

US Soldiers Committing Suicide Jumping From USS Abraham Lincoln: अमेरिकी सेना करीब छह महीने से ईरान के खिलाफ जंग लड़ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही इस युद्ध में अमेरिका को जीता हुआ बता चुकें हैं। लेकिन इसी बीच अमेरिकी सेना को लेकर कुछ ऐसी खबरें सामने आई हैं जिसने ट्रंप के दावे को लेकर अमेरिकी नागरिकों के साथ-साथ पूरी दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
अमेरिकी नौसेना का विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन इन दिनों एक गंभीर मानवीय और परिचालन संकट से गुजर रहा है। इस विमानवाहक पोत में करीब 5,000 से अधिक नौसैनिक काम करते हैं और यह पिछले नौ महीनों से लगातार समुद्र में तैनात है। USS अब्राहम लिंकन से खबर आई है कि सैनिक लगातार तैनाती, युद्ध और परिवार से दूर रहने के चलते मानसिक रूप से थके गए और नतीजतन पोत से कूदकर अपनी जान दे रहें हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि दुनिया की सबसे ताकतवर मानी जानी वाली अमेरिका के सैनिकों अचानक क्यों आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठा रहे हैं? USS अब्राहम लिंकन में क्या चल रहा है?
अमेरिका के प्रसिद्ध समाचार प्रत्र नेवी टाइम्स ने हाल ही में इस मुद्दे को लेकर अपनी एक रिपोर्ट जारी की है। नेवी टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक नौसैनिक की पत्नी एनाबेल लोमा ने बताया कि उनके पति ने अत्यधिक तनाव और काम के दबाव के बीच जहाज से कूदकर आत्महत्या करने की कोशिश की। उन्हें बचा लिया गया, लेकिन इस घटना ने उनके करियर और मानसिक स्थिति पर गंभीर असर डाला है।
एक अन्य नौसैनिक की पत्नी ने अधिकारियों को बताया कि उनके पति ने एक साथी सैनिक को डेक से कूदने से ठीक पहले रोक लिया था। 6 अगस्त को हुई एक बैठक में परिवारों ने अधिकारियों को बताया कि कई सैनिक मानसिक रूप से बेहद परेशान हैं। कुछ सैनिकों की स्थिति इतनी खराब बताई गई कि वे अगली सुबह उठना तक नहीं चाहते। इन घटनाओं ने नौसेना की तैनाती व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
USS अब्राहम लिंकन की मौजूदा तैनाती 21 नवंबर 2025 को सैन डिएगो से शुरू हुई थी। दिसंबर में जहाज गुआम पहुंचा और इसके बाद इसे मध्य पूर्व की ओर भेजा गया। जनवरी 2026 से यह अरब सागर और ईरान के आसपास के क्षेत्र में सक्रिय रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस दौरान जहाज से लड़ाकू विमानों ने करीब 10,000 उड़ानें भरी हैं।
इस तैनाती को मई 2026 में खत्म होना था, लेकिन बाद में इसकी अवधि बढ़ा दी गई। सैनिकों और उनके परिवारों को इस बदलाव से काफी निराशा हुई। लंबी तैनाती के कारण नौसैनिकों को अपने परिवारों से दूर रहना पड़ा है। लगातार ड्यूटी, पर्याप्त आराम की कमी और यह स्पष्ट न होना कि वे कब घर लौटेंगे, तनाव को और बढ़ाने वाला कारण बन गया है।
जहाज पर रहने की सुविधाओं को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। परिवारों के मुताबिक, कुछ टॉयलेट और शॉवर खराब हालत में हैं। पानी और गर्म पानी की समस्या के साथ सीवेज ओवरफ्लो होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। लंबे समय तक समुद्र में रहने के कारण जहाज की कुछ बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ा है। इससे रोजमर्रा की जिंदगी सैनिकों के लिए और मुश्किल हो गई है।
खाने और जरूरी सामान की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठे हैं। डेमोक्रेटिक सांसद माइक लेविन ने दावा किया कि कुछ सैनिकों को बेहद सीमित भोजन मिल रहा है। उनके अनुसार, खाने में कभी-कभी केवल आधा कप चावल और दो रोटी जैसी चीजें शामिल होती हैं। कई हफ्तों तक ताजे फल, सब्जियां और दूध उपलब्ध नहीं होने की शिकायत भी सामने आई है।
बुनियादी स्वच्छता सामग्री की कमी ने स्थिति को और कठिन बना दिया है। सैनिकों के मुताबिक, साबुन, डियोडोरेंट और टूथपेस्ट जैसी रोजमर्रा की चीजों की कमी हो गई है, कपड़े धोने की सुविधा भी लंबे समय तक प्रभावित रही। लगातार शोर और काम के दबाव से चिड़चिड़ापन और थकान बढ़ रही है।
नौसेना और अमेरिकी प्रशासन ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है। शुरुआत में ट्रंप प्रशासन और रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने संकट की कुछ रिपोर्टों को खारिज किया था। बाद में कार्यवाहक नौसेना सचिव हंग काओ ने माना कि USS अब्राहम लिंकन की करीब 266 दिनों की तैनाती बेहद कठिन रही है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ सैनिकों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपचार दिया गया है।
हालांकि अधिकारियों ने किसी बड़े हादसे या मौत की बात से इनकार किया है, लेकिन परिवारों की शिकायतों ने मानसिक स्वास्थ्य सहायता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सैनिकों के परिवार चाहते हैं कि नौसेना तनाव और आत्महत्या के जोखिम से जूझ रहे लोगों को तुरंत मदद दे। साथ ही वे चाहते हैं कि लंबे समय तक चलने वाली तैनाती के दौरान आराम, भोजन, स्वच्छता और संपर्क जैसी बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए।
अब USS जॉर्ज वाशिंगटन को USS अब्राहम लिंकन की जगह तैनात करने की योजना है। अनुमान है कि जॉर्ज वाशिंगटन 22 अगस्त तक ओमान के पास पहुंच सकता है और इसके बाद लिंकन को राहत मिल सकती है। यदि योजना के अनुसार बदलाव होता है, तो USS अब्राहम लिंकन अमेरिका लौट सकेगा। यह तैनाती वियतनाम युद्ध के बाद विमानवाहक पोतों की सबसे लंबी तैनातियों में शामिल हो सकती है।