TTP और IS-K का खूनी खेल: जानिए क्यों अफगानिस्तान पर बम बरसाना पाकिस्तान की मजबूरी बन गया?
Pakistan Claim : पाकिस्तान ने दावा किया है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और इस्लामिक स्टेट-खोरासान आतंकवादी संगठन हैं। ये उनके देश के खिलाफ काम करते हैं। दोनों संगठन अफगानिस्तान से ऑपरेट होते हैं।
- Written By: रंजन कुमार
पाकिस्तान और अफगानिस्तान में तनाव। इमेज-एआई
Pakistan And Afghanistan Tension News : पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव उस चरम पर पहुंच गया है, जहां परमाणु शक्ति संपन्न देश को छापामार लड़ाकों के खिलाफ हवाई हमले का सहारा लेना पड़ा है। शनिवार रात पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में भीषण एयरस्ट्राइक की, जिसे उसने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक मजबूरी करार दिया है। पाकिस्तान का सीधा आरोप है कि उसकी धरती पर होने वाले खूनखराबे की साजिशें अफगानिस्तान में रची जा रही हैं।
विवाद के केंद्र में 2 संगठन
इस पूरे विवाद के केंद्र में दो प्रमुख संगठन हैं-तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और इस्लामिक स्टेट-खोरासान (IS-K)। साल 2007 में बैतुल्लाह मेहसूद के नेतृत्व में बना TTP, जिसे पाकिस्तानी तालिबान भी कहा जाता है, पाकिस्तान सरकार का सबसे बड़ा दुश्मन बनकर उभरा है। कई छोटे जिहादी समूहों को मिलाकर बने इस संगठन का मुख्य उद्देश्य खैबर पख्तूनख्वा जैसे कबायली इलाकों से सरकारी नियंत्रण खत्म कर वहां अपना कट्टर शरिया कानून लागू करना है। पाकिस्तान का दावा है कि TTP को अल-कायदा और अफगान तालिबान का वैचारिक व रणनीतिक समर्थन प्राप्त है।
TTP को फितना अल खवारिज जैसा विवादित नाम दिया
हैरानी की बात यह है कि पाकिस्तान ने अब TTP को फितना अल खवारिज जैसा नया और विवादित नाम दिया है। खवारिज शब्द का ऐतिहासिक संदर्भ उन लोगों से है जो धर्म के नाम पर गुमराह होकर विद्रोह करते थे। पाकिस्तान का मकसद इन आतंकियों की धार्मिक साख को चोट पहुंचाना है, ताकि जनता को यह समझाया जा सके कि इनका इस्लाम से कोई वास्ता नहीं है। दूसरी ओर 2015 में वजूद में आया IS-K यानी इस्लामिक स्टेट-खोरासान, वैश्विक आतंकी संगठन ISIS की एक शाखा है। इसका सपना अफगानिस्तान, पाकिस्तान और मध्य एशिया को मिलाकर एक विशाल खोरासान प्रांत बनाना है। यह संगठन न केवल पाकिस्तान और शिया समुदायों का दुश्मन है, बल्कि अफगान तालिबान को भी अपना प्रतिद्वंद्वी मानता है।
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हमलों में इन संगठनों का बताया हाथ
पाकिस्तान का दावा है कि हाल के वर्षों में हुए सिलसिलेवार आत्मघाती हमलों, जिनमें हजारों बेगुनाहों की जान गई, उनके पीछे इन्हीं संगठनों का हाथ है। शहबाज शरीफ सरकार आने के बाद से इन गुटों पर सख्ती बढ़ी है। पाक सेना का मानना है कि जब तक अफगानिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल रोकने के दोहा समझौते का पालन नहीं करता, तब तक सीमा पार ऐसी सैन्य कार्रवाइयां उसकी मजबूरी बनी रहेंगी। अब सवाल है कि क्या ये हवाई हमले पाकिस्तान की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे या तालिबान के साथ एक नया और विनाशकारी मोर्चा खोल देंगे।
