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हेमलता: भारतीय संगीत में अपनी अलग पहचान बनाने वाली

नवभारत डेस्क

मित्रों, 1970 के दशक के कुछ गीत आपको जरूर याद होंगे... यशुदास के साथ "तू जो मेरे सुर में"(चितचोर, फिल्म फेअर अवार्ड, पहली बार डुएट में एक ही कलाकार को मिला)जब दीप जले आना,  सुन के तेरी पुकार(फकीरा) ,अंखियों के झरोखों से... कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया,  तू इस तरह से(संगीतकार उषा खन्ना गीतकार निदा फ़ाज़ली) 38 भाषाओं (सभी भारतीय भाषाओं सहित, क्षेत्रीय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय- अफ्रीकन, जूलो, मुल्तानी , सरायकी, पोरचुकी) में गाने वाली हेमलता (बाली) का नाम आपको याद होगा जिनका जन्मदिन 16 अगस्त (1954)को (भाग्यनगर हैदराबाद)था। पिता जयचंद भट्ट(लिवर की बीमारी से 25 जनवरी 88 में निधन) मां अंबिका भट्ट , बेटा आदित्य बाली (अभिनेता)।

राजस्थान के चूरु जिले और रतनगढ़ से 10 किलोमीटर दूर सेहला गांव निवासी हेमलता का बचपन , पढ़ाई क्रीक रो मौला अली कॉलेज,  कोलकाता से हुई। दादा जोरावर भट्ट पुरोहित थे ।उनके यजमानों में राजा महाराजा थे। उनके तीन भाई हैं --विनोद भट्ट  ,,(पत्नी संगीता, संगीतकार जमाल सेन के बेटे शंभुसेन की बेटी, संगीतकार समीर सेन की बहन)छोटा बेटा ऋषभ संगीतकार है और मंझला गोपाल व्यवसायी है।   

उनका पहला विवाह अभिनेत्री योगिता बाली( किशोर कुमार की तीसरी पत्नी) के भाई योगेश बाली (जो बाल कलाकार रहे हैं, अभिनेत्री गीता बाली की बहन हर दर्शन कौर के बेटे थे, उन्होंने  "राग रंग", "बाज" जैसी फिल्में बनाई थी।)  के साथ हुआ, हेमलता की मर्जी से विवाह न होने से  तलाक हो गया। 34 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। बाद में  दिलीप सेनगुप्ता, जो  नामचीन संगीत कं.के मालिक हैं, आजकल उन्हीं से जुड़ी है। परंपरावादी मारवाड़ी परिवार की होने के कारण उन्हें गाने की इजाजत नहीं थी। जबकि पिता शास्त्रीय गायक थे। उनके शिष्य रविंद्र जैन से वे चुपचाप संगीत सीखती थी और कोलकाता के दुर्गा पूजा आदि कार्यक्रमों में छिपकर स्टेज शो करती थी।

एक बार रंजीत स्टेडियम में ढाई लाख लोग थे लता जी, किशोर कुमार बड़े बड़े गायक -संगीतकार थे।  तब गोपाल लाल मलिक पिता के प्रति शिष्य और गुरु भाई ने   थोड़ी देर के लिए मौका दिया, फिर तो फरमाइश पर  12 गाने गाए। विधान चंद्र राय ने सबके सामने  स्वर्ण पदक दिया।उन्होंने मां से कह दिया कि यदि गाने नहीं दिया तो चूहे मारने का ज़हर पी लूंगी।तब 1966 मैं उनका परिवार दक्षिण मुंबई के गिरगांव में (जाकिर हुसैन की मदद से ) रहने लगा। शुरुआत में एस डी बर्मन,  एन दत्ता, सलिल चौधरी, चित्रगुप्त लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, कल्याणजी आनंदजी, राजकमल उषा खन्ना के साथ काम किया।

नौशाद जी के साथ तो 5 साल का अनुबंध भी था लेकिन इतने बड़े-बड़े संगीतकारों के ऑफर आए , उन सब को नाराज करना मुश्किल था, तो पिता के कहने पर अनुबंध  तोड़ दिया। नौशाद बहुत दुखी हुए और पर उन्होंने बुरा नहीं माना । उनसे ज्यादा वे स्वयं दुखी थी पर नौशाद जी का बड़प्पन बावजूद इसके उनके संबंध बहुत अच्छे रहे।मुंबई में उस्ताद अल्ला रखा ख़ान का सानिध्य मिला। पहली उड़ान उन्होंने उषा खन्ना की धुन (एक फूल: एक भूल) "जोगी जी धीरे धीरे", "दस पैसे में राम ले लो" से की और "रूप रूपैया" का गीत "तू खामोश , मैं पूरे जोश" रिकॉर्ड किया।कल्याणजी आनंदजी संगीतबद्ध फिल्म "विश्वास" के गीत  "ले चल मेरे जीवन साथी" से शानदार पारी शुरू की। राजश्री प्रोडक्शन के बड़जात्या बंधु ने उनसे बहुत सारे कालजयी गीत गवाए।

अंतिम गीत उन्होंने बप्पी लहरी के संगीत में रिकॉर्ड करवाया था। लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार श्री दयानंद पांडे के एक साक्षात्कार के अनुसार --वे कहती हैं कि उस जमाने में सोलो गाना तो छोड़िए,  कोरस भी कुछ लोगों की मर्जी से ही गाया जाता था। ऐसी स्थिति और पारिवारिक कारणों से वह कुछ अर्से तक गुमशुदा सी रही।  मां निर्मला देवी का आशीर्वाद मिला तो फिर  इस दुनिया में आई। पिता का निधन होने से गाने का मन नहीं हुआ लेकिन जिम्मेदारियों के कारण गाना पड़ा।   दुनिया बदल चुकी थी। संगीतकारों की बजाय ,  कंपनियों  का एकाधिकार था।

इस वजह से "खलनायक" फिल्म का "चोली वाला" और  "सात सहेलियां खड़ी-खड़ी" गाना छोड़ना पड़ा । कहती हैं कि गानों में डबिंग सिस्टम नहीं रहा , पंचिंग आ गया ।ऐसे गाने गायक को याद नहीं रहते तो जनता को कहां से याद रहेंगे। दादा- पिता का व्यवसाय जमीन खरीदने बेचने का था पर संगीत में रहने के कारण पिता चेन्नई आ गए और वहां मद्रास विवि में संगीत शिक्षक की नौकरी की। मां को चेन्नई पसंद नहीं था इसलिए 5 साल  राउरकेला में रहे ।उसके बाद पुराने घर कोलकाता  आ गए।

अग्रज शिशिर कृष्ण शर्मा के ब्लॉक "बीते हुए दिन" के अनुसार उन्होंने "बेटी बचाओ आंदोलन" में एक ह्रदय स्पर्शी गीत हेमंत मेहता के संगीत में  गाया है। हरे कृष्णा....के लिए दिलीप गुप्ता के संगीत में प्राइवेट एल्बम "कृष्णा" में गीता सार गाया है। उन्होंने कुछ वर्ष अमेरिका में रहकर वहां के गुरुद्वारों में  शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दी। राजस्थानी भाषा में फिल्म "सुपातर बींदणी", और एल्बम "रंगीलो राजस्थान" के गीत गाए ।दक्षिण भारतीय भाषाओं के हिंदी में डब होने वाली फिल्मों ...एस जानकी और पी सुशीला के गीत भी गाए। नूतन से लेकर माधुरी दीक्षित तक को उन्होंने आवाज़ दी  ।उनकी छोटी बुआ कमला की शादी हरियाणा के मेवात के पं. प्रताप नारायण से हुई जो मेवाती संगीत घराने के ख्याति प्राप्त गायक वादक थे। सुलक्षणा पंडित विजेता पंडित, जतिन ललित पंडित इन बुआ के बच्चे हैं। हाल ही में निधन हुआ  पं. जसराज जी कमला बुआ के देवर थे।

"चंदा को ढूंढने तारे निकल पड़े" फिल्म "जीने की राह" का  गीत अद्भुत था पर  हेमलता के जीने की राह बहुत कठिन थी। कहते हैं कि रविंद्र जैन और मंगेशकर परिवार के रोड़े ने उन्हें बहुत परेशान किया। (हालांकि रविंद्र जैन के संगीत में उन्होंने बहुत शानदार गीत गाए 1972 में रविंद्र जैन ने पहली फिल्म "कांच और हीरा" में अवसर दिया फिर "राख और चिंगारी", "सलाखें", फकीरा आदि)अंखियों के झरोखे के रिकॉर्ड को लंबे समय तक बाज़ार  पहुंचने नहीं दिया। शुरुआत के उनके हजारों रिकॉर्ड नष्ट कर दिए गए।  राज कपूर साहब ने "हिना" के गाने का कहा था पर उनके गुजरते ही उन्हें फिल्म से बाहर कर दिया । "1942: अ लव स्टोरी" के लिए आर डी बर्मन मुझे तलाशते रहे और उन्हें कहा गया  कि उनकी तबीयत अच्छी नहीं है,  उनका एड्रेस नहीं , है उन्होंने गाना छोड़ दिया आदि आदि।

उन्होंने कुछ भजन, दोहे (बड़े बड़ाई ना करें, बड़े न बोले बोल)भी गाये हैं। उन्होंने मेक्सिको और लंदन में पाकिस्तानी गायक अताउल्लाह खान के साथ एक म्यूजिक "सरहदें" किया। उनका कहना है कि वर्षों से जिस अता उल्ला खान को भारत के लोग सुन रहे हैं, वह नकली ,  टी सीरीज का है। उनका सरहदें और "इश्क" जो असली अत्ताउल्लाह खान के साथ है । पहले वाला गुड़गांव के किसी शर्मा जी की आवाज़ में है।यशुदास के साथ सबसे ज्यादा गाने वाली है वह एकमात्र गायिका है जिन्होंने अमेरिका में अपनी अकादमी स्थापित की है जो भारतीय शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा दे रही  है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के संगीत का नाम रोशन कर रही है। वैसे उन्होंने पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री और पूर्व खिलाड़ी के कैंसर अस्पताल के लिए भी अत्ताउल्लाह खान के साथ  "इश्क"  एल्बम किया था।

 एक सुरीला स्वर, पर संघर्ष से भरा हुआ, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है। ऐसी जीवट गायिका को जन्म दिन की बधाई।

साभार: अनंत श्रीमाली

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