Delhi Blast के बाद कार खरीदने पर खतरा। (सौ. X) 
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दिल्ली ब्लास्ट के बाद पुरानी कारों की खरीद-बिक्री में बढ़ी सतर्कता, जानिए किन बातों का रखें ध्यान

Old Car Buying Tips: कार ब्लास्ट ने न केवल सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क किया है, बल्कि आम नागरिकों के बीच भी पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सिमरन सिंह

Delhi Blast: दिल्ली में हाल ही में हुए कार ब्लास्ट ने न केवल सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क किया है, बल्कि आम नागरिकों के बीच भी पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि "किसी भी वाहन की खरीद या बिक्री केवल आर्थिक लेन-देन नहीं, बल्कि एक कानूनी और सुरक्षा जिम्मेदारी भी है।" इस घटना के बाद पुरानी कारों की डीलिंग में दस्तावेज़ीकरण, फिटनेस चेक और ओनरशिप ट्रांसफर की प्रक्रिया को लेकर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है।

संपूर्ण दस्तावेज़ीकरण करें अनिवार्य

  • पुरानी कार खरीदने से पहले कार के सभी दस्तावेज़ों की गहन जांच जरूरी है।
  • सबसे पहले रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि विक्रेता ही उसका वास्तविक मालिक है।
  • RC पर दर्ज चेसिस नंबर और इंजन नंबर को वाहन पर अंकित नंबरों से मिलाएं।
  • PUC सर्टिफिकेट, बीमा पॉलिसी और यदि वाहन लोन पर खरीदा गया था तो NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) की वैधता की पुष्टि करें।
  • किसी भी दस्तावेज़ में संदेह या गड़बड़ी मिलने पर लेन-देन से बचें।

वाहन की फिटनेस जांच है बेहद अहम

  • सुरक्षा के दृष्टिकोण से कार की तकनीकी और मैकेनिकल फिटनेस जांचना उतना ही आवश्यक है।
  • केवल बाहरी चमक-दमक देखकर निर्णय न लें, बल्कि किसी अनुभवी मैकेनिक से वाहन की पूरी जांच करवाएं।
  • खासतौर पर सीटों के नीचे, डैशबोर्ड के भीतर और बूट स्पेस में किसी संदिग्ध वायरिंग या बदलाव की जांच करें।
  • इंजन बे और ईंधन टैंक के आसपास किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या लीकेज का निरीक्षण करें।
  • जब तक मैकेनिक पूरी तरह संतुष्ट न हो, तब तक वाहन का अधिग्रहण न करें।

ओनरशिप ट्रांसफर में देरी न करें

  • वाहन बेचने के बाद सबसे अहम कदम है ओनरशिप का तुरंत ट्रांसफर (Immediate Transfer of Ownership)।
  • विक्रेता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि खरीदार जल्द से जल्द RTO में जाकर RC अपने नाम पर ट्रांसफर करवाए।
  • जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, वाहन की कानूनी जिम्मेदारी पूर्व मालिक पर बनी रहती है।
  • अगर वाहन किसी अपराध या हादसे में शामिल पाया जाता है, तो पूर्व मालिक को भी पुलिस जांच का सामना करना पड़ सकता है।
  • इसलिए RTO में आवेदन की रसीद और ट्रैकिंग रिकॉर्ड अपने पास सुरक्षित रखें।

ध्यान दें

दिल्ली ब्लास्ट जैसी घटनाएं यह स्पष्ट करती हैं कि सावधानी ही सुरक्षा है। पुरानी कार खरीदना या बेचना एक जिम्मेदारीपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें दस्तावेज़ों की जांच, तकनीकी फिटनेस की पुष्टि और कानूनी ट्रांसफर सबसे जरूरी कदम हैं। अगर हर नागरिक इन नियमों का पालन करे, तो न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित होगी बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मज़बूती मिलेगी।

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