अफगानिस्तान में दर्दनाक हादसा, बस पलटने से 25 लोगों की मौत, 27 घायल- VIDEO

Kabul News: अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक बस अनियंत्रित होकर पलटी, जिसमें 25 लोगों की मौत और 27 गंभीर घायल हुए। हादसा चालक की लापरवाही से हुआ। देश में सड़क दुर्घटनाएं आम हैं।
अफगानिस्तान में दर्दनाक हादसा, बस पलटने से 25 लोगों की मौत, 27 घायल- VIDEO
अफगानिस्तान सड़क हादसा (फोटो- सोशल मीडिया)
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Afghanistan Road Accident: अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में बुधवार तड़के एक बड़ा हादसा हो गया है। यहां यात्री को ले जा रही एक बस अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसा इतना भयंकर था कि बस में सवार 25 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि 27 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा काबुल के अरघंडी इलाके में हुआ। तालिबान के एक अधिकारी ने इस दुर्घटना की पुष्टि की है।

जानकारी के मुताबिक, बस दक्षिणी अफगानिस्तान के हेलमंद और कंधार से यात्रियों को लेकर आ रही थी। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतीन कानी ने बताया कि यह हादसा चालक की लापरवाही के कारण हुआ, जिसमें 27 लोग घायल भी हुए हैं।

आए दिन होते हैं हादसे

अफगानिस्तान में सड़क दुर्घटनाएं एक आम समस्या हैं, जिनके पीछे कई कारण हैं। दशकों से जारी संघर्ष की वजह से सड़कें खराब हो चुकी हैं, साथ ही राजमार्गों पर खतरनाक ड्राइविंग और यातायात नियमों की अनदेखी भी दुर्घटनाओं को बढ़ावा देती है।

इसके अलावा, देश में इस्तेमाल हो रही अधिकांश बसें पुरानी और तकनीकी रूप से असुरक्षित हैं, जो हादसों का एक बड़ा कारण है। यह दुर्घटना एक सप्ताह से भी कम पहले पश्चिमी प्रांत हेरात में हुई भीषण सड़क दुर्घटना की याद ताजा करती है, जिसमें करीब 80 लोग मारे गए थे।

तालिबान सरकार को नहीं मिल रही मदद

अफगानिस्तान में यातायात हादसों का इतिहास काफी गंभीर रहा है। मई 2016 में, दक्षिणी प्रांत जाबुल के कंधार-काबुल हाइवे पर दो यात्री बसें और एक ट्रक टकरा गए थे। इस टक्कर के तुरंत बाद वाहनों में आग लग गई थी, जिससे बस में सवार महिलाएं, बच्चे और अन्य यात्री बाहर नहीं निकल पाए और जिंदा जल गए। इस दुर्घटना में कम से कम 73 लोगों की मौत हुई थी जबकि कई गंभीर रूप से घायल हुए थे। यह सारे हादसे अफगानिस्तान में सड़क सुरक्षा की खराब स्थिति और यातायात नियमों की अनदेखी की तरफ गंभीर चेतावनी देते हैं।

अफगानिस्तान में इस समय तालिबान सत्ता पर काबिज है। जिसे यूएन और अमेरिका जैसे बड़े देश मान्यता नहीं देते हैं, इसके चलते तालिबान को विकास के लिए कोई भी बाहरी मदद नहीं मिलती। हालांकि अब चीन और रूस जैसे देशों ने मान्यता देकर तालिबान के लिए दुनिया के रास्ते खोलने की कोशिश की है।

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