जंग खत्म करने को बेताब हैं जेलेंस्की, ट्रंप ने किया निराश तो पाकिस्तान के इस दोस्त से लगा रहे गुहार!

Russia Ukraine War: यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की तुर्की यात्रा पर जाएंगे ताकि रूस के साथ शांति वार्ता को फिर से शुरू किया जा सके। वह युद्धबंदियों की अदला-बदली और मानवीय डील पर काम कर रहे हैं।
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Volodymyr Zelenskyy Turkiye Visit: यूक्रेन और रूस के बीच करीब चार साल से जारी जंग अब भी खत्म नहीं हुई है। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि वह युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत के प्रयासों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि वह इस सप्ताह तुर्की की यात्रा पर जाएंगे ताकि शांति वार्ता को नया जीवन मिल सके।

जेलेंस्की ने कहा कि वह स्पेन की यात्रा पूरी करने के अगले दिन यानी बुधवार को तुर्की पहुंचेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्पेन से उन्हें नए समर्थन की घोषणाएं मिलेंगी। सोशल मीडिया पर उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने बातचीत को फिर से शुरू करने की तैयारी कर ली है और कुछ प्रस्ताव तैयार किए हैं, जिन्हें साझेदार देशों के सामने रखा जाएगा। उनके अनुसार, युद्ध खत्म करना यूक्रेन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

तुर्की में हुई थी शांति वार्ता

तुर्की पहले भी यूक्रेन और रूस के बीच बातचीत की मेजबानी कर चुका है। इस साल की शुरुआत में इस्तांबुल में हुई वार्ता में केवल युद्धबंदियों के आदान-प्रदान पर ही कुछ प्रगति हुई थी। लेकिन अमेरिका की अगुवाई में चल रहे अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयास अभी तक किसी बड़ी सफलता तक नहीं पहुंच पाए हैं।

जेलेंस्की ने बताया कि वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए वह अपनी राजनीतिक पार्टी सर्वेंट ऑफ द पीपल के नेताओं, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और संसद के नेतृत्व से भी मिलेंगे। उन्होंने कहा कि यूक्रेन और रूस एक नई डील पर काम कर रहे हैं, जिसमें युद्धबंदियों की अदला-बदली फिर से शुरू की जाएगी। इस प्रक्रिया से करीब 1,200 यूक्रेनी कैदियों की रिहाई संभव हो सकती है। यह मानवीय आधार पर शांति की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

50,000 से ज्यादा यूक्रेनी सैनिकों की मौत

रूस के साथ चल रही लड़ाई में अब तक 50,000 से ज्यादा यूक्रेनी सैनिक मारे जा चुके हैं और हजारों लोगों को कैद किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कैदियों की अदला-बदली से शांति वार्ता की राह आसान हो सकती है, लेकिन रूस की कुछ कड़ी मांगें, जैसे डोनबास क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण, अब भी समझौते की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं।

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