

US Military Tanker Tracking Operation: अमेरिकी सेना ने हिंद महासागर में एक बड़े सैन्य ऑपरेशन को अंजाम देते हुए वेनेजुएला से भागे एक विशाल तेल टैंकर को सफलतापूर्वक पकड़ लिया है। यह टैंकर निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला के तट से भागने वाले उन दर्जनों जहाजों में से एक था जो अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहे थे। पेंटागन के अनुसार इस पकड़े गए जहाज का नाम 'बर्था' है और इसे कैरेबियन सागर से लेकर हिंद महासागर तक लगभग 15,000 किलोमीटर की दूरी तक ट्रैक किया गया था। इस साहसी सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला में हो रही कच्चे तेल की अवैध तस्करी को रोकना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों को कड़ाई से लागू करना है।
अमेरिकी दक्षिणी कमान ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि उनकी विशेष सेना रात के अंधेरे में 'बर्था' नामक जहाज पर चढ़ी और उसका पूरा नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया। यह जहाज राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कैरेबियन क्षेत्र में लगाए गए क्वारंटाइन नियमों और कड़े प्रतिबंधों को तोड़कर अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में भागने की फिराक में लगा हुआ था। जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली संस्थाओं के अनुसार यह जहाज पिछले काफी समय से रडार पर था और इसे पकड़ने के लिए उच्च तकनीक वाली सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग किया गया।
टैंकरट्रैकर के सह-संस्थापक समीर मदानी ने आधिकारिक रूप से बताया कि इस पकड़े गए टैंकर पर लगभग 1.9 मिलियन बैरल कच्चा तेल लदा हुआ है जो अवैध रूप से ले जाया जा रहा था। 'बर्था' उन 16 टैंकरों की सूची में अंतिम जहाज था जिसका अमेरिकी सेना लगातार पीछा कर रही थी क्योंकि बाकी सभी जहाजों को पहले ही विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्थानों पर रोक लिया गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि यह जहाज कुक आइलैंड्स के झंडे का इस्तेमाल कर रहा था और अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार इसके संबंध सीधे तौर पर ईरान के प्रतिबंधित नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।
वेनेजुएला के तानाशाह राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के पकड़े जाने के बाद वहां के तट से कई तेल टैंकर भाग निकले थे जिनमें से 'बर्था' सबसे प्रमुख और बड़ा तेल टैंकर माना जा रहा है। अमेरिका का आरोप है कि वेनेजुएला अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए दूसरे देशों के फर्जी झंडों का उपयोग करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बड़े पैमाने पर तस्करी कर रहा था। पेंटागन द्वारा जारी किए गए वीडियो में अमेरिकी मिलिट्री हेलीकॉप्टरों को टैंकर की ओर तेजी से बढ़ते हुए देखा जा सकता है जिससे इस पूरे गुप्त ऑपरेशन की गंभीरता का पता चलता है।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह पूरा ऑपरेशन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और बोर्डिंग के दौरान किसी भी प्रकार की कोई अप्रिय घटना या हिंसक झड़प की खबर सामने नहीं आई है। ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल दिसंबर में इन टैंकरों को अलग-थलग करने का आदेश दिया था ताकि मादुरो शासन पर कड़ा आर्थिक दबाव बनाया जा सके और अवैध तेल व्यापार को रोका जा सके। भविष्य में इस प्रकार की कार्रवाइयों से अमेरिका ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर अपनी निगरानी और सुरक्षा नियंत्रण को लेकर बेहद सख्त रुख अपना रहा है।