़ा 4.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने इसको लेकर कहा कि भारत को एक मजबूत और आत्मनिर्भर बैटरी इकोसिस्टम विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि साइक्लिंग क्षमता बढ़ाने से महत्वपूर्ण कच्चे माल की स्थायी आपूर्ति सुनिश्चित होगी और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिम कम होंगे। वहीं सरकार केवल रीसाइक्लिंग तक सीमित नहीं है। इसके तहत चार क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पार्क और नौ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की भी योजना बनाई जा रही है।
इस पूरे मामले को देखकर विशेषज्ञ बताते है कि अगर भारत बैटरियों से निकलने वाले खनिजों का दोबारा इस्तेमाल करने में सफल होता है तो यह न सिर्फ आयात बिल कम करेगा लेकिन उसके साथ ही देश को वैश्विक EV सप्लाई चेन में मजबूत खिलाड़ी के तौर पर भी पेश करेगा।