ट्रंप की वीजा पॉलिसी से भारत-चीन को बड़ा झटका, 84000 की कमी, छात्र-कामगार सबसे अधिक परेशान

US Visa Policy: 2025 में सख्त नीतियों के कारण अमेरिका ने 2.5 लाख कम वीजा जारी किए, जिससे भारत और चीन के नागरिकों, खासकर छात्रों, कामगारों और परिवार वीजा आवेदकों पर बड़ा प्रभाव पड़ा।
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ट्रंप की वीजा नीति से भारत-चीन को नुकसान (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Trump Visa Policy Impact: संयुक्त राज्य अमेरिका में साल 2025 के पहले आठ महीनों के दौरान कानूनी आप्रवासन में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। यह कमी विशेष रूप से वीजा जारी करने की प्रक्रिया में सख्ती के कारण आई है, जिसे ट्रंप प्रशासन की नई नीतियों से जोड़ा जा रहा है। एक प्रमुख अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से अगस्त 2025 के बीच लगभग 2.5 लाख कम वीजा जारी किए गए, जो 2024 की समान अवधि की तुलना में बड़ी गिरावट को दर्शाता है।

इस दौरान स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) और अस्थायी वीजा स्वीकृतियों में कुल मिलाकर करीब 11 प्रतिशत की कमी आई। इस गिरावट का सबसे अधिक प्रभाव भारत और चीन के नागरिकों पर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों देशों के लिए जारी किए गए वीजा में लगभग 84,000 की कमी आई।

छात्रों-कामगारों पर सबसे ज्यादा असर

यह कमी मुख्य रूप से छात्र, कामगार और पारिवारिक वीजा श्रेणियों में देखने को मिली। इसके अलावा पर्यटक वीजा में भी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे स्पष्ट है कि व्यापक स्तर पर वीजा जारी करने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर इसका सबसे अधिक असर पड़ा है। 2025 के पहले आठ महीनों में छात्र वीजा में 30 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। जहां 2024 में इसी अवधि में लगभग 3.44 लाख छात्र वीजा जारी किए गए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर करीब 2.38 लाख रह गई। एक्सचेंज वीजा में भी लगभग 30,000 की कमी दर्ज की गई। इसके अलावा, कामगारों और अफगानिस्तान व इराक जैसे देशों के नागरिकों के वीजा में भी उल्लेखनीय गिरावट देखी गई।

गिरावट के पीछे का कारण

विश्लेषकों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं। इनमें 19 देशों पर यात्रा प्रतिबंध, छात्र वीजा साक्षात्कारों पर अस्थायी रोक, सोशल मीडिया जांच जैसी कड़ी प्रक्रियाएं और विदेश विभाग में कर्मचारियों की कमी शामिल हैं। इन कारणों से वीजा प्रक्रिया की गति धीमी हुई है, अपॉइंटमेंट कम हो गए हैं और प्रतीक्षा समय बढ़ गया है।

सरकारी पक्ष का कहना है कि वीजा देना एक अधिकार नहीं बल्कि विशेषाधिकार है, और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं, आलोचकों का मानना है कि इन प्रतिबंधों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

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