Israel-Lebanon में थमेगी जंग? शांति की कोशिशें तेज, अमेरिकी दखल के बाद ऐतिहासिक समझौते की बढ़ी उम्मीद
Israel-Lebanon Talks: मिडिल ईस्ट में 14 और 15 मई को इजरायल और लेबनान के बीच अमेरिका में गहन शांति वार्ता होगी। अमेरिका इस अहम बैठक की मध्यस्थता करेगा, जिससे शांति की काफी उम्मीद जगी है।
- Written By: प्रिया सिंह
इजरायल और लेबनान का झण्डा (सोर्स-सोशल मीडिया)
US Mediates Israel-Lebanon Peace Talks: मिडिल ईस्ट में लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच अब शांति की एक नई किरण दिखाई दे रही है। अमेरिकी विदेश विभाग ने आधिकारिक तौर पर इस नई शांति प्रक्रिया की महत्वपूर्ण घोषणा कर दी है। इजरायल और लेबनान के बीच अगले दौर की गहन शांति वार्ता 14 और 15 मई को आयोजित की जाएगी। इस नई और अहम पहल से पूरे इलाके के लोगों में काफी राहत देखने को मिल रही है।
इस ऐतिहासिक बातचीत का मुख्य केंद्र दोनों देशों के बीच एक बहुत ही व्यापक और मजबूत सुरक्षा समझौता तैयार करना है। वॉशिंगटन इस पूरी चर्चा की मेजबानी करने के साथ-साथ मुख्य मध्यस्थ की भूमिका भी पूरी जिम्मेदारी से निभाएगा। इससे पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में लंबे समय से जारी खूनी संघर्ष के हमेशा के लिए खत्म होने की एक बहुत बड़ी उम्मीद है।
इजरायल और लेबनान के बीच होगी शांति की नई शुरुआत
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता थॉमस टॉमी पिगोट ने बताया कि यह वार्ता पिछले महीने की बैठक की अगली कड़ी है। यह अहम बैठक 23 अप्रैल को हुई थी, जिसका नेतृत्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया था। अमेरिका अब पुरानी और नाकाम नीतियों को पूरी तरह से पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहता है।
इन पुरानी नीतियों के कारण पिछले दो दशकों में उग्रवादी समूहों को अपनी ताकत बढ़ाने का काफी मौका मिला है। इससे लेबनान की संप्रभुता भी काफी कमजोर हुई है, जिसे अब अमेरिका हर हाल में सुधारना चाहता है। इस वार्ता के एजेंडे में हिजबुल्लाह का पूर्ण निशस्त्रीकरण सबसे ज्यादा संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा।
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अमेरिका की प्रमुख शर्तें
अमेरिकी विदेश विभाग ने यह साफ कर दिया है कि स्थाई शांति तभी संभव है जब लेबनान में राजकीय सत्ता बहाल हो। हिजबुल्लाह जैसे किसी भी सशस्त्र समूह के पास कोई भी घातक हथियार आगे से बिल्कुल नहीं रहना चाहिए। अमेरिका ने हिजबुल्लाह को एक विदेशी आतंकवादी संगठन के रूप में पहले ही कठोरता से नामित किया है।
अमेरिका का स्पष्ट रूप से मानना है कि जब तक यह संगठन सक्रिय है, इजरायल की उत्तरी सीमा पर भारी खतरा बना रहेगा।
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जमीनी स्तर पर हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं और इजरायल दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान चला रहा है। शांति की इन कोशिशों के बीच यह लगातार चल रहा युद्ध एक बहुत बड़ी और गंभीर चुनौती है।दूसरी तरफ से हिजबुल्लाह भी इजरायल के उत्तरी इलाकों में लगातार अपने घातक जवाबी हमले कर रहा है। इन लगातार हो रहे बड़े हमलों की वजह से दोनों तरफ के बेकसूर नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यही मुख्य कारण है कि 14 और 15 मई की शांति वार्ता को लेकर दुनियाभर की उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं।
