अमेरिका-इजराइल की नई रणनीति: ईरान के परमाणु ठिकानों में घुसकर यूरेनियम जब्त करने का बड़ा प्लान

Seize Nuclear Stocks: अमेरिका और इजराइल ने ईरान के 450 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम को जब्त करने के लिए स्पेशल फोर्स भेजने की योजना बनाई है, ताकि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से पूरी तरह रोका जा सके।
US-Israel Secret Mission: Plan to Enter Iran to Seize Highly Enriched Uranium Stocks
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (सोर्स-सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

US Israel Special Operation On Iran: दुनिया भर में शांति की चिंताओं के बीच अब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ एक बेहद गुप्त और साहसी सैन्य योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ईरान के उन खतरनाक परमाणु भंडारों को अपने नियंत्रण में लेना है, जो भविष्य में पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं। यह महज एक हवाई हमला नहीं होगा, बल्कि जमीन पर उतरकर की जाने वाली एक ऐसी कार्रवाई होगी जिसमें जांबाज सैनिकों और वैज्ञानिकों की जान दांव पर होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मिशन सफल होता है, तो मध्य पूर्व में चल रहे इस अंतहीन तनाव की दिशा और दशा हमेशा के लिए बदल सकती है।

परमाणु खतरे को जड़ से मिटाने की तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु शक्ति संपन्न देश नहीं बनने दिया जाएगा। इसी कड़े रुख के तहत अब इजराइल और अमेरिका ने ईरान के 450 किलोग्राम 60% संवर्धित यूरेनियम भंडार को जब्त करने के सैन्य विकल्प पर गंभीर चर्चा शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर के यूरेनियम को बहुत कम समय में परमाणु हथियार बनाने के योग्य 90% स्तर तक पहुंचाया जा सकता है, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।

मिशन की पेचीदगियां और खुफिया योजना

सूत्रों के अनुसार, इस विशेष मिशन में अमेरिकी या इजराइली स्पेशल फोर्स के जवानों को सीधे ईरान की जमीन पर उतरकर वहां के ठिकानों तक पहुंचना होगा। इस ऑपरेशन के लिए दो मुख्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है या तो यूरेनियम को ईरान से बाहर निकाला जाए या विशेषज्ञों द्वारा वहीं उसकी संवर्धन क्षमता कम कर दी जाए। इस चुनौतीपूर्ण कार्य में सैनिकों के साथ परमाणु वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के विशेषज्ञों के शामिल होने की भी प्रबल संभावना जताई गई है।

हमले का सही समय और सुरक्षा चुनौतियां

यह साहसिक ऑपरेशन तभी शुरू किया जाएगा जब अमेरिका और इजराइल को यह पूरा यकीन हो जाएगा कि ईरान की सेना अब सैनिकों के लिए खतरा नहीं बनेगी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि परमाणु खतरे को टालने के लिए आखिरकार किसी न किसी को वहां जाकर इसे हासिल करना ही होगा। अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि यह कोई बड़े पैमाने पर सेना भेजने की योजना नहीं है, बल्कि यह एक बेहद सटीक और छोटा स्पेशल ऑपरेशन होगा।

वैश्विक शांति और संभावित परिणाम

अभी यह तय नहीं हो सका है कि इस गुप्त ऑपरेशन को अकेले अमेरिका अंजाम देगा या इजराइल या फिर दोनों देश मिलकर इस पर संयुक्त कार्रवाई करेंगे। परमाणु ठिकानों की कड़ी सुरक्षा और भूमिगत होने के कारण यह मिशन आधुनिक इतिहास के सबसे जोखिम भरे सैन्य अभियानों में से एक साबित हो सकता है। दुनिया की निगाहें अब इन दो देशों के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी इस क्षेत्रीय युद्ध को विश्व युद्ध में बदल सकती है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com