नेतन्याहू के लिए आगे कुआं पीछे खाई...चुनाव हारते ही ट्रंप ने छोड़ा साथ, देश में विपक्ष खोद रहा है कब्र!

Benjamin Netanyahu Govt Crisis: अमेरिकी चुनाव में झटके के बाद ट्रंप ने इजरायल की आर्थिक मदद रोकने और ईरान पर हमला टालने का ऐलान किया। इससे नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
Donald Trump Stops Israel Aid
इजरायल प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • ट्रंप ने इजरायल को मिलने वाली सालाना आर्थिक सहायता रोकने का ऐलान किया

  • नेतन्याहू की लिकुड पार्टी इजरायल में बहुमत हासिल करने में नाकाम रही

  • अरब पार्टियां गादी आइजेनकोट को बाहर से समर्थन देने पर विचार कर रहीं

Donald Trump Stops Israel Aid: अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के नतीजे लगभग सामने आ चुके हैं। चुनाव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है, उनकी पार्टी ने अमेरिका के दोनों सदनों में अपना बहुमत खो दिया है। इन नतीजों का असर इजरायल पर भी देखने को मिल रहा है। ट्रंप ने चुनाव हारने के तुरंत बाद इजरायल और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को एक साथ दो बड़े झटके दिए। 

ट्रंप ने मध्यावधि चुनाव के नतीजे आने के तुरंत बाद सालाना मिलने वाली 4 बिलियन डॉलर की मदद पर रोक लगाने का ऐलान किया। ट्रंप ने कहा कि हमने इजरायल को इस बारे में बता दिया है कि अब हम आगे उनकी मदद नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा ट्रंप ने ईरान पर फिलहाल किसी भी प्रकार के हमले से इनकार कर दिया है।

बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें और बढ़ीं

डोनाल्ड ट्रंप के इन फैसलों का सबसे बड़ा असर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अधर में लटकी उनकी सरकार पर पड़ सकता है। हाल ही में इजरायल में आम चुनाव हुए थे। जहां नेतन्याहू की लिकुड पार्टी बहुमत हासिल करने में नाकाम रही और उनकी प्रधानमंत्री पद की कुर्सी भी सुरक्षित नहीं बची है। हालांकि, नेतन्याहू के पास करीब एक महीने का समय है, जहां वो विपक्षी पार्टियों से गठबंधन करके अपनी सत्ता बचा सकते हैं। लेकिन इसकी भी संभावनाएं काफी कम हैं। 

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इजरायल की सबसे बड़ी पार्टी लिकुड पार्टी

इजरायल में हाल ही में हुए चुनाव में लिकुड पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी। 120 सीटें नेसेट (संसद) में लिकुड पार्टी को सबसे अधिक 53 सीटें जीतीं। वहीं, मुख्य विपक्षी गठबंधन 48 सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर रहा था। इन दोनों के अलावा अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को 19 सीटें मिली। इस प्रकार कोई भी पार्टी सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई।  

इजरायल में चुनाव के नियम के तहत किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में राष्ट्रपति सबसे बड़ी पार्टी को बहुमत साबित करने के लिए 28 दिन का समय देते हैं। इस अवधि को परिस्थितियों को देखते हुए 14 दिन और बढ़ाया जा सकता है। इजरायल में 27 अक्टूबर को चुनाव हुए थे। ऐसे में नेतन्याहू के पास बहुमत साबित करने के लिए 27 नवंबर तक का समय है।

नेतन्याहू के सामने सरकार बनाने को लेकर मुश्किलें?  

बेंजामिन नेतन्याहू के लिए सरकार बनाने के लिए बहुमत जुटा पाना काफी मुश्किल माना जा रहा है। क्योंकि गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह नेतन्याहू के साथ गठबंधन नहीं करेंगा। इसके अलावा अरब पार्टियां पहले ही नेतन्याहू को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी बता चुकी हैं।

इसके अलावा नेतन्याहू अरब पार्टियों के साथ गठबंधन करके अपने राजनीतिक भविष्य को खतरे में डालने का जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। क्योंकि इजरायल में यहूदी समुदाय के बीच अरब पार्टियों को लेकर असहजता रही है।  ऐसे में अरब पार्टियों को सीधे सरकार में शामिल करने को यहूदी जनता अपने साथ धोखा मान सकती है। 

गादी को समर्थन देने को तैयार अरब पार्टियां

इसी बीच इजरायल से एक और बड़ी रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल की दो प्रमुख अरब पार्टियां राआम (Ra'am) और जॉइंट लिस्ट (Joint List) गादी आइजेनकोट को समर्थन देने को तैयार हैं। जॉइंट लिस्ट नेतन्याहू की विरोधी पार्टियों को बाहर से समर्थन देने के लिए तैयार हैं। वह खुद सरकार का हिस्सा नहीं बनना चाहती है।

हालांकि अरब पार्टियों को लेकर सरकार बनाने में जो खतरा नेतन्याहू के सामने है वही खतरा गादी के सामने भी है। ऐसे में क्या गादी नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए अरब पार्टियों के साथ जाएंगे यह कहना अभी काफी मुश्किल है। 

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ट्रंप और नेतन्याहू की एक जैसी हालत 

ट्रंप और नेतन्याहू की स्थिति फिलहाल एक जैसी है। दोनों के पास ही बहुमत नहीं है। हालांकि ट्रंप की कुर्सी को कोई खतरा नहीं है और वह 2028 तक अमेरिका के राष्ट्रपति बने रह सकते हैं। इसके अलावा दोनों ही नेता ईरान पर हमला करने के फैसले को लेकर भी स्वतंत्र हैं। लेकिन युद्ध लंबा खिंचने की स्थिति में अमेरिकी संसद ट्रंप के फैसले को पलट सकती है और उन्हें युद्ध खत्म करने पर मजबूर कर सकती है या फिर महाभियोग चलाकर पद से भी हटा सकती है।