

Trump Leaves Pakistan Out Of Mediators List: अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा शुरू होने जा रही शांति वार्ता ने पाकिस्तान के कूटनीतिक हलकों में भारी खलबली और बड़ी बेचैनी मचा दी है। डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान से यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि इस विनाशकारी युद्ध को टालने की कोशिशों में अब खाड़ी देश बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान के साथ बातचीत की नई पहल उनके कहने पर फिर से शुरू हो रही है। उन्होंने इस बातचीत के लिए सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है। लेकिन इस सूची में से अचानक पाकिस्तान का नाम पूरी तरह गायब होने से इस्लामाबाद हैरान है।
इससे पहले जून 2026 में हुए समझौते के दौरान पाकिस्तान और कतर को आधिकारिक तौर पर इस शांति वार्ता का मुख्य मध्यस्थ बनाया गया था। स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में 22 जून को हुई उच्च स्तरीय बैठक में पाकिस्तान और कतर ने दोनों देशों को करीब लाने में बहुत सक्रिय भूमिका निभाई थी। लेकिन अब ट्रंप द्वारा पाकिस्तान को पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने से मुनीर-शहबाज सरकार को कड़ा झटका लगा है।
राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार सऊदी अरब, यूएई और कतर ने अमेरिका को ईरान पर बड़े सैन्य हमले से पीछे हटने और बातचीत का नया रास्ता अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। इस वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान खोजना ही सबसे मुख्य लक्ष्य तय किया गया है।
पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उसके ईरान के साथ बहुत गहरे भौगोलिक और धार्मिक संबंध रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अमेरिका और सऊदी अरब के साथ भी उसके रणनीतिक रिश्ते काफी समय से मजबूत बने हुए हैं। इसी नाजुक और दोहरे संतुलन को बनाए रखने की मजबूरी के कारण पाकिस्तान की मध्यस्थता पर समय-समय पर गंभीर सवाल उठे हैं।
इससे पहले रिटायर्ड अमेरिकी जनरल जैक कीन ने पाकिस्तान और कतर पर बातचीत के दौरान ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का गंभीर आरोप लगाया था। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसी बड़े अविश्वास के कारण डोनाल्ड ट्रंप ने इस बार पाकिस्तान को मध्यस्थों की सूची से पूरी तरह अलग रखा है।
दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की सीधी बातचीत शुरू होने के अमेरिकी दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि वह अभी केवल ओमान के साथ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर ही बातचीत कर रहा है। इस भारी गतिरोध के कारण पश्चिम एशिया क्षेत्र में अभी भी बहुत ज्यादा तनाव बना हुआ है।