किसी को UN की परवाह नहीं, बस इस्तेमाल हो रहा... जयशंकर ने सुधार विरोधी देशों को सुनाई खरी-खरी

UN Reform Demand: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि UN में सुधार का विरोध करने वाले देश केवल इसका इस्तेमाल कर रहे हैं तथा इसमें व्यापक बदलाव के लिए लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया अपनानी होगी।
UN Reform Global South Vision
विदेश मंत्री एस जयशंकर(सोर्स- सोशल मीडिया)
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UN Reform Global South Vision: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें अधिवेशन से इतर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सुधारों पर बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार नहीं होने से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में निराशा लगातार बढ़ रही है।

सुधार का विरोध करने वाले देश इस वैश्विक संस्था की परवाह नहीं करते, बल्कि केवल अपना स्वार्थ साध रहे हैं। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि 21वीं सदी की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप बदलाव अब अनिवार्य हो चुका है।

संयुक्त राष्ट्र में सुधार का विरोध करने वालों पर कड़ा प्रहार

जयशंकर ने कहा कि जो देश UN में बदलाव का विरोध कर रहे हैं, वे वास्तव में इसकी परवाह नहीं करते। वे इस वैश्विक मंच का उपयोग केवल अपने राजनीतिक हितों और लाभ के लिए कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र को आज समय से पीछे माना जा रहा है क्योंकि यह वर्तमान समस्याओं का समाधान करने में अक्षम है। जो देश वास्तव में इस संस्था का सम्मान करते हैं, वे इसमें त्वरित और व्यापक सुधार चाहते हैं।

ORF के अध्यक्ष समीर सरन द्वारा संचालित सत्र में कई अंतरराष्ट्रीय नेता शामिल हुए। इनमें जमैका की विदेश मंत्री कमिना जॉनसन और सूरीनाम के विदेश मंत्री मेल्विन बाउवा शामिल थे। साथ ही घाना के विदेश मंत्री सैमुअल अब्लाक्वा और ईस्ट-वेस्ट सेंटर की CEO सेलेस्ट कॉनर्स उपस्थित रहीं। जयशंकर ने कहा कि सुधारों के लिए सभी देशों के बीच पूर्ण सर्वसम्मति होना जरूरी नहीं है।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया और लिखित मसौदे की आवश्यकता

विदेश मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में फैसले बहुमत और निष्पक्ष मतदान के जरिए किए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में भी सभी को अपनी बात रखने और फिर मतदान कराने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में सुधार की नीयत है तो बातचीत के लिए लिखित मसौदा होना चाहिए। उस लिखित मसौदे में सभी सदस्य देशों के विचारों को शामिल करके लोकतांत्रिक फैसला लेना होगा।

जयशंकर ने कहा कि 'ग्लोबल साउथ' के देशों में अब आपस में सहयोग बढ़ाने की इच्छा है। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देश साथ आ रहे हैं जिससे पुरानी निर्भरताएं टूट रही हैं। यह बदलाव दुनिया को अधिक लोकतांत्रिक बना रहा है और विकासशील देशों को मजबूत मंच दे रहा है। उन्होंने कहा कि UN के अगले महासचिव पद के लिए महिला का चयन निचले स्तर से उठी मांग है।

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21वीं सदी की वास्तविकताओं और सुरक्षा परिषद का पुनर्गठन

UN महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी सुरक्षा परिषद में सुधार का आह्वान किया है। गुतारेस ने कहा कि विश्व निकाय को आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप ढलना होगा। भारत लंबे समय से 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन और विस्तार की मांग कर रहा है। 1945 में गठित यह परिषद 21वीं सदी की प्राथमिकताओं और समकालीन दुनिया का प्रतिनिधित्व नहीं करती।

भारत सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार का दावेदार है। भारत 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता का भी दावेदार है। इसके लिए चुनाव अगले वर्ष जून में होंगे जहां भारत को व्यापक समर्थन मिलने की उम्मीद है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि UN में सुधार ही इस अंतरराष्ट्रीय संस्था की साख को बचा सकता है।

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