

China Strategic Gains in US-Iran War: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर है। एक ओर जहां आज अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान पहुंचने वाला है। वहीं ईरान ने इसमें शामिल होने को लेकर अभी तक हामी नहीं भरी है। इसके चलते माना जा रहा है कि करीब दो हफ्तों से थमा युद्ध एक बार फिर शुरु हो सकता है।
इसी बीच एक रिपोर्ट सामने आई है जिसके मुताबिक, चीन (China) जिसे इस युद्ध में ईरान का गुप्त सहयोगी माना जा रहा है। उसने इस संघर्ष में सीधे भाग न लेकर भी कई रणनीतिक लाभ हासिल किए है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सतर्क रुख अपनाया और बिना सैन्य हस्तक्षेप के अपनी स्थिति मजबूत की। आइए और इस युद्ध में चीन को मिले पांच प्रमुख फायदों के बारे में समझाते हैं।
इस संघर्ष के दौरान अमेरिका ने अपने उन्नत हथियारों जैसे JASSM-ER मिसाइल, टॉमहॉक, पैट्रियट और THAAD सिस्टम का इस्तेमाल किया। इससे चीन को यह समझने का मौका मिला कि अमेरिकी सेना कैसे ऑपरेट करती है, AI का उपयोग कैसे करती है, और किस तरह सस्ते ड्रोन महंगे रक्षा सिस्टम को चुनौती दे सकते हैं। यह अनुभव भविष्य में, खासकर ताइवान से जुड़े तनाव में चीन (China) को बेहद फायदा पहुंचा सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई। इससे कई देश रिन्यूएबल एनर्जी की ओर तेजी से बढ़ने लगे। चीन पहले से ही सोलर, विंड, बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों की सप्लाई चेन में अग्रणी है। साथ ही, वह अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खुद पूरा करता है और उसके पास पर्याप्त भंडार भी है, जिससे संकट के दौरान उसकी स्थिति मजबूत बनी रही।
जहां अमेरिका आक्रामक रुख अपनाए रहा, वहीं चीन ने अपेक्षाकृत शांत और संतुलित भूमिका निभाई। उसने पाकिस्तान के माध्यम से मध्यस्थता की कोशिश की, जिससे कई देशों को वह एक स्थिर और भरोसेमंद शक्ति के रूप में नजर आया। इससे उसकी वैश्विक छवि को फायदा मिला।
मिडिल ईस्ट में चल रहे कई AI प्रोजेक्ट्स युद्ध के कारण प्रभावित हुए, जिससे पश्चिमी कंपनियों का निवेश जोखिम में पड़ गया। इस स्थिति में चीन (China) को आगे बढ़ने का अवसर मिला, क्योंकि उसका AI इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से मजबूत है और वह बाहरी सहयोग पर कम निर्भर है।
आधुनिक तकनीक और रक्षा प्रणालियों में रेयर अर्थ खनिजों की अहम भूमिका होती है। चीन पहले से ही इनके खनन और प्रोसेसिंग में प्रमुख स्थान रखता है। युद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा अधिक हथियार इस्तेमाल करने से इन संसाधनों की मांग बढ़ी, जिससे चीन की रणनीतिक अहमियत और बढ़ गई।
हालांकि, चीन (China) के लिए कुछ खतरे भी बने हुए हैं। यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो वैश्विक मांग घट सकती है, जिससे चीन के निर्यात पर असर पड़ सकता है।