Electric Car Consumer Rights: भारत देश में इलेक्ट्रिक कारों की मांग लगातार बढ़ रही है लेकिन नई तकनीक के साथ कुछ मामलों में गाड़ी की खराबी को लेकर ग्राहक और डीलर के बीच विवाद भी सामने देखने को मिल रहा हैं। बता दें कि अब तेलंगाना के एक ऐसे ही मामले में उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया है। जिसमें मामला Tata Harrier EV से जुड़ा है जिसमें बार-बार स्मार्ट-की और सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम की परेशानी सामने आ रही थी। वहीं आयोग ने डीलर को 10 फीसदी डेप्रिसिएशन काटकर करीब ₹24 लाख वापस करने का आदेश दिया है।
रिपोर्ट मे बताया जा रहा है कि ग्राहक ने अगस्त 2025 में 26 लाख रुपये से ज्यादा कीमत की Harrier EV खरीदी थी। जिसके बाद कार की डिलीवरी के कुछ ही हफ्तों बाद स्मार्ट-की ने सामान्य दूरी से काम करना बंद कर दिया। इसके अलावा सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम भी कभी कार को लॉक नहीं करता था और कई बार लॉक होने के बाद उसे खोलने में दिक्कत होती थी। यह समस्या इतनी बढ़ गई कि ग्राहक को कई मौकों पर सड़क पर कार के साथ फंसना पड़ा। उसे कार टो करवानी पड़ी और मदद लेनी पड़ी। ऐसे में बार-बार सर्विस सेंटर जाने के बावजूद खराबी कुछ समय बाद फिर सामने आ जाती थी।
इस मामले में ग्राहक ने डीलर के साथ हुई बातचीत के चैट रिकॉर्ड, ईमेल और कॉल लॉग आयोग के सामने पेश किए। वहीं दिसंबर 2025 के सर्विस जॉब कार्ड में भी स्मार्ट-की और लॉकिंग सिस्टम से जुड़ी शिकायत दर्ज थी। ऐसे में आयोग ने माना कि एक ही समस्या का बार-बार सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज होना दिखाता है कि खराबी स्थायी रूप से ठीक नहीं हुई थी। वहीं मामले में एक ऐसी घटना भी जोड़ी गई जिसमें कार सड़क के बीच में चलाने पर भी बंद हो रही थी।
इस केस में डीलर ने तर्क दिया कि वह केवल कार की बिक्री और सर्विस के लिए जिम्मेदार है। अगर कोई मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट है तो उसकी जिम्मेदारी निर्माता की होनी चाहिए। साथ ही विशेषज्ञ रिपोर्ट न होने की बात भी कही गई। लेकिन आयोग ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने अफनी तरफ से बताया कि सर्विस सेंटर के जॉब कार्ड और लगातार की गई शिकायतें यह साबित करने के लिए पर्याप्त थीं कि समस्या बार-बार बनी हुई थी।
वहीं अब आयोग ने कार की कीमत से 10% डेप्रिसिएशन काटकर बाकी रकम करीब ₹24 लाख ग्राहक को लौटाने का आदेश दिया है। इसके अलावा मानसिक परेशानी और आर्थिक नुकसान के लिए ₹50,000 तथा मामले की लागत के रूप में ₹15,000 देने को बोला है जिसकी कुल कीमत ₹65,000 अतिरिक्त सामने आ रही है।
वहीं मामले को लेकर सुनवाई होने के बाद डीलर को 45 दिन में आदेश का पालन करना होगा। वहीं किसी भी कारण से देरी होने पर 9% सालाना ब्याज देना पड़ेगा। साथ ही बदले में ग्राहक को Harrier EV वापस करनी होगी और रजिस्ट्रेशन रद्द कराने की प्रक्रिया में सहयोग करना होगा। लेकिन CGST, SGST और अन्य सरकारी शुल्क का रिफंड नहीं मिलेगा।