

Donald Trump New Peace Plan Iran: अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी के अंत में शुरू हुए संघर्ष अभी भी जारी हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच एक शांति समझौता भी हुआ था, जो सिर्फ 21 दिन ही चल और अमेरिका ने शांति समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए ईरान पर फिर से हमले शुरू कर दिए। लेकिन अब अमेरिका ने एक बार फिर जंग की जगह बातचीत के रास्ते पर चलने का फैसला किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों को रोक दिया है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने यह फैसला इसलिए किया है कि बातचीत की गुंजाइश बनी रहे। जानकारी के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान युद्ध को लेकर एक नई योजना पर काम करना शुरू किया है। जिसके दम पर वो ना सिर्फ ईरान बल्कि मिडिल ईस्ट में मौजूद सभी ताकतवर देशों को शीशे में उतारने का सपना देख रहे हैं। आइए आपको बताते हैं कि ट्रंप ने ईरान पर हवाई हमले क्यों रोके? ट्रंप का नया प्लान क्या है? और इसमें इजरायल की क्या भूमिका है?
डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को दावा किया कि वो ईरान से बातचीत के जरिए रास्ता निकालना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर जारी हवाई हमलों को बंद कर दिया है। हालांकि अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान पर हवाई हमले बंद करने की असल वजह कुछ और है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान पर हमले रोकने की वजह बातचीत नहीं बल्कि गोला-बारूद की कमी है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और पेंटागन के अधिकारियों ने ट्रंप को समझाया कि अगर अमेरिका ईरान पर लगातार हवाई हमले करता है, तो इससे देश में गोला-बारूद की भारी कमी हो सकती है। इस स्थिति में अमेरिका की सुरक्षा को लेकर भी खतरा पैदा हो सकता है। इसके बाद ही ट्रंप ने न चाहते हुए भी ईरान पर हमले रोकने का आदेश दिया।
एक तरफ जहां डोनाल्ड ट्रंप बातचीत से मामले को सुलझाने की बात कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई इसे उलट बयान दे रहे हैं। उन्होंने ट्रंप का बयान सामने आने के कुछ घंटों बाद ही बयान जारी करते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़कर अमेरिका बुरी तरह से फंस गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका युद्ध से निकलने की लगातार कोशिश कर रहा है लेकिन वो ऐसा नहीं कर पा रहा है। इसके साथ खामेनेई ने कहा कि अमेरिका को अपने किए की सजा जरूर भुगतना होगा। मोजतबा पहले भी ट्रंप को बदले की चेतावनी दे चुके हैं।
हालांकि, मोजतबा खामेनेई के सख्त रुख के बावजूद ईरान की ओर से बातचीत को लेकर सकारात्मक रुख देखने को मिला है। ईरान ने हाल ही में दावा किया कि उन्होंने ओमान से उप विदेश मंत्री स्तर पर बातचीत की है। लेकिन फिलहाल उन्हें ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि इस्लामिक रिपब्लिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की जिद से पीछे हटेगा।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिलहाल बिल्कुल बंद है। इस बीच ट्रंप ने अपनी पुरानी योजना पर भी काम किया और कोशिश की कि ईरान में सत्ता परिवर्तन कर खुद को विजेता घोषित कर दें और नवंबर में होने वाले मिड टर्म इलेक्शन में अपनी पार्टी की स्थिति मजबूत कर लें। लेकिन जब ट्रंप इसमें भी असफल रहे तो उन्होंने इजरायल को नजरअंदाज करते हुए ईरान से शांति समझौता तक कर लिया। हालांकि इसके बाद भी ट्रंप के पास ऐसा कुछ नहीं था जिसे सामने करके वो खुद को विजेता साबित कर सके। ऐसे में ट्रंप को समझ आ गया कि वो खुद को तभी विजेता घोषित कर सकते हैं जब मिडिल ईस्ट में इजरायल पूरी तरह से सुरक्षित मान लिया जाए।
जानकारी के मुताबिक, ट्रंप ने इसके बाद अपने नए प्लान पर काम करना शुरू किया। इसके केंद्र में एक बार फिर अब्राहम अकॉर्ड है। यह इजरायल और कई अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने वाला ऐतिहासिक समझौता है, जिसकी शुरुआत सितंबर 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका की मध्यस्थता में हुई थी। अब तक संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मोरक्को और सूडान इस समझौते से जुड़ चुके हैं। अब ट्रंप की कोशिश है कि सऊदी अरब भी इसमें शामिल हो। इसके बदले अमेरिका सऊदी अरब के साथ एक नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर आगे बढ़ने की पेशकश कर सकता है।
हालांकि, ट्रंप का यह नया प्लान सऊदी अरब के लिए मुसीबत बन सकता है। क्योंकि सऊदी सरकार इजरायल के बनने के बाद से ही उसका विरोध करती आ रही है। सऊदी अरब कई बार दावा कर चुका है कि वो तब तक इजरायल को एक देश के तौर पर मान्यता नहीं देगा, जब तक फिलिस्तीन को मान्यता नहीं मिल जाती।
ऐसे में अगर सऊदी अरब बिना फिलिस्तीन को मान्यता मिले इजरायल के अस्तित्व स्वीकार कर लेता है तो इससे सरकार को जनता और कट्टरपंथियों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि ईरान के लगातार हमलों के चलते सऊदी अरब अपनी रक्षा को लेकर अमेरिका पर पहले से कहीं अधिक निर्भर हो गया है। ऐसे में ट्रंप मानकर चल रहे हैं कि वो सऊदी अरब को अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने के लिए मना लेंगे।