सीरिया के अबू अल-दुहुर एयरबेस पर इजरायल ने किए 8 बड़े हवाई हमले, अमेरिका ने जताई सख्त आपत्ति

Israeli Airstrikes Threat: सीरिया के अबू अल-दुहुर एयरबेस पर इजरायली हमलों के बाद अमेरिका और इजरायल के बीच कड़ा कूटनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है, जिसे टालने की कोशिश जारी है।
Israeli Airstrikes Abu Al Duhur Airbase Syria
सीरिया के अबू अल-दुहुर एयरबेस पर इजरायल ने किया हमला(सोर्स- सोशल मीडिया)
Updated on

Israeli Airstrikes Abu Al Duhur Airbase Syria: सीरिया में हालिया इजरायली हमलों के बाद तनाव कड़ा हो गया है। इजरायली वायुसेना ने सीरिया के अबू अल-दुहुर एयरबेस पर आठ बड़े हवाई हमले किए हैं। इन हमलों के बाद पूरे मध्य पूर्व इलाके में युद्ध का कड़ा खतरा मंडराने लगा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शांति बड़े खतरे में है।

अबू अल-दुहुर सैन्य ठिकाने पर हुए हमले के बाद इजरायल के करीबी सहयोगी अमेरिका ने अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। सीरिया और इराक के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत टॉम बैरक ने इजरायली सैन्य कार्रवाई की तीखी निंदा की और इसे पूरी तरह से अनावश्यक बताया है।

सैन्य ठिकाने पर भारी हमला

सीरिया के इदलिब प्रांत में स्थित इस प्रमुख एयरबेस पर हुए हवाई हमलों की पुष्टि स्थानीय सूत्रों ने भी की है। सीरियाई मीडिया के अनुसार इजरायली हमलों से हवाई अड्डे के मुख्य रनवे और कई कड़े सैन्य स्टोरेज गृहों को गंभीर और बड़ा नुकसान पहुंचा है, जिससे चिंता काफी बढ़ी है।

दूसरी ओर इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने हमेशा की तरह इस सैन्य हमले पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। सीरिया और इजरायल के बीच पहले से ही कड़े तनावपूर्ण कूटनीतिक संबंध रहे हैं। सीरिया के नए कड़े नेतृत्व के आने के बाद इजरायल का यह पहला बड़ा और कड़ा हवाई हमला है।

अमेरिका की तीखी आपत्ति

अमेरिकी दूत और राजदूत टॉम बैरक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट लिखकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इजरायल द्वारा अबू अल-दुहुर एयरबेस पर किए गए इन कड़े हमलों से क्षेत्रीय स्थिरता को बड़ा धक्का पहुंचा है, जिसे आसानी से टाला जा सकता था।

अमेरिकी दूत ने सीरियाई प्रशासन का कूटनीतिक बचाव करते हुए कहा कि अल-शर्रा सरकार ने कभी कोई आक्रामक रुख नहीं अपनाया है। इस सरकार ने न तो कोई प्रॉक्सी सेना बनाई है और न ही किसी हमले को बढ़ावा दिया है, बल्कि हमेशा कड़ा और बेहतर संयम दिखाया है।

Israeli Airstrikes Abu Al Duhur Airbase Syria
सेंट्रल अफ्रीका में दर्दनाक हादसा: सोने की खदान ढहने से 30 खनिकों की मौत, कई अब भी मलबे में दबे

बातचीत से समाधान की सलाह

अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि दोनों देशों के बीच कड़े विवादों को केवल बातचीत से ही सुलझाया जा सकता है। अमेरिका दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक संवाद बढ़ाने के लिए बैठकों की मेजबानी करने को प्रतिबद्ध है, क्योंकि शांतिपूर्ण संयम ही एक एकमात्र सही रास्ता है।

इसके अलावा इजरायल के राष्ट्रपति बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच भी ईरान के मुद्दे पर कड़ा विवाद हुआ है। दोनों नेताओं के बीच ईरान के बढ़ते प्रभाव को लेकर कड़वी बहस की कूटनीतिक खबरें सामने आई हैं, जिससे दोनों देशों के रिश्ते कड़े हुए हैं।

Navbharat Live
navbharatlive.com