अमेरिका का दबाव ठुकराकर श्रीलंका ने दी ईरानी जहाज को शरण, राष्ट्रपति दिसानायके का बड़ा फैसला
Iranian Ship Dock: श्रीलंका ने अमेरिकी हमले की आशंका के बीच ईरानी नौसैनिक जहाज IRINS बुशहर को त्रिंकोमाली पोर्ट पर शरण दी है। राष्ट्रपति ने इसे मानवीय आधार पर लिया गया एक स्वतंत्र फैसला बताया है।
- Written By: प्रिया सिंह
श्रीलंका राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके (सोर्स-सोशल मीडिया)
Sri Lanka Iran Ship Permission: ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव के बीच श्रीलंका ने एक अत्यंत साहसी और कूटनीतिक फैसला लिया है। राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने अमेरिकी नाराजगी की परवाह न करते हुए ईरानी नौसैनिक जहाज IRINS बुशहर को अपने बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति दे दी है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब हाल ही में एक अमेरिकी हमले में 87 ईरानी नाविकों की जान जा चुकी है। श्रीलंका ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी गुटनिरपेक्ष नीति पर कायम रहते हुए मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता दे रहा है।
त्रिंकोमाली पोर्ट पर सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था
श्रीलंका सरकार ने राजधानी कोलंबो के व्यस्त व्यापारिक बंदरगाह के बजाय पूर्वी तट पर स्थित त्रिंकोमाली में ईरानी जहाज को कस्टडी में लेने का निर्णय लिया है। इस जहाज पर कुल 208 लोग सवार हैं जिनमें 53 अधिकारी, 84 कैडेट और 71 अन्य नाविक शामिल हैं जिन्हें श्रीलंका में आने की इजाजत दी गई है। त्रिंकोमाली का बंदरगाह दुनिया के सबसे अच्छे प्राकृतिक गहरे पानी वाले हार्बर में से एक माना जाता है जिसकी रणनीतिक अहमियत बहुत ज्यादा है।
अमेरिका की नाराजगी और श्रीलंका का साहसी पक्ष
इस फैसले से श्रीलंका ने निश्चित तौर पर शक्तिशाली अमेरिका और नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी मोल ले ली है जो इस समय ईरान पर हमलावर हैं। हालांकि राष्ट्रपति दिसानायके का मानना है कि युद्ध में किसी भी बेगुनाह नागरिक या नाविक की जान नहीं जानी चाहिए क्योंकि हर जीवन कीमती है। उन्होंने साफ कहा कि श्रीलंका अपनी स्वतंत्र विदेश नीति की रक्षा करेगा और मानवीय संकट के समय किसी भी दबाव में पीछे नहीं हटेगा।
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तेल और चाय का पुराना मजबूत रिश्ता
श्रीलंका और ईरान के बीच केवल सैन्य नहीं बल्कि गहरे आर्थिक और रणनीतिक संबंध भी रहे हैं जो इस संकट की घड़ी में फिर से उभरकर सामने आए हैं। श्रीलंका ने पूर्व में ईरान से $250 मिलियन का कच्चा तेल खरीदा था और दोनों देशों के बीच “तेल के बदले चाय” का प्रसिद्ध बार्टर समझौता भी हुआ है। इसी मजबूत रिश्ते के कारण श्रीलंका ने घायल नाविकों के इलाज और उनकी सुरक्षा के लिए अपनी नौसेना को तैनात किया है।
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त्रिंकोमाली की रणनीतिक स्थिति और वैश्विक हलचल
त्रिंकोमाली पोर्ट की अहमियत इतनी अधिक है कि ब्रिटिश काल से ही इसे हिंद महासागर में सिंगापुर के बाद दूसरा सबसे जरूरी सैन्य ठिकाना माना जाता रहा है। आज के समय में भारत, अमेरिका और चीन जैसे बड़े देशों की नजरें इस बंदरगाह पर टिकी रहती हैं क्योंकि यहां से बंगाल की खाड़ी पर नियंत्रण रखा जा सकता है। श्रीलंका ने इस संवेदनशील स्थान पर ईरानी जहाज को जगह देकर दुनिया को अपनी संप्रभुता और कूटनीतिक साहस का कड़ा अहसास कराया है।
