

Ballistic Missile Threat Kyiv: अमेरिका और रूस के बीच बढ़ते अत्यंत गंभीर सैन्य तनाव के बीच अब यूक्रेन पर फिर से विनाशकारी हमले किए गए हैं। इसके तहत रूसी सेना ने यूक्रेन के नौ प्रमुख शहरों में स्थित महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलें बरसाई हैं।
इन भीषण और लगातार हमलों में तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों को भारी नुकसान पहुंचने की पुष्टि हुई है। रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह घातक हवाई हमला सुरक्षा एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय और अपनी अजेय सैन्य ताकत को प्रदर्शित करने के लिए था।
रूसी सेना की इस अचानक और बेहद भयानक गोलाबारी में आम लोगों के आवासीय इलाकों और बहुमंजिला इमारतों को भी बहुत भारी नुकसान पहुंचा है। इस हमले में दक्षिणी जापोरिज्जिया इलाके की एक अठहत्तर वर्षीय बुजुर्ग महिला और उत्तरी खारकीव के एक अन्य बेकसूर नागरिक की दर्दनाक मौत हो गई।
इसके साथ ही यूक्रेन के विभिन्न अशांत और युद्धग्रस्त इलाकों में कम से कम चौदह लोगों के अत्यंत गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। इस विनाशकारी तबाही और नरसंहार को देखते हुए यूक्रेनी अधिकारियों ने वैश्विक समुदाय और पश्चिमी देशों से तत्काल अतिरिक्त सुरक्षा और सैन्य सहायता मांगी है।
यूक्रेन के सामने इस समय अमेरिकी पैट्रियट हवाई रक्षा मिसाइलों की लगातार हो रही भारी कमी एक बहुत बड़ी और गंभीर राष्ट्रीय चुनौती बनी हुई है। ये आधुनिक रक्षा मिसाइलें ही रूसी बैलिस्टिक मिसाइलों का आसमान में सफलतापूर्वक मुकाबला करने और उन्हें मार गिराने में पूरी तरह सक्षम मानी जाती हैं।
यूक्रेनी अधिकारियों का दावा है कि मॉस्को लगातार अपनी मिसाइलों का विशाल भंडार बना रहा है और हर कुछ दिनों में भारी हवाई हमले कर रहा है। इन लगातार हवाई हमलों का मुख्य और सीधा उद्देश्य यूक्रेनी डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह थकाकर और प्रभावित करके अपनी पूर्ण सामरिक बढ़त बनाना है।
इस भारी संकट के बीच अमेरिकी CIA के प्रमुख जॉन रैटक्लिफ ने मॉस्को का सीक्रेट दौरा करके वहां के उच्च अधिकारियों के साथ गुप्त वार्ता की है। रूसी प्रशासन पिछले साल अगस्त में डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच अलास्का शिखर सम्मेलन के दौरान बनी आपसी सहमति से अब पीछे हट चुका है।
हालांकि शांति वार्ता के नए प्रयासों के लिए जल्द ही अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और गेरेड कुश्नर के भी मॉस्को जाने की पूरी उम्मीद जताई गई है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इन सीक्रेट कूटनीतिक वार्ताओं से इस विनाशकारी युद्ध को रोकने का कोई रास्ता निकलता है।